21 परिवारों को मॉडल आदिवासी गांव में पीएम आवास देने की योजना थी, लेकिन वर्त्तमान में एक भी मकान रहने लायक नहीं
कोरबा/ मॉडल आदिवासी गांव में प्रशासन ने 21 परिवारों के लिए पीएम आवास बनाया। आज एक मकान रहने लायक नहीं है। मजबूरी में परिवार अपने पुराने झोपड़ी और मुर्गी पालन के शेड में रह रहे है।
कोरबा ब्लॉक के ग्राम माखूरपानी के आश्रित पहाड़ी कोरवा गांव छातासराई को जिला खनिज न्यास मद से मॉडल बनाने की स्वीकृति 2017-18 में मिली थी। आरईएस, पंचायत, बिजली, पीएचई, कृषि, पीएम आवास, वन विभाग की एक संयुक्त तौर पर प्लानिंग कर काम शुरु हुआ।
पीएम आवास के तहत 21 मकान बने। हर मकान के साथ मुर्गी पालन के लिए शेड भी बनाकर दिए गए। करीब तीन किलोमीटर लंबी लाइन खींचने के लिए खंभे, ट्रांसफार्मर व तार लगाए गए। प्रवेश द्वार, पेवर ब्लॉक का काम भी हुआ। जब इसका लोकार्पण हुआ तब दावा किया गया कि इस मॉडल गांव की तरह जिले के दूसरे पहाड़ी कोरवा गांव में काम होगा। बारिश के बाद अब मकान रहने लायक नहीं रहे। इतना सीपेज है कि कभी भी मकान का छज्जा गिर सकता है। लोग मजबूरन पुराने घरों में या फिर जो मुर्गी के लिए शेड बनाए गए थे। उसमें रहने चले गए। कुछ महीने पहले शिकायत हुई तो मेंटनेंस में भी अधिकारियों ने भ्रष्टाचार कर दिया।
पहला प्रोजेक्ट फेल, दूसरे की सोच भी नहीं रहे
जिला प्रशासन का दावा था कि एक-एक करके पहाड़ों में बसे ऐसे पहाड़ी आदिवासी कस्बों को मॉडल गांव बनाया जाएगा। पहला प्रोजेक्ट ही पूरी तरह से फेल होने के बाद अब अधिकारी दूसरे मॉडल गांव के बारे में सोच तक नहीं रहे हैं।
आधी सड़क ही बनी,नाली कागजों में
सतरेंगा मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर घने जंगल के ऊपर पहाड़ी पर यह गांव बसा है। मुख्य मार्ग से गांव तक आधी सड़क ही सीसी रोड हो सकी है। इधर बोर्ड में अंकित नाली का निर्माण अब तक नहीं हुआ है। इससे सीसी रोड पर चलना मुश्किल हो गया है। वन विभाग ने कुछ हिस्से मेें मुरूमीकरण किया था बारिश में वह भी उखड़ गई है।
दावा था हर साल मिलेंगी 10 मुर्गियां, एक साल बाद ही भूल गए
पहाड़ी कोरवा परिवारों को वादा किया गया था कि हर साल उनको 10 मुर्गियां दी जाएगी। ताकि उनकी आजीविका अच्छी तरह से हो सके। पहले साल 10 मुर्गियां दी गई उसके बाद अधिकारी भूल गए। अब ये मुर्गी के शेड में लकड़ी रखने के काम आ रहा है।
पीएम आवास तो बनने के बाद से जर्जर हालत मेें है। लोग डरकर मुर्गी के शेड और पुराने झोपड़ी में रह रहे हैं। कई बार मरम्मत की मांग की जा चुकी है, लेकिन इसमें अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई।
बहोरन सिंह, सरपंच, माखुरपानी

टिप्पणियाँ