सॉफ्टवेयर इंजीनियर आकाश दुबे इंदौर में रहते हैं। उन्होंने अपना क्रेडिट कार्ड बैंक के लॉकर में बंद रखा था। इस दौरान लंदन में उससे लेनदेन हुआ। इसकी शिकायत उन्होंने संबंधित बैंक में की। जब कोई एक्शन नहीं लिया गया तो वो कंज्यूमर कोर्ट पहुंचे। वहां निजी बैंक के खिलाफ उन्होंने 3 साल अपना केस खुद लड़ा। हाल ही में कंज्यूमर फोरम यानी उपभोक्ता फोरम ने आकाश दुबे के पक्ष में फैसला सुनाया है।
सवाल: खुद का केस लड़ने की जरूरत क्यों पड़ती है?
जवाब: जैसे ही किसी भी तरह का मुकदमा दर्ज होता है तुरंत वकील की मदद ली जाती है। कई बार कुछ मामले ऐसे भी हो जाते है जिनमें कोई वकील केस की पैरवी अच्छे से नहीं करता या उनकी फीस बहुत ज्यादा होती है।
इन कंडीशन में हर व्यक्ति के मन में एक बार तो यह सवाल आता ही है कि काश वो खुद अपना केस लड़ पाता। इसलिए कानून ने सभी को अपना केस लड़ने का अधिकार दिया है।
सवाल: बिना वकील के क्या कोई व्यक्ति खुद ही अपना केस लड़ सकता है?
जवाब: बिल्कुल, ऐसा संभव है। संविधान की धारा 32 के एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के मुताबिक जब भी कोई व्यक्ति किसी सिविल या आपराधिक मामले में फंस जाता है तब वह कोर्ट में अपना केस लड़ सकता है।
सवाल: कोर्ट में खुद का केस लड़ने का प्रोसेस क्या है?
जवाब: इसके लिए आपको जज से परमिशन लेना जरूरी है। इजाजत लेने के बाद खुद के केस में पैरवी कर सकते हैं। आप अपने केस को समझने और आगे की कार्यवाही के लिए जज से समय ले सकते है। कई बार जज आपको वकील रखने की सलाह देंगे। वकील न रखने के पीछे का मकसद आप अपना पक्ष रखकर समझा सकते हैं।
सवाल: कंज्यूमर कोर्ट में केस लड़ने के लिए ग्राहक को खुद पैसे खर्च करने होंगे?
जवाब: शुरुआत में आपको कोर्ट केस लड़ने के लिए पैसे खुद ही देने होंगे। मुआवजे के तौर पर आप इसका खर्चा भी कंपनी से क्लेम कर सकते हैं।
सवाल: क्या खुद केस लड़ने के लिए किसी स्पेशल क्वालिफिकेशन की जरूरत होती है?
जवाब: नहीं, इसके लिए किसी तरह के क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं होती है। जिन लोगों के पास लॉ की डिग्री नहीं है वो भी अपना केस लड़ सकते हैं।
आपको सिर्फ कंज्यूमर यानी ग्राहक होने की जरूरत है। ग्राहक को अपना केस समझ आना चाहिए कि वो जो कह रहा है वो पूरी तरह से सही है। उसे कोर्ट में अपने केस से जुड़े प्रूफ भी देने होंगे।
सवाल: कोर्ट में खुद केस लड़ने वाला व्यक्ति क्या दूसरों का केस लड़ सकता है?
जवाब: नहीं। ऐसी कंडीशन में पावर ऑफ अटॉर्नी के हिसाब से व्यक्ति पर्सनल मुकदमे के लिए कोर्ट में अपना केस लड़ सकता है, बहस कर सकता है।
इससे अलग वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए वकालत नहीं कर सकता। हालांकि, अपना केस लड़ने के लिए भी आपको कानून, प्रोसेस और कोर्ट के नियमों के बारे में पता होना चाहिए, ताकि आप अपना केस न हारें।
खुद लड़ रहे हैं अपना केस, याद रखें ये बातें
हिंदी और अंग्रेजी भाषा अच्छी से आती हो।
कोर्ट के अंदर होने वाली कार्यवाही के सभी चरणों को अच्छे से समझकर ही अपना केस लड़ने की परमिशन लें।
आप पर जिस धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, सबसे पहले उस धारा के बारे में सारी जानकारी हासिल कर लें।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार का झूठ न बोलें और न ही किसी तरह की अभद्रता करें।
बिना फीस दिए वकील की मदद ले सकते हैं...
हमारे देश में बहुत से लोग ऐसे है जो ज्यादा पढ़े-लिखे न होने की वजह से अपना केस खुद नहीं लड़ पाते। या फिर वकील की फीस नहीं दे पाते हैं तो वह व्यक्ति अपने लिए फ्री में वकील लेने की गुजारिश कोर्ट के सामने कर सकता है।
जिसके बाद कोर्ट की तरफ से फ्री में या बिना किसी खर्च के सरकारी वकील को आपके केस के लिए अपाइंट कर दिया जाता है।

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