नई दिल्ली/ घर हो या ऑफिस, गाड़ी हो या मॉल… हर जगह AC चलता है। एयर कंडिशनर यानी AC के बिना रहना मुश्किल हो जाता है। मानसून में वैसे भी उमस बढ़ने से गर्मी लगती है जिससे हमेशा AC में ही बैठने का मन करता है। लेकिन हमेशा इसकी ठंडक में बैठना आपको बीमार कर सकता है। यह आदत आपको मोटा भी बना सकती है।
एसी में सोना ठीक नहीं
इंटरनेशनल जरनल ऑफ ओबेसिटी ने दुनियाभर के लोगों में बढ़ रहे मोटापे पर रिसर्च की। रिसर्च में माना कि मोटापा, एक्सरसाइज न करने और फ्राइड फूड खाने से ही नहीं, बल्कि AC की ठंडी हवा में रहने से भी बढ़ता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार AC में रहने से शरीर को तापमान कम रखने के लिए मेहनत नहीं करना पड़ती जिससे कम कैलोरी बर्न होती हैं। बैड पर लेटकर जो कैलोरी बर्न होती हैं, उसे बेसल मेटाबोलिक रेट कहते हैं। बिना एसी में सोने से 70% कैलोरी बर्न होती हैं लेकिन एसी में सोने से जब बॉडी का टेंपरेचर कम रहता है, तो यह केवल 35% ही बर्न हो पाती हैं।
शरीर में आती अकड़न
दिल्ली के द्वारका स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में फिजिशियन डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं कि हमेशा AC में रहना ठीक नहीं है। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा देर तक AC में बैठता है तो उसका शरीर जकड़ जाता है। पसीना भी कम निकलता है। इससे वह मोटापे का शिकार हो सकता है।
AC में रहने से ओवरईटिंग होती है
कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि ठंडी हवा भूख बढ़ाती है। AC की ठंडक में सोने से अच्छी नींद आती है। नींद अच्छी आती है तो भूख भी बढ़ती है। ऐसे में हाई कैलोरी और हाई कार्बोहाइड्रेट्स फूड इंसान के शरीर में गर्मी लाते हैं।
बार-बार भूख लगने से वह ओवरइटिंग का शिकार होता है जिससे उसे मोटापा घेर लेता है।
वर्कआउट से नहीं घटता वजन
कुछ लोग जिम में AC के ठंडे टेंपरेचर के बीच एक्सरसाइज करते हैं। योग सेंटर और घर पर भी लोग AC चलाकर कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट करते हैं।
लेकिन इससे तेजी से वजन कम नहीं होगा। दरअसल इससे पसीना नहीं निकलता। हमेशा AC बंद करके ही वर्कआउट करना चाहिए।
अपच और ब्लोटिंग की समस्या
एक रिसर्च के अनुसार अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक AC में रहता है तो उनका बॉडी टेंपरेचर कम होता है।
हर 1°C तापमान गिरने से शरीर का 12% तक मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है। इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है और व्यक्ति अपच और ब्लोटिंग का शिकार होता है।
आलसी बनता है इंसान
AC में रहना इंसान को आलसी भी बनाता है। ठंडा तापमान व्यक्ति को आलस से भरता है। इससे वह चलने-फिरने की बजाय एक जगह पर बैठा रहता है।
जब बॉडी की मूवमेंट प्रभावित होती है तो कैलोरी बर्न नहीं होती। इससे शरीर पर फैट जमा होने लगता है। बॉडी जितनी एक्टिव रहती है, जितनी उसकी मूवमेंट होती है, उतनी ज्यादा कैलोरी बर्न होती हैं। कैलोरी बर्न होती है तो मोटापा भी घटता है।
डिहाइड्रेशन से भी मोटापे का कनेक्शन
लगातार एसी में बैठने से स्किन ड्राई तो होती ही है लेकिन शरीर भी डिहाइड्रेट होता है। इसमें शरीर में पानी की कमी होने लगती हैं क्योंकि ठंडे टेंपरेचर में प्यास कम लगती है। जिससे मोटापा बढ़ता है।
दरअसल हमेशा बॉडी वेट के हिसाब से पानी पीना चाहिए। यानी अगर किसी का 80 किलोग्राम वजन है तो उन्हें 3 लीटर पानी पीना चाहिए।
पीरियड्स में होता दर्द
एसी के कम तापमान में रहने से महिलाओं के पीरियड्स पर भी असर पड़ सकता है। 2011 में हुई रिसर्च के अनुसार ठंडा तापमान मेंस्ट्रुअल साइकिल को प्रभावित करता है। कम तापमान से नसों पर दबाव पड़ता है जिससे ब्लड फ्लो में दिक्कत होती और पीरियड्स के दौरान दर्द होने लगता है।
ठंडे तापमान से ओव्यूलेशन की फ्रीक्वेंसी कम हो सकती है और पीरियड्स लंबे समय तक चल सकते हैं।
ठंडा टेंपरेचर दिमाग पर करता है असर
डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार AC का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। ज्यादा ठंडा तापमान दिमाग पर असर करता है।
दरअसल मानसून में बाहर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है और अगर आप रूम में AC का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस रखते हैं तो दिमाग में मौजूद हाइपोथेलेमस को नुकसान पहुंचाता है।
दिमाग का यह हिस्सा शरीर के टेंपरेचर को रेगुलेट करता है। अगर कोई व्यक्ति ठंडे तापमान से अचानक गर्म तापमान पर जाता है तो हाइपोथेलेमस बॉडी के टेंपरेचर को तुरंत नहीं बदल पाता और व्यक्ति को बुखार, सर्दी, जुकाम और गले की सूजन परेशान कर सकती है।
चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां पड़ने लगती हैं
एक स्टडी में यह भी कहा गया कि AC में रहने से जब शरीर की नमी कम होती है तो समय से पहले चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं।
ठंडी और ड्राई हवा में रहने से पसीना कम और ऑयल ज्यादा निकलता है। इससे चेहरे पर पिंपल्स भी हो सकते हैं। रोम छिद्र भी बंद हो सकते हैं जिससे स्किन इन्फेक्शन हो सकता है।
यही नहीं, घंटों AC की ठंडी हवा में बैठने से शरीर का टेंपरेचर लो रहता है और नसें सिकुड़ने लगती है जिससे ब्लड प्रेशर फ्लकचुएट करने लगता है।
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