एयरपोर्ट और मल्टीप्लेक्स में खाने की चीजें क्यों इतनी महँगी होती है जानते है आप, इसकी शिकायत कंज्यूमर फोरम में की जा सकती है या नहीं? जानते हैं...
सोशल मीडिया पर एक रेस्टोरेंट बिल की तस्वीर वायरल हो रही है। इसमें मैगी की कीमत 193 रुपए लिखी हुई है। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर ट्विटर पर सेजल सूद ने पोस्ट की है। उन्होंने यह मैगी एयरपोर्ट पर खरीदी थी।
क्या आपने कभी सोचा है कि एयरपोर्ट और मल्टीप्लेक्स में हम खाने-पीने की चीजें अक्सर ज्यादा पैसे देकर क्यों खरीदते हैं? बढ़ी हुई कीमत की शिकायत कंज्यूमर फोरम में की जा सकती है या नहीं? आज हम इसी सब्जेक्ट पर बात करते हैं…
सवाल: 70 ग्राम मैगी जिसकी कीमत 14 रुपए है, अगर एयरपोर्ट रेस्टोरेंट में दो पैकेट भी मैगी बनाई गई होगी तो उसकी कीमत 28 रुपए होगी, ऐसे में उसके लिए 193 रुपए का बिल कैसे बना?
जवाब: मैगी के 193 रुपए के बिल की वायरल तस्वीर को ध्यान से देखें। उस पर रिसीप्ट नंबर और बिल की डेट है। बिल 16 जुलाई को बना है। बिल में एक मसाला मैगी का चार्ज 184 रुपए लिखा है। इस पर कुल GST 9.20 रुपए लिया गया है। ऐसे में एक मैगी का कुल बिल 193 रुपए बन गया।
सवाल: इस केस में GST तो केवल 9.20 रुपए था, मैगी 193 रुपए की थी, इसके पीछे क्या कारण हो सकता है, क्या बिल तय करने का कोई आधार नहीं होता?
जवाब: काेई भी होटल और रेस्तरां कुछ बातों के आधार पर अपने मेन्यू की रेट फिक्स करते हैं। जैसे-
- जहां आउटलेट है उस जगह की कॉमर्शियल वैल्यू क्या है।
- उस डिश को क्या कोई प्रोफेशनल बना रहा है।
- क्या वो डिश उसकी सिग्नेचर डिश है जिसे चखने के लिए ग्राहक को ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
- उसे बनाने के लिए जो इंग्रीडिएंट्स यूज हो रहे हैं, उनकी क्वालिटी क्या है, वो इम्पोर्टेड तो नहीं हैं।
सवाल: GST क्या है?
जवाब: GST यानी Goods And Services Tax. हिन्दी में इसका मतलब होता है- वस्तु एवं सेवा कर। किसी सामान को खरीदने या किसी सर्विस को खरीदने पर GST चुकाना पड़ता है। भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू है।
सवाल: GST खाने-पीने के सामान खरीदने पर भी देना पड़ता है?
जवाब: बिल्कुल। जो चीजें पैक्ड हैं, उसके लिए आपको GST देना ही होगा।
इसके साथ GST नीचे लिखी सिचुएशन में देनी पड़ती है या यों कहें कि इन चीजों को खरीदने में बिल में GST जोड़ी जाती है।
प्रीपैकेज्ड, लेबल्ड अनाज, दाल और आटे पर GST देना पड़ता है। खुले में इनकी बिक्री पर कोई GST नहीं लगेगा। इसका मतलब अगर आप आटा, दाल, चावल, सब्जी खुले में खरीद रहे हैं तो GST चार्ज नहीं देना पड़ेगा। उन्हीं चीजों को अगर पैकिंग में खरीद रहे हैं तब चार्ज लगेगा।
डेकोरेशन, बैंड बाजा, फोटो-वीडियो, शादी के कार्ड, घोड़ा-बग्घी, ब्यूटी पार्लर और लाइटिंग पर भी 18% GST लगता है।
शादी के लिए खरीदे जाने वाले कपड़ों और फुटवियर पर 5 से 12 फीसदी GST लगता है।
गोल्ड ज्वेलरी पर 3 फीसदी GST लगता है। 3 लाख की ज्वेलरी खरीदने पर 6 हजार रुपए GST के रूप में देना होगा।
बस-टैक्सी सर्विस पर भी 5 फीसदी GST लगता है।
सवाल: क्या कोई ग्राहक GST देने से भी मना कर सकता है?
जवाब: जी नहीं। न तो ग्राहक GST देने से मना कर सकता है न ही इस बात की शिकायत कंज्यूमर कोर्ट में कर सकता है। इसकी वजह यह है कि ग्राहक कुछ भी खरीदते वक्त सबसे पहले दाम देखता है। उसके बाद ही वो अपना ऑर्डर देता है। अगर उसने दाम देखने के बाद ऑर्डर दिया है तो उसे यह भी मालूम है कि स्टेट या सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा GST लगाई जाती है, जिसका भुगतान उसे करना होगा।
सवाल: इसका मतलब एयरपोर्ट केस में मैगी के ज्यादा कीमत की शिकायत वो महिला नहीं कर सकती है?
जवाब: एयरपोर्ट वाले केस में ग्राहक ने जब सामान खरीदा था, तब मेन्यू में कीमत देखी होगी। अगर बिल सही है, प्रोडक्ट की गुणवत्ता सही है, सेवा में कोई कमी नहीं है। ऐसी सूरत में वह कंज्यूमर फोरम में शिकायत नहीं कर सकती।
- रेस्टोरेंट वालों को अधिकार है अपने प्रोडक्ट की कीमत तय करना का।
बीते महीने त्रिदीप के मंडल नाम के एक ट्विटर यूजर ने PVR INOX का एक बिल शेयर था। यूजर को नोएडा में PVR सिनेमा आउटलेट पर पॉपकॉर्न और कोला ड्रिंक्स के लिए 820 रुपए चुकाने पड़े थे। 55 ग्राम पनीर पॉपकॉर्न के लिए 460 रुपए, 600 मिलीलीटर पेप्सी के लिए 360 रुपए वसूले गए थे।
सवाल: मल्टीप्लेक्स में बिकने वाली खाने-पीने की चीज के महंगे होने के पीछे भी एयरपोर्ट वाला लॉजिक है क्या?
जवाब: हां, वहां भी कॉमर्शियल स्पेस महंगा होता है। इसके साथ GST और सर्विस टैक्स भी जोड़ा जाता है। यहीं नहीं, रेस्टोरेंट और होटल में भी दोनों टैक्स बिल में जोड़े जाते हैं।
सवाल: त्रिदीप के मंडल ने जब बिल सोशल मीडिया पर शेयर किया था, उसके बाद PVR INOX ने कैसे रिएक्ट किया?
जवाब: 360 रुपए की पेप्सी, 460 रुपए के पॉपकॉर्न वाले बिल के वायरल होने पर PVR INOX ने कहा था- हम मानते हैं कि हर राय मायने रखती है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। इसके बाद कंपनी ने कीमतों में 40% तक की कटौती की थी।
GST काउंसिल ने भी 11 जुलाई को सिनेमा हॉल में खाने-पीने की चीजों के बिल पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% कर दिया था।
सवाल: सर्विस चार्ज आखिर है क्या?
जवाब: जब आप किसी प्रोडक्ट या सर्विस को खरीदते हैं तो उसके लिए कुछ पैसे देने पड़ते हैं। इसे ही सर्विस चार्ज कहते हैं। यानी होटल या रेस्टोरेंट में खाना परोसने और दूसरी सेवाओं के लिए ग्राहक से सर्विस चार्ज लिया जाता है। ग्राहक भी होटल या रेस्टोरेंट से बिना सवाल-जवाब किए सर्विस चार्ज के साथ पेमेंट कर देते हैं। हालांकि ये चार्ज ट्रांजैक्शन के समय ही लिया जाता है न कि सर्विस लेते वक्त।
इन जगहों पर लिया जाता है सर्विस चार्ज
- होटल या रेस्टोरेंट में खाने के बाद सर्विस चार्ज लिया जाता है।
- बैंक में कोई ट्रांजैक्शन करने के बाद सर्विस चार्ज लिया जाता है।
- ट्रैवल और टूरिज्म एजेंसियों में भी सर्विस चार्ज देना पड़ता है।
सवाल: रेस्टोरेंट और होटल में खाने-पीने के बाद ग्राहकों को सर्विस टैक्स देना क्या जरूरी है?
जवाब: नहीं। ऐसा करना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। सर्विस टैक्स देना है या नहीं यह अधिकार सिर्फ और सिर्फ ग्राहक के पास होता है। कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहक से जबरदस्ती सर्विस टैक्स नहीं मांग सकता है। ग्राहक अगर सर्विस टैक्स नहीं देना चाहता है तो बिल से उसे हटवा सकता है।
सवाल: क्या सर्विस चार्ज नाम बदल कर लिया जा सकता है?
जवाब: ऐसा जरूरी नहीं कि होटल या रेस्टोरेंट वाले आपसे सर्विस चार्ज के नाम से ही एक्स्ट्रा पैसे लें। इसे कई बार बुकिंग फीस, ट्रैवल में सिक्योरिटी फीस, बैंकों में अकाउंट मेंटेनेंस फीस और कस्टमर सर्विस के नाम से भी लिया जाता है।
अब भी आपको समझ में यह बात नहीं आई तो आसान शब्दों में समझते हैं। हम एक कार खरीदने जाते हैं– वहां हमसे सर्विस चार्ज के नाम से अलग-अलग तरह की फीस ली जाती है। यह चार्ज एसेसरीज फिटिंग चार्ज के नाम से हो सकती है या फिर कई जगह इसे प्री डिलिवरी इंस्पेक्शन चार्ज के तौर पर वसूला जाता है। कुछ दुकानदार क्रेडिट कार्ड स्वाइप करने के बदले भी पैसे लेते हैं।
सवाल: अगर होटल या रेस्टोरेंट ग्राहक से जबर्दस्ती सर्विस चार्ज मांगे तो क्या कर सकते हैं?
जवाब: ग्राहक इस बात का विरोध कर सकते हैं और उपभोक्ता अदालत में जाकर शिकायत कर सकते हैं।
consumerhelpline.gov.in या टोल फ्री नंबर 1800-11-4000 पर भी शिकायत जरूर कर सकते हैं।


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