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मोटापा, सांस की बीमारी के साथ साथ कई अन्य बिमारियों से बच्चों को बचाएगा मां का दूध

नई दिल्ली/ मां का दूध सबसे पोषक माना जाता है। यह एक प्राकृतिक उपहार है जो मां और बच्चे, दोनों को कई तरह की बीमारियों से बचाता है। ब्रेस्टफीडिंग से जहां बच्चे की इम्यूनिटी बढ़ती है, वहीं, मां में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है। लेकिन मां का बच्चे को किस उम्र तक दूध पिलाना ठीक है, इस बात से कई लोग अनजान है।

अक्सर मां 3 साल से बड़े बच्चों को भी दूध पिलाती हैं, जो ठीक नहीं है।

2 साल तक पिला सकती हैं दूध

गुरुग्राम के सीके बिरला हॉस्पिटल में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. आस्था दयाल कहती हैं कि अमेरिकन अकेडमी ऑफ पेड्रिएटिक्स के अनुसार बच्चे को 6 महीने तक ही दूध पिलाना चाहिए।

जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि 2 साल ब्रेस्ट फीडिंग करानी चाहिए।

ब्रेस्टफीडिंग से मां का घटता है वजन

ब्रेस्टफीडिंग के कई फायदे हैं। प्रेग्नेंसी के बाद अक्सर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है। लेकिन बच्चे को दूध पिलाने पर उनका वजन तेजी से कम होता है।

ब्रेस्टफीडिंग महिला को ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है। यही नहीं उन्हें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल के रोग से भी सुरक्षित रखता है।

बच्चे को भी यह दूध फायदा करता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, उन्हें पेट का इन्फेक्शन नहीं होता। भविष्य में अस्थमा और मोटापा भी परेशान नहीं करता।

2 साल तक बच्चे को दूध पिलाने पर हड्डियां होती कमजोर

डॉ. आस्था दयाल कहती हैं कि अगर कोई महिला 2 साल तक बच्चे को लगातार दूध पिला रही है और इसके साथ कोई सप्लिमेंट नहीं ले रही तो उनके शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसलिए ब्रेस्ट फीडिंग के साथ कैल्शियम और विटामिन डी का सप्लिमेंट लेना जरूरी है।

बच्चे को 6 महीने के बाद पानी, दाल का पानी, फल जैसी चीजें खिलानी चाहिए ताकि वह धीरे-धीरे मां के दूध छोड़ सके।

मां का दूध नेचुरल कॉन्ट्रासेप्शन

ब्रेस्ट फीडिंग नेचुरल कॉन्ट्रासेप्शन है। डॉ. आस्था दयाल के अनुसार जो महिला बच्चे को दूध पिलाती हैं, वह जल्दी प्रेग्नेंट नहीं होती यानी ब्रेस्टफीडिंग गर्भनिरोधक का काम भी करता है।

दरअसल दूध पिलाने पर पीरियड्स कम होते हैं और प्रेग्नेंसी के चांस कम रहते हैं।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाएं करतीं गलतियां

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कई महिलाओं को जोड़ों, पीठ या हाथ का दर्द सताने लगता है। इसका कारण है कि वह कई घंटों तक एक ही जगह पर एक पोजिशन में बच्चे को लेकर बैठी रहती हैं।

बच्चा रोता है तो मां तुरंत उन्हें दूध पिलाना शुरू कर देती हैं, जो गलत है। बच्चे को 2 से 3 घंटे बाद ही दूध पिलाएं। जब भी ब्रेस्टफीडिंग करवाएं हमेशा पीठ और हाथ को सपोर्ट दें। इसके लिए तकिया हाथों और पीठ के पीछे लगा लें।

हर बार दूध पिलाने के बाद गर्म पानी में रूई को उबालकर निप्पल साफ करें।

निप्पल क्रैक हो सकते हैं

अगर मां गलत तरीके से दूध पिलाती है तो उनके निप्पल्स में क्रैक आने लगते हैं। जब बच्चे के दांत आने लगते हैं तब भी ऐसा होता है।

कई बार महिलाएं भले ही सफाई का ध्यान रखें लेकिन अगर बच्चे के मुंह में बैक्टीरिया है तो तब भी क्रैक हो सकते हैं और मां को इन्फेक्शन हो सकता है। ऐसा होने पर इसका जल्दी से इलाज शुरू करना चाहिए।

ब्रेस्ट फीडिंग में निप्पल्स और अरेओला (निप्पल के बाहर का घेरा) बच्चे के मुंह में होना चाहिए। लेकिन अक्सर मां केवल बच्चों के मुंह में निप्पल डालती हैं।

अगर निप्पल पर क्रैक है तो मां को हर बार ब्रेस्ट फीडिंग के बाद निप्पल्स को अच्छे से धोना चाहिए और उसके ऊपर दवा लगानी चाहिए जिससे त्वचा रूखी होकर क्रैक न हो। लेकिन जब बच्चे को दोबारा दूध पिलाना हो तो दवा को अच्छे से जरूर साफ कर लेना चाहिए।

नवजात को निप्पल की खुशबू करती आकर्षित

अक्सर देखने में आता है कि नवजात अपनी मां की ब्रेस्ट से चिपका रहता है। दरअसल वह मां की ब्रेस्ट से ही निप्पल की खुशबू से आकर्षित होता है।

निप्पल्स में मॉन्टगोमेरी ग्लैंड होता है। इससे निकलने वाला तरल पदार्थ ब्रेस्टफीडिंग के दौरान निप्पल्स को चिकना रखता है। इसकी खुशबू नवजात शिशु को आकर्षित करती है।

मां को हो सकता है इन्फेक्शन

अगर बच्चा मां का दूध सही तरीके से दूध नहीं पीता तो ब्रेस्ट में दूध जमा होने लगता है और इससे इन्फेक्शन होकर निप्पल में पस पड़ जाता है। इसे ‘एबसेस’ कहते हैं। कई बार यह स्थिति इतनी खतरनाक हो जाती है कि ऑपरेशन करके ही दूध को बाहर निकालना पड़ता है।

6 महीने तक 85% ही शिशु कर पाते हैं ब्रेस्ट फीडिंग

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार देश के 85 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिन्हें जन्म से 6 महीने तक केवल स्तनपान कराया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वे-4 में यह आंकड़ा 61.4 प्रतिशत था।

वहीं, अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार जन्म के तुरंत बाद 82% नवजात ब्रेस्टफीडिंग करते हैं जो 6 महीने तक 58% ही रह जाता है। इसमें से भी 25% ही बच्चे केवल मां का दूध पीते हैं।

मां के दूध में कई विटामिन

मां के दूध में कई तरह के विटामिन होते हैं जो नवजात के शारीरिक विकास के लिए जरूरी होते हैं। मां के दूध में चीनी, प्रोटीन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।

ब्रेस्ट मिल्क में विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन ई, विटामिन के, विटामिन सी, विटामिन बी 6 और विटामिन बी12 होता है।

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