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शिक्षा मिशन द्वारा २ करोड़ ८५ लाख की लागत से क्रय किया, शिक्षण सामग्री क्रय करने में भंडार क्रय नियमों का पालन किया गया या नहीं जांच शुरू हो गई है

रायगढ़/ शिक्षा मिशन द्वारा प्रायमरी स्कूलों में शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार के लिए क्रय की गई सामग्री में जांच शुरू हो गई है। इसमें मिशन ने २ करोड़ ८५ लाख रुपए का शिक्षण सामग्री प्रायमरी स्कूलों के लिए क्रय किया है।

शासन से जिले के प्रायमरी स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता सुधार व सुझावनात्मक शिक्षण सामग्री क्रय करने के लिए २ करोड़ ८५ लाख रुपए की स्वीकृति वर्ष २०२२ में की थी। उक्त स्वीकृत राशि के एवज में प्रत्येक प्रायमरी स्कूल के लिए १४ हजार ५०० रुपए के माध्यम से करीब २ हजार प्रायमरी स्कूलों के लिए २ करोड़ ८५ लाख की सामग्री रायपुर के एक फर्म से की गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त शिक्षण सामग्री क्रय करने में भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया है। जिसको लेकर कलेक्टर ने जांच के लिए अपर कलेक्टर राजीव पांडेय के अध्यक्षता में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग बीके राजपूत, जिला कोषालय अधिकारी ज्योती सिंह मुख्य महाप्रबंधक शिव कुमार राठौर की ४ सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की है। उक्त टीम ने जांच शुरू करते हुए मिशन से उक्त खरीदी से संबंधित दस्तावेजों की फाईल मंगाकर इसमें जांच शुरू कर दिया गया है। फिलहाल इस मामले में जांच शुरू होने के बाद मिशन में कर्मचारियों के बीच चर्चा का दौर शुरू हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में टेंडर नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया है।

  • जांच समिति के अध्यक्ष को लेकर उठ रहा सवाल

विदित हो कि पूर्व में अपर कलेक्टर को बजरमुड़ा के मुआवजा घोटाले की शिकायत पर जांच का जिम्मा दिया गया था जिसमें जांच ही नहीं किया गया अंत में दोबारा शिकायत पर शासन को उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करना पड़ा, इसके अलावा उप पंजीयक सहकारिता के खिलाफ हुई शिकायत की जांच का जिम्मा दिया गया था जिसमें आज तक जांच पूरी नहीं की गई। इसके अलावा और कुर्छ मामले में शिकायत हुई है।

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