भारतीयों में ब्लड प्रेशर यानी BP की समस्या बढ़ रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, यानी WHO, का अनुमान है कि भारत में चार में से एक वयस्क को हाई बल्ड प्रेशर है। इनमें से सिर्फ 12% अपने BP को कंट्रोल रखने का उपाय करते हैं।
इसी साल जून में आई ICMR-इंडिया डायबिटीज की स्टडी भी कहती हैं कि भारत में 3 करोड़ 15 लाख लोग हाई ब्लड प्रेशर के पेशेंट हैं।
ब्लड प्रेशर हाई होने की प्रॉब्लम आखिर क्यों बढ़ रही है। इससे बचने का उपाय क्या है, क्या लक्षण दिखते ही BP को काबू किया जा सकता है। यह सब आज जानेंगे।
एक्सपर्ट:
डॉ. पी वेंकट कृष्णन, इंटरनल मेडिसीन, आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम
डॉ. शिल्पा कुलकर्णी, हेड, एक्सट्रीम डिफेंस डिपार्टमेंट, आईसीयू, रूबी हॉल क्लिनिक, पुणे
सवाल: हाई ब्लड प्रेशर समस्या क्यों बढ़ रही है?
जवाब: खराब लाइफ स्टाइल और हेल्थ के प्रति लापरवाही इसके पीछे का कारण है। कुछ मामलों में यह हेरिडिटरी होती है। यानी अगर परिवार में किसी को हाई BP है तो आपको होने की आशंका दूसरों की तुलना में बढ़ जाएगी।
इसके साथ ही हम कुछ गलती करते हैं जो हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन जाती है। जैसे-
- ज्यादा नमक खाना
- सिगरेट पीना
- वजन बढ़ना
- एक्सरसाइज न करना
- तनाव में रहना
- वसा युक्त भोजन करना
- फल या सब्जी कम खाना
सवाल: बिना ब्लड प्रेशर नापे हम कैसे जान सकते हैं कि हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है?
जवाब: हाई ब्लड प्रेशर या BP के कुछ लक्षण होते हैं। आपके शरीर में कोई ऐसे समस्या हो रही है जो पहले नहीं थी तो उसे इग्नोर न करें। घर में अगर BP नापने की मशीन है तो खुद चेक करें वर्ना जल्द से जल्द डॉक्टर से कॉन्टैक्ट करें।
हाई BP होने पर आमतौर पर कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे-
- थकान
- ज्यादा सिरदर्द
- कम दिखना
- सांस लेने में परेशानी
- चक्कर आना
- सीने में दर्द
- उल्टी या मितली
- बार-बार यूरीन आना
- नाक से खून आना
- यूरीन से खून आना
सवाल: ब्लड प्रेशर मापने से कैसे पता चलता है कि हमें हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है?
जवाब: अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक जब डॉक्टर ब्लड प्रेशर मापते हैं तो वास्तव में नसों से होकर गुजरने वाले खून का प्रेशर मापा जाता है। ब्लड प्रेशर की रीडिंग देखकर यह पता चलता है कि किस रेट से हार्ट ब्लड को पंप कर रहा है।
ये रीडिंग दो तरह के ब्लड प्रेशर में मिलती है। सिस्टोलिक और डायस्टोलिक।
सिस्टोलिक प्रेशर: पंप करने के दौरान जब हार्ट सिकुड़ता है तब नसों के अंदर ब्लड का प्रेशर मापा जाता है।
डायस्टोलिक प्रेशर: हार्ट बीट के दौरान जब हार्ट रेस्ट करता है तब नसों में ब्लड का प्रेशर मापा जाता है।
सवाल: हाई BP के क्या खतरे हैं?
जवाब: हाई BP की वजह से कई तरह परेशानियां हो सकती हैं। हार्ट अटैक, किडनी फेल तक का खतरा होता है। दरअसल यह एक ऐसी सिचुएशन है जब खून का अधिक दवाब नसों में बढ़ जाता है।
या फिर जब आपका ब्लड प्रेशर लेवल 140/90 से अधिक होता है, तो इस स्थिति को हाइपरटेंशन कहा जाता है। जब ब्लड प्रेशर 180/120 के लेवल को पार कर जाता है तो आप डेंजर जोन में चले जाते हैं।
इस दवाब की वजह से ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचता है। इस वजह से हाई BP, हार्ट डिजीज की संभवाना बढ़ती है। इसके अलावा शरीर में कई तरह की प्रॉब्लम होती है।
किस तरह की समस्या हो सकती है इसे डिटेल में समझते हैं…
दरअसल इस सिचुएशन में मांसपेशियों को कम ब्लड मिलता है। इस वजह से सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या दिल का दौरा पड़ सकता है।
दिल का दौरा पड़ने पर हार्ट की पंपिंग कम हो जाती है। इससे हार्ट की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है। वे फिर से सिकुड़ जाती हैं।
ब्लड की मात्रा कमी होने पर बल्ड की पम्पिंग कमजोर हो जाती है। इस वजह से फेफड़ों में पानी जमा हो जाता है। इससे थकान, सांस लेने में तकलीफ होती है। पैरों में सूजन हो सकती है।
ब्रेन की नसों में दबाव बढ़ेगा तो इस वजह से कॉन्ट्रैक्शन या ब्लॉकेज होगा। इसे ही स्ट्रोक कहते हैं। इस वजह दिमाग की नस फट भी सकती है। पैरालिसिस या बोलने में दिक्कत हो सकती है।
सवाल: हाई BP और हाइपरटेंशन क्या एक है?
जवाब: हाइपरटेंशन एक मेडिकल टर्म है, जिसे आमतौर से लोग हाई BP कहते हैं।
सवाल: BP को एक साइलेंट किलर क्यों माना गया है? जवाब: दरअसल लोगों में इसके लक्षण जल्दी दिखाई ही नहीं देते हैं। इस वजह से बीमारी शरीर में पैठ जमा लेती हैं। कुछ लोगों में हल्के लक्षण होते भी हैं तो वो उसे नजरअंदाज कर देते हैं। इस वजह से लोग ब्लड प्रेशर को मैनेज करने और उसके कॉम्पलिकेशन को रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा पाते हैं। हमारी यही लापरवाही हार्ट अटैक और दूसरी जानलेवा बीमारी का कारण बनती है।
सवाल: हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को क्या हम कम कर सकते हैं?
जवाब: हां बिल्कुल ऐसा संभव है। बस आपको डॉक्टर की बताई गई बातों को ध्यान में रखना होगा। याद रखें कि हाइपरटेंशन का बचाव अर्ली स्टेज में ही हो सकता है, बाद में तो दवाई खानी जरूरी हो जाती है।
- ब्लड प्रेशर की मॉनिटरिंग घर पर और डॉक्टर के पास जाकर रेगुलर करते रहें।
- एक्सरसाइज करें और बैलेंस्ड डाइट लें।
- नमक खाना कम कर दें, ऊपर से नमक तो बिल्कुल न लें।
- जिनका वजन ज्यादा है उन्हें इसे जल्द से जल्द कंट्रोल करने की जरूरत है।
- कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करें।
- किसी भी तरह के नशे से दूर रहना सबसे जरूरी है।
सवाल: आमतौर से लोग BP की दवा खाने से बचते हैं, उन्हें लगता है कि दवा खाने की आदत पड़ जाएगी, जिससे दूसरी समस्या बढ़ेगी, यह बात कितनी सही है?
जवाब: आदत खराब चीजों की पड़ती है। दवाई इलाज के लिए लेनी पड़ेगी ही, आपके पास कोई ऑप्शन नहीं है। याद रखें कि यह ऐसी बीमारी है जिसे कंट्रोल किया जाता है। इसका निदान नहीं है। ऐसे में दवा लेने के बावजूद BP मॉनिटर करने की सलाह दी जाती है।
जबकि, पेशेंट ठीक इसका उल्टा करते हैं। जब दो-तीन दिन BP नॉर्मल दिखा तो दवा लेना बंद कर दिया। इसी तरह जिस दिन सिरदर्द हुआ दवाई ले ली, फिर बंद कर दी। ऐसा कर वो अपने जीवन से खिलवाड़ करते हैं।
सवाल: जो लोग लंबे समय से दवा खा रहे हैं उनको कुछ समय के बाद उस दवा को बदलने की क्या वाकई जरूरत होती है?
जवाब: रेयर केस में ही इसकी दवा बदली जाती है। BP की अच्छी बात यह है, जिस मेडिसिन से यह कंट्रोल है उसे डॉक्टर कभी नहीं बदलते। आपने देखा होगा कि BP पेंशेट 20-20 साल से एक ही दवा ले रहे हैं। यही इसकी वजह है।


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