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दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर मशीन ठीक करते समय बोरवेल में फंस गया था इंजीनियर, चल रहा था रेस्क्यू ऑपरेशन, मिट्टी में दबने से बुरी तरह गल गया शव, 45 घंटे बाद बोरवेल से निकाली बॉडी; जानें पूरी घटना

जालंधर/ दिल्ली-अमृतसर-कटरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के काम के दौरान करतारपुर के गांव बसरामपुर में 80 फुट गहरे बोरवेल में दबे मैकेनिक सुरेश का शव NDRF की टीम ने 45 घंटे बाद निकाल लिया। लगातार मिट्‌टी में दबे रहने की वजह से सुरेश का शव बुरी तरह गल गया। बॉडी निकालने के बाद NHAI और NDRF की टीम ने उसे जालंधर सिविल अस्पताल भेज दिया।


देर शाम तक अस्पताल प्रशासन ने कहा कि बॉडी पहुंचने के बावजूद पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकी क्योंकि अस्पताल प्रशासन के पास पुलिस रिपोर्ट नहीं पहुंची।

जालंधर सिविल अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेट डॉ. गीता ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट आने के बाद DC या मजिस्ट्रेट की तरफ से आदेश आएंगे। उसके बाद मेडिकल बोर्ड रात में भी पोस्टमार्टम कर सकता है। रात में पोस्टमॉर्टम करने को लेकर किसी तरह की कोई कानूनी दिक्कत नहीं है।

52 साल का सुरेश हरियाणा के जींद का रहने वाला है। बचाव कार्य में सबसे बड़ी दिक्कत बगल में बने तालाब की वजह से आ रही थी। NDRF की टीमें 50 फीट तक खुदाई कर चुकी थी, लेकिन तालाब के चलते उसके बाद की मिट्‌टी बेहद नरम है और खुदाई में बार-बार खिसक रही थी।

तालाब के कारण नरम मिट्टी बनी रेस्क्यू में बाधा

जालंधर के ADC जसवीर सिंह ने बताया कि 45 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरेश के शव को बाहर निकाल लिया गया है। घटना स्थल के पास छप्पड़ (तालाब) के कारण 50 फुट की खुदाई के बाद मिट्‌टी काफी नरम थी। वह बार-बार खिसक रही थी, जिसके चलते रेस्क्यू में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार रात यहां मिट्टी दोबारा खिसक गई थी। उसके बाद सोमवार सुबह भी दो बार मिट्टी खिसकी थी।

इसलिए बचाव के कार्य में टीम को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और इतना टाइम भी लगा। घटनास्थल पर 5 JCB मशीनें लगातार मिट्टी बाहर निकाली जा रही थी। यहां मिट्टी के 150 टिप्पर निकाले गए हैं। लेकिन इतना कुछ तामझाम करने के बावजूद भी सुरेश की जान नहीं बच पाई है। सुरेश जिस आक्सीजन सिलेंडर को लेकर बोर में उतरा था उसकी लाइफ भी 18 घंटे ही थी।

टीम को बदलनी पड़ी स्ट्रेटेजी

रेस्क्यू वाली जगह के बगल में पुराना तालाब होने के कारण NDRF की टीम को बार-बार अपनी स्ट्रेटेजी बदलनी पड़ी। पहले रविवार देर रात तक NDRF की टीम के सुरेश के नजदीक पहुंच जाने की खबर आई थी। उसके बाद मौके पर एंबुलेंस वगैरह भी तैयार कर ली गई थी, लेकिन टीम सुरेश तक पहुंच नहीं पाई। उस समय मशीन खराब हो जाने के कारण ऑपरेशन धीमा पड़ गया।

भाई बोला- टेक्निकल एक्सपर्ट नहीं, किसान था

सुरेश के छोटे भाई सत्यवान ने बताया कि उन्हें रविवार सुबह घटना की सूचना मिली जिसके बाद वे तुरंत जालंधर पहुंच गए। एक्सप्रेस-वे का काम कर रही कंपनी अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर रही है। सत्यवान ने बताया कि प्रशासन और एक्सप्रेस-वे का काम कर रही कंपनी के अधिकारी सुरेश को टेक्निकल एक्सपर्ट बता रहे हैं जबकि वह तो गांव में किसानी करता था। वह सिर्फ काम करने जालंधर आया था। उसे मशीनों की रिपेयरिंग या दूसरी कोई टेक्निकल जानकारी नहीं थी।

मशीन खराब होने पर उतरा था बोरवेल में

दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के तहत करतारपुर के पास बसरामपुर गांव में सड़क पर फ्लाईओवर बनाने का काम चल रहा है। शनिवार को यहां पिलर बनाने के लिए R-1500 मशीन से जमीन में बोर किया जा रहा था कि अचानक मशीन खराब हो गई। इस पर मशीन ठीक करने के लिए इंजीनियर पवन और सुरेश को दिल्ली से बुलाया गया। शनिवार शाम 7 बजे दोनों ऑक्सीजन सिलेंडर और दूसरे जरूरी उपकरणों के साथ बोरवेल में उतरे थे। उसी समय अचानक मिट्‌टी ढह गई और सुरेश बोरवेल में फंस गया।

पवन ने उसे बचाने की कोशिश की तो सेफ्टी बेल्ट टूट गई। इस पर पवन तो ऊपर आ गया लेकिन सुरेश अंदर ही फंस गया। इसके बाद बोरवेल में दोबारा मिट्‌टी खिसक गई। बोरवेल में मैकेनिक के फंस जाने की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कराया।

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