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चीन के सोशल मीडिया पर बेटी को बालकनी से लटकाए हुए बेरहम पिता का वीडियो वायरल, बना है चर्चा का विषय अब भारत में भी बच्चों को पीटने पर जेल

नई दिल्ली/ चीन के सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक शख्स मासूम बच्ची को दूसरे माले की बालकनी से लटकाए हुए दिख रहा है। बालकनी से उल्टी लटकी बच्ची चीख-चीखकर रहम की गुहार लगाती दिख रही है; लेकिन वह शख्स काफी देर तक बच्ची को ऐसे ही लटकाए रहता है।

‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में दिख रहा शख्स उस बच्ची का पिता है और वह उसे बिस्तर पर सू-सू करने की सजा दे रहा है। बच्ची मात्र 2 साल की है।


जिस वक्त वह शख्स अपनी बच्ची को यह खौफनाक सजा दे रहा था, नीचे मौजूद पड़ोसी उससे बच्ची को छोड़ने की गुहार लगाते रहे। लेकिन उस शख्स ने सबको अनसुना कर दिया। इसी बीच एक पड़ोसी ने उसका वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होने के बाद चीनी प्रशासन उस बेरहम पिता पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

उल्टा लटकाकर सवाल पूछता रहा बेरहम पिता

वायरल वीडियो में पिता अपनी बच्ची के पैरों को पकड़कर उसे उल्टा लटकाता दिख रहा है। साथ ही वह बच्ची को आगे से बिस्तर की जगह बाथरुम जाकर यूरिन पास करने की हिदायत भी देता है।

बच्ची के चिखने-चिल्लाने और पड़ोसियों की हिदायत के बावजूद वह शख्स बच्ची को 2 से 3 मिनट तक बालकनी से लटकाए रखता है। दूसरे माले की बालकनी से नीचे जमीन की ऊंचाई काफी थी। ऐसे में अगर बच्ची शख्स की पकड़ से छूटती तो बड़ी दुर्घटना घट सकती था।

महिला संगठन ने पिता को लगाई फटकार, बच्ची की काउंसिलिंग की

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इससे खिलाफ काफी गुस्सा देखा गया। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीचैट’ पर एक यूजर ने लिखा कि ‘यह शख्स जानवर है और इसे पिता कहलाने का हक नहीं।’

सोशल मीडिया पर तेज विरोध को देखते हुए स्थानीय महिला संगठन ने घर जाकर आरोपी पिता को डांट लगाई। साथ ही डरी-सहमी बच्ची की काउंसिलिंग भी कराई जा रही है। दूसरी ओर, चीनी प्रशासन भी आरोपी पिता पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

चीन के समाज में बच्चों को संस्कार के नाम पर सख्त अनुशासन में रखा जाता है। चाहे मामला परिवार का हो, स्कूल का या खेल का।

मां ने केक खाने पर तेल पिलाया, कहीं पूरी रात टीवी देखने की सजा

चीन में बच्चों को कठिन सजा देने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जून में एक मां ने अपने 10 साल के बेटे को अजीबोगरीब सजा दी थी। वह मां अपने बेटे को एथलीट बनाना चाहती थी। इसके लिए उसने बच्चे के लिए सख्त डाइट प्लान भी बना रखा था।

लेकिन एक दिन बच्चे ने स्कूल की एक पार्टी में केक का एक टुकड़ा खा लिया। घर लौटने पर उसने यह बात अपनी मां को बताई तो मां के गुस्से का ठिकाना नहीं रहा। मां ने बच्चे को तिल, नारियल और जैतून का तेल पिलाया। वह बच्चे को तब तक तेल पिलाती रही; जबतक कि बच्चे ने उल्टी करके केक उगल नहीं दिया।

इसी तरह पिछले साल नवंबर में सेंट्रल चाइना में एक बच्चे को रात भर टीवी के सामने बैठने की सजा दी गई थी। दरअसल, बच्चे के मां-बाप उसके ज्यादा टीवी देखने की आदत से परेशान थे। ऐसे में उन्होंने बच्चे को पूरी रात जागकर टीवी देखने की सजा दी।

पारंपरिक चीनी समाज में कम उम्र के बच्चों को सख्त सजा देने का चलन रहा है। वहां ऐसा मानते हैं कि सख्त सजा से बच्चे मजबूत और बहादुर बनते हैं।

चीन में बच्चों को सख्त सजा की परंपरा, नई पीढ़ी करती है विरोध

चीन में ‘कुंग फू’ जैसे पारंपरिक मार्शल आर्ट की शिक्षा आश्रमों में रहकर ली जाती थी। इस दौरान माना जाता था कि बच्चा जितना ज्यादा दर्द झेलेगा, वह उतना मजबूत और बहादुर बनेगा। यह वजह है कि चीनी परिवारों में आज भी छोटी-छोटी गलतियों के लिए बच्चों को सख्त सजा देने का चलन है।

मार्शल आर्ट पर बनने वाली हॉलीवुड की फिल्मों में भी ‘कुंग फू’ स्टूडेंट्स को लोहे के सरिए से दागकर या गर्म तेल से जलाकर सजा देने के चलन को दिखाया जाता है।

हालांकि चीन की यंग जेनरेशन इस सोच की चुनौती देती दिख रही है। जब भी चीन में ऐसी किसी सजा की खबर आती है, चीनी युवा इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हैं।

वैसे भारत और चीन से उलट दुनिया के कई देशों ने बच्चों को पालने को लेकर काफी कड़े नियम बनाए हुए हैं। इन देशों में बच्चों से दुर्व्यवहार करने पर माता-पिता को सजा हो सकती है।

नॉर्वे में बच्चे को डांटने-धमकाने पर हो सकती है जेल

भारत और चीन जैसे एशियाई देशों में बच्चों को डांटना, पीटना और गलती से रोकने के लिए धमकाना काफी नॉर्मल माना जाता है। इसे परवरिश के हिस्से के रूप में देखते हैं।

लेकिन नॉर्वे जैसे कई पश्चिमी देशों में ऐसा करना अपराध है। इसके लिए मां-बाप को जेल जाने या जुर्माना भरने की सजा भी हो सकती है। पश्चिमी देशों में बच्चों को डांटना, पीटना या धमकाना अपराध समझा जाता है। कई देशों में ऐसा करने पर सरकार पेरेंट्स से बच्चे की कस्टडी भी ले लेती है।

डांटने पर भारतीय दंपती से ली गई बच्चे की कस्टडी

पिछले साल नॉर्वे में एक भारतीय दंपती से उसके बच्चे की कस्टडी ले ली गई थी। बच्चे को चाइल्ड केयर होम भेज दिया गया और मां-बाप पर मुकदमा दर्ज हुआ।

दरअसल, उस भारतीय दंपती पर अपने बच्चे को डांटने का आरोप था। नॉर्वे के कानून में इसे मां-बाप की नाकामी के बतौर देखा गया।

नॉर्वे के कड़े कानून और भारतीय मां-बाप की आदत पर बनी फिल्म

अभी कुछ दिन पहले ही ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ नाम की फिल्म रिलीज हुई थी। इस फिल्म में नॉर्वे में रहने वाले एक भारतीय दंपती की कहानी दिखाई गई; जिसमें नॉर्वे की सरकार उसके दो बच्चों की कस्टडी ले लेती है। उनपर आरोप थे कि वह अपने बच्चों की परवरिश ठीक तरीके से नहीं कर रहे। रानी चटर्जी और नीना गुप्ता जैसे बड़े स्टार्स ने इस फिल्म में काम किया था।

फिल्म के रिलीज होने के बाद भारत में नॉर्वे के राजदूत हैंस जैकब फ्रायडेन ने इस फिल्म को प्रोपैगैंडा बताया था। उनका कहना था कि मिसेज चटर्जी से उनके बच्चे को दो देशों के सांस्कृतिक अंतर की वजह से नहीं, बल्कि उनकी कमियों की वजह से अलग किया गया था।

भारत में बच्चे को पीटने पर जेजे एक्ट से 6 महीने की सजा

सुप्रीम कोर्ट के वकील निपुण सक्सेना के मुताबिक भारत में बच्चों को मारने-पीटने पर पेरेंट्स के खिलाफ जेजे (जुवेनाइल जस्टिस) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है। इसमें दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की सजा का प्रावधान है।

लेकिन आमतौर पर मारने-पीटने या डांटने पर देश में किसी मां-बाप पर मुकदमा दर्ज नहीं होता। हां, बच्चे को चोट पहुंचने की स्थिति में आईपीसी की धारा 324, 325 और 326 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। ये नियम सिर्फ बच्चों के लिए नहीं है। इसके तहत किसी भी एज ग्रुप के इंसान के खिलाफ हुए हिंसा का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

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