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पब्जी- फ्री फायर की ऐसी लत लगी की बच्चे की आंखें घूम गईं, नींद में भी ‘फायर-फयर’ बड़बड़ाता रहता था, हाथ पैर बांध कर रखना पड़ा

अलवर/ फ्री-फायर और पब्जी जैसे ऑनलाइन गेम की लत के कारण सातवीं क्लास में पढ़ने वाले 14 साल के लड़के का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। हालात ये हो गए कि बच्चे को बांधकर रखना पड़ा। हालत इतनी बिगड़ गई कि पिछले 15 दिनों से उसे स्पेशल बच्चों के हॉस्टल में रखना पड़ा है।

मामला अलवर शहर के मूंगस्का का है। बच्चे का नाम रमेश (बदला हुआ नाम) है। मां शहर के 6 घरों में झाड़ू-पोंछा करती है। पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। परिवार में सात महीने पहले पहला एंड्रायड फोन आया। ये फोन रमेश की मां को जनवरी 2023 में मिला था, जहां वह काम करने जाती थी।

रमेश की मां फोन लेकर घर गई तो घरवालों को लगा कि बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई आसानी से होगी और परिवार के दूसरे लोगों से भी वीडियो कॉल पर अच्छे से बात हो जाएगी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि फोन पर ऑनलाइन गेम्स खेलने की लत उनके बच्चे की जिंदगी बर्बाद कर देगी। जब ये फोन रमेश के हाथ लगा तो दिन हो या रात वह केवल इसी गेम में डूबा रहता था। 

खाना-पीना छूट गया, नींद में भी ‘फायर-फयर’ बड़बड़ाता रहता था।

स्कूल में दोस्तों से पता चला ऑनलाइन गेम का

रमेश के घरवालों ने बताया कि जनवरी में घर में मोबाइल आने के पहले तक उसे इन ऑनलाइन गेम के बारे में कुछ भी पता नहीं था। स्कूल और मोहल्ले के दोस्तों से पता चलने के बाद वह गेम खेलने लगा। धीरे-धीरे 1 महीने में उसे इसकी खतरनाक लत लग गई कि वह ये गेम खेले बिना रह नहीं पाता था। जैसे ही उसके हाथ मोबाइल लगता वह सीधे गेम खेलने लग जाता। देर रात तक रजाई में छुप-छुपकर वह गेम खेलता और सुबह उठते ही दोबारा मोबाइल पर गेम खेलने लग जाता।

घर में मिलता फ्री वाई-फाई नेटवर्क, टोकते तो गुस्सा करने लगता

घरवालों ने बताया कि उनके घर में फ्री वाई-फाई नेटवर्क मिलता है। जब घरवाले सो जाते तो वह बिस्तर में छुपकर खेलने लग जाता। मोबाइल लेकर भी भाग जाता। जब उसे टोकते तो गुस्सा आने लगा। मार्च महीने में तो वह 8 से 10 घंटे तक गेम खेलता था। इतनी लत लग गई कि वह 15 घंटे तक गेम खेलने लगा। धीरे-धीरे उसका दिमागी संतुलन बिगड़ने लगा।

घरवाले जब उसे टोकते तो वह कई बार उन पर चिल्लाने लगा। दो बार घर से भागकर रेवाड़ी चला गया। घरवाले उसे रेवाड़ी से घर लेकर आए। इसके बाद दो महीने अप्रैल से मई तक उसे घर में बांध कर रखना पड़ा।

पिता बोले - वह रात भर गेम खेलता था

रमेश के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। वह भी इन दिनों खराब पड़ा है। उन्होंने बताया कि रमेश दिन-रात मोबाइल पर गेम खेलता था। उनको पता नहीं था गेम में क्या होता है। जब रमेश की तबीयत बिगड़ी तब हमें पता लगा कि गेम से उसका दिगामी संतुलन बिगड़ गया है।

हमने कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर उसे दिव्यांग आवास गृह में भेजना पड़ा। अब वहां साइकास्ट्रिक से उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टर ने बताया कि उसकी नसों में खिंचाव आ गया। इसके कारण से उसकी स्थिति मानसिक रोगियों जैसी हो गई।

डेढ़ महीने पहले अचानक उसकी आंखें घूम गईं

खुद रमेश ने बताया कि फ्री फायर गेम बहुत ज्यादा खेलता था। कभी वह सामने वाले को मारता था तो भी उसे भी मार दिया जाता था। उसे ऐसा लगता कि वह गेम हार गया है, तो दोबारा बदला लेने के लिए वह खेलता था।

जब मां-बाप काम पर चले जाते तो वह दिनभर गेम ही खेलता था। पढ़ाई के साथ सब कुछ छूट गया। अचानक डेढ़ महीने पहले गेम खेलते-खेलते उसकी आंखें घूम गईं। आंखों ने काम करना बंद कर दिया।

रात को सोते हुए भी फायर-फायर करता था

रमेश के बड़े भाई ने बताया कि रमेश सोता भी बहुत कम था। बीच में खाने पीने पर भी पूरा ध्यान नहीं दिया। रात को सोते समय भी नींद में फायर-फायर करता था। दिन में भी उसकी जुबां पर फायर ही रहता था। उसकी तबीयत इतनी बिगड़ती गई कि उसके हाथ-पैर कांपने लगे। शरीर ने काम करना बंद कर दिया। इतना ही नहीं वह अब ढंग से भी नहीं बोल पा रहा है।

दादी-मां का रो-रोककर बुरा हाल

रमेश की मां की कमाई से घर चलता है। पिता का ई-रिक्शा छूट गया और अब बेटे की तबीयत बिगड़ने से पूरा परिवार परेशान है।

घरवालों ने बताया कि हमने सोचा कि डॉक्टर्स को दिखाने पर वह नॉर्मल हो जाएगा, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई। इसके बाद उसे अलवर के दिव्यांग आवास गृह में भेजा गया।

इधर, दादी व मां का रो-रोक बुरा हाल है। वे कहती हैं कि पता नहीं था उनका बेटा इस तरह संकट में आ जाएगा। दादी ने कहा कि रमेश बीच में लाल दंत मंजन भी अधिक करने लग गया था। उसकी भी उसे लत पड़ गई थी। बाद में मोबाइल गेम की लत पड़ गई।

रमेश ने खुद बताया कि उसकी ये हालत ऑनलाइन गेम की वजह से हुई है। अब वह स्पेशल बच्चों के साथ रह रहा है। कहता है- जल्द ही सही होकर घर लौटेगा।

ये बच्चा पब्जी व फ्री फायर गेम से तनाव में

परमार्थ दिव्यांग कल्याणा संस्थान के ट्रेनर भवानी शर्मा ने कहा कि यह रमेश फ्री फायर गेम के कारण डरा हुआ है। जब हमने उससे पूछा तो बताया कि वह फ्री फायर गेम खेलता था और इसी वजह से उसकी ये स्थिति हुई है।

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उससे पूछते हैं कि इस गेम में क्या होता है तो उसकी अंगुलियां चलने लगती हैं।

उसका शरीर कांपने लगता है। एक ही बात कहता है कि उसमें फायर करते हैं और ये फायर का कहते ही वह अंगुलियों से फायरिंग करने के इशारे करना लग जाता है। वह इस गेम से डिप्रेशन में आ गया है। पहले ये पढ़ाई में होशियार था, लेकिन अब इसकी स्थिति सही नहीं है। हम प्रयास कर रहे हैं कि वह जल्द ही सही हो जाए।

मां-बोली मुझे पता होता तो मोबाइल नहीं लाती

मां को जब उसके बेटे के बारे में पूछने पर उनकी आंखें भर आईं। बोलीं-उसे मोबाइल किसी ने गिफ्ट में ही दिया था। यह सोचकर लाई थी कि कभी शादी समारोह या अन्य कार्यक्रम के फोटो खींच लेंगे। उसे यह पता होता कि इसी मोबाइल से उसका बेटा बीमार हो जाएगा तो वह नहीं लेकर आती। अब बेटे की खूब याद आती है।

बच्चे का दिमाग एक ही जगह फोकस होने लगा, इसलिए ऐसा हुआ

बच्चे का इलाज कर रहे मनोचिकित्सक डॉ. जेएस शर्मा ने बताया कि मेरे पास भी ऐसा ही एक केस आया था। इसकी मां ने ही स्मार्टफोन दिया था और ये सोचकर कि बच्चा उन्हें परेशान नहीं करेगा। लेकिन, बच्चा ऑनलाइन गेम की लत का शिकार हो गया। उसे होश ही नहीं रहता था कि कब दिन हुआ है और रात हुई है।

और, ये इस वजह से हुआ क्योंकि उसका फोकस एक ही जगह यानी गेम में होने लगा। हमारा माइंड अपर, मिड और लोअर तीन हिस्सों में काम करता है।

जब बच्चा एक ही जगह पर फोकस करने लगता है तो दिमाग के कुछ हिस्से कम काम करने लगते हैं। दिमाग का निचला और बीच का हिस्सा काम नहीं करता है। ऐसे में ऊपरी हिस्सा गलत मैसेज देता है।

ऐसे में उसे पता ही नहीं चलता कि वह कर क्या रहा है। शरीर का न्यूरोसिस्टम प्रभावित होने से हाथ-पैर कांपने लगते हैं। ये सब इसी गेम की वजह से हुआ है।

बच्चा केवल मोबाइल पर मिल रहे इंस्ट्रक्शन पर काम करने लगता है

एक्सपर्ट ने बताया कि इसके लिए सबसे जरूरी है कि अपने बच्चों में मोबाइल का एडिक्शन न होने दें। ऐसा ही केस एक ब्लू व्हेल गेम की वजह से आया था। जब काउंसलिंग की तो पता चला कि वह सुसाइड करने वाला था। जैसे-तैसे उसे बाहर इस गेम से बाहर निकाला। पबजी और फ्री फायर जैसे गेम पूरे दिमाग के सिस्टम को खराब कर देते हैं।

केस: 1

नागौर के लाडनूं में 16 साल के नाबालिग ने पबजी-फ्री फायर की उधारी चुकाने के लिए चचेरे भाई की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इससे पहले उसने असम में बैठे अंकल को फेक इंस्टाग्राम आईडी से मैसेज कर 5 लाख रुपए की फिरौती भी मांगी थी।

केस: 2

चूरू में रहने वाले एक युवक को इसका ऐसा नशा चढ़ा कि वह सब कुछ भूल बैठा। गेम के लिए अपना काम छोड़ दिया था। सारी रात गेम खेलता। इसके लिए पांच दिन तक न सोया और न ही खाना खाया।

केस: 3

कोटा में क्लास 9 में पढ़ने वाले 14 साल के किशोर ने 7 जून 2020 को सुसाइड कर लिया था। पता चला कि उसे पबजी गेम की लत लगी थी। सुसाइड से पहले वह देर रात 3 बजे तक गेम खेल रहा था।

फायर करने की आदत मानसिक बीमार कर रही है

  • दिनभर गेम खेलने और वर्चुअल दुनिया में रहने से बच्चे को लगता है कि वह अलग जगह आ गया है
  • गन से फायर करने की आदत बच्चों को हिंसक बना रही है। इसके अलावा वह अवॉर्ड और पैसा जीतने से लत का शिकार हो रहा है
  • एक स्टडी के मुताबिक 8 से 18 साल के बच्चे सबसे ज्यादा गेम खेलते हैं। इसी वजह से इनमें चिड़चिड़ापन और गुस्सैल हो रहे हैं
  • बच्चों पर विपरीत प्रभाव के कारण भारत सरकार ने पबजी बंद किया

(पबजी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव व आत्महत्या के मामलों को देखते हुए इस पर देश में बैन लगाया गया। भारत में पबजी यूजर्स की संख्या 175 मिलियन यानी करीब 17.5 करोड़ थी।)

ऐसे पता करें कि आपके बच्चे को लग चुकी है लत

  • बच्चा बाहर खेलने की जगह ऑनलाइन गेम खेलना पसंद करे
  • माता-पिता ने किसी बात के लिए मना तो और बच्चा गुस्सा हो जाए
  • माता-पिता गेम खलेने से डाटेंगे या मारेंगे, इस डर से छिपकर गेम खेले
  • सोशल गैदरिंग के वक्त भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करे
  • बच्चा घरवालों से गेम खेलने के लिए झूठ बोलने लगे
  • ऑनलाइन गेम एडिक्शन की वजह से बच्चा मोटा होने लगे
  • बच्चे को नींद कम आए और हेल्थ से जुड़ी परेशानियां सामने आनी लगे

बच्चों को कैसे रखे इस एडिक्शन से दूर

  • बचपन से ही बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना चाहिए
  • हर वक्त उन्हें डांटना नहीं चाहिए, कोशिश करें कि उन्हें प्यार से समझाएं
  • बच्चों को घर का अहम हिस्सा बनाएं ताकि उन्हें अकेलापन महसूस न हो
  • पेरेंट्स खुद भी दिनभर अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त न रहें
  • बच्चा क्या करता है और क्या नहीं, इस बात पर पूरी नजर रखे

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