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अलवर वाली घटना में पेरेंट्स को अंदाजा भी नहीं था कि उनके बच्चे का मानसिक संतुलन इतना बिगड़ जायगा, आप भी इन 9 लक्षणों से पहचानें लत

फ्री-फायर और पब्जी जैसे ऑनलाइन गेम खेलने की लत से 14 साल के लड़के का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और आंखें भी खराब हो गईं। हालत इतनी बिगड़ गई कि पिछले 15 दिनों से उसे स्पेशल बच्चों के हॉस्टल में रखना पड़ा। पेरेंट्स को अंदाजा भी नहीं था कि फोन पर ऑनलाइन गेम्स खेलने की लत उनके बच्चे की जिंदगी बर्बाद कर सकती है।


एक्सपर्ट:

डॉ. प्रीतेश गौतम, साइकोलॉजिस्ट, निर्वाण क्लिनिक, भोपाल

डॉ. विवेक शर्मा, पीडियाट्रिशियन, पेंग्विन पीडियाट्रिक केयर क्लिनिक, जयपुर

सवाल: मौजूदा मामले में बच्चा कितनी देर मोबाइल चलाता था?

जवाब: बच्चे के पिता के मुताबिक, पहले तो 4 से 5 घंटे गेम खेलता था, लेकिन धीरे-धीरे हर समय केवल गेम ही खेलने लगा था। 24 घंटे में 10 से 12 घंटे केवल गेम ही खेलता था। मोबाइल लेने की कोशिश करते तो वो चिड़िचिड़ाने लगता, गुस्सा करने लगता था और खाना भी नहीं खाता था।

कभी-कभार घर से भागकर पड़ोस में गेम खेलने चला जाता था।

सवाल: बच्चों के लिए स्मार्टफोन क्यों डेंजरस है?

जवाब: स्मार्टफोन से निकलने रेडिएशन दिमाग की सेल्स यानी कोशिकाओं को सिकोड़ देते हैं। जिसकी वजह से ब्रेन में ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती है। इससे दिमाग के साथ-साथ बॉडी के पूरे सिस्टम को नुकसान होता है।

रोजाना 50 मिनट तक लगातार मोबाइल का इस्तेमाल करने से दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसके रेडिएशन से कैंसर होने का भी रिस्क रहता है।

यही वजह है कि कुछ दिन पहले भारत आए एपल के CEO टिम कुक ने इंडियन पेरेंट्स को हिदायत देते हुए कहा कि आज के बच्चे डिजिटल ऐज के बच्चे हैं। उनका स्क्रीन टाइम कम करना जरूरी है। मैं तो कहूंगा कि स्कूलों में भी पढ़ाई का डिजिटलाइजेशन कम किया जाना चाहिए।

सवाल: मोबाइल तो आजकल लगभग हर बच्चा देखता है, कैसे पता करें कि हमारे बच्चे को उसकी लत लग चुकी है या नहीं?

जवाब: इसके लक्षणों को नीचे लगे क्रिएटिव से समझते हैं-

सवाल: ज्यादा देर तक मोबाइल में गेम खेलने से बच्चे की हेल्थ पर क्या इफेक्ट पड़ते हैं?

जवाब: पॉइंट्स से समझते हैं-

  • स्लीप पैटर्न बिगड़ा हो। जिससे दूसरे कामों में फोकस करने में परेशानी होती है।
  • आंखों में जलन, सूखापन, सूजन और रोशनी कमजोर हो गई हौ।
  • पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर की तरह ही हरकतें करने लगा है।
  • सोचने-समझने की क्षमता कम हो गई है।
  • याददाश्त कमजोर होने लगी है।
  • एक ही पोजिशन में बैठकर या लेटकर गेम खेलने से बॉडी पार्ट्स में परेशानी हो रही है।

सवाल: एक ही जगह बैठकर लगातार पढ़ाई में तो बच्चों का मन नहीं लगता है तो फिर घंटों तक मोबाइल गेमिंग में कैसे?

जवाब: जब कोई गेम खेलता है तो उसके दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है। डोपामाइन एक फील गुड और फील हैप्पी न्यूरोट्रांसमिटर है। मगर जो लोग एक्सेसिव गेमिंग करते हैं उनके दिमाग को डोपामाइन की आदत हो जाती है। इसके बाद किसी दूसरी चीज से उन्हें खुशी नहीं मिल पाती है।

सवाल: अगर बच्चे को गेमिंग का एडिक्शन हो गया है तो क्या कर सकते हैं?

जवाब: अगर ऑनलाइन गेमिंग की लत हो गई है तो साइकायट्रिस्ट से सलाह लें।

सवाल: ऑनलाइन गेमिंग से हेल्थ के अलावा और क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब: इससे मेंटल, फिजिकल के अलावा फाइनेंशियल तौर पर भी कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। जैसे-

  1. ऑनलाइन गेमिंग के जरिए इंटरनेट पर बच्चे डेटा प्राइवेसी, ​​​​​इन्फॉर्मेशन लीक जैसी कई तरह की गलत एक्टिविटी की चपेट में आ जाते हैं।
  2. गेम खेलते हुए आप नहीं जानते जिसके साथ खेल रहे हैं, वो कौन है। ऐसे में साथ खेल रहा खिलाड़ी आपको साइबरबुलींग का शिकार बना सकता है।
  3. ऑनलाइन गेम की बहुत जल्दी लत लग जाती है। इसलिए जो भी लोग इन्हें खेलना शुरू करते हैं वो इन्हें खेले बिना नहीं रह पाते।
  4. शूटिंग और फाइटिंग वाले कुछ ऑनलाइन गेम्स हिंसा को बढ़ावा देते हैं। इन्हें खेलने वाले बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है।
  5. कई ऑनलाइन गेम एडल्ट के लिए डिजाइन किए जाते हैं मगर रेगुलेशन की कमी की वजह से बच्चे भी उन्हें खेलते हैं।

सवाल: कितने साल के बच्चों को स्मार्टफोन से दूर रखना चाहिए?

जवाब: बिल्कुल सवा साल से 3 साल तक के बच्चों को तो मोबाइल से बिल्कुल ही दूर रखें।

  1. कुछ दिनों तक वो आपसे जिद करेंगे। आप फिर भी उन्हें बहला-फुसलाकर शांत करें।
  2. बच्चों का शेड्यूल ऐसा बनाएं कि जिसमें उनके लिए 1-2 घंटे का टाइम ई-गैजेट्स, टीवी देखने के लिए फिक्स कर लें।
  3. वो क्या कन्टेंट देख रहे हैं इस पर भी नजर बनाएं रखें।

सवाल: बच्चों को खाना खिलाते समय मोबाइल दिखाना क्या सही आदत है?

जवाब: सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली के पीडियाट्रिशियन डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि खाना खाते हुए मोबाइल देखना डेंजरस है। अगर बच्चे का दिमाग मोबाइल स्क्रीन पर लगा हुआ है तो वह खाने की चीजों पर ध्यान नहीं दे पाएगा। बच्चे में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं जैसे-

  1. बच्चे का दम घुट सकता है।
  2. सांस लेने में दिक्कत आ सकती है।
  3. खांसी आ सकती है।
  4. खाना अटक सकता है।
  5. खाने में स्वाद महसूस नहीं होगा।
  6. खाना ठीक से नहीं पचेगा।
  7. इस वजह से उसमें हेल्दी फूड हैबिट्स का विकास नहीं होगा।

सवाल: मोबाइल गेमिंग से दिमाग पर बुरा असर कैसे पड़ता है?

जवाब: न्यूरो-केमिस्ट्री के मुताबिक, मोबाइल फोन की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से दिमाग को खुशी मिलता है। ऐसे में दिमाग में डोपामाइन केमिकल तेजी से रिलीज होने से ज्यादा मजा आने लगता है जो धीरे-धीरे लत में बदल जाता है। जिससे बच्चा मोबाइल स्क्रीन से नजर हटाने तक का नाम नहीं लेता है।

अगर छोटी उम्र में डोपामाइन का लेवल हाई हो जाता है तो बच्चे का ध्यान इधर-उधर बंट जाता है। पढ़ाई में कॉन्सेंट्रेट नहीं कर पाता है।

अगर शरीर में डोपामाइन का लेवल कम है, तो वह फुर्तीला नहीं रहेगा। आलस और उदासी बढ़ेगी। याददाश्त भी कमजोर हो सकती है। किसी भी बात को जल्दी भूलने लगते हैं।

‘डोपामाइन’ नाम से किताब लिख चुकीं और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में साइकेट्री की प्रोफेसर डॉ. अन्ना लेम्बके का कहना है कि स्मार्टफोन अपने आप में नशे की दवा पीने जैसा है। इसका असर किसी ड्रग के इंजेक्शन जैसा है जिसके हम आदी होते जा रहे हैं और हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

सवाल: अगर बच्चा नहीं मानता है फिर क्या करें? किन चीजों से मन बहलाएं?

जवाब: ऐसे में डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत है। डिजिटल चीजों का हद से ज्यादा यूज बच्चों को एडिक्शन की तरफ ले जा रहा है।

  1. ऐसे में बच्चों को डिजिटल संस्कार देने से पहले माता-पिता खुद को डिजिटल डिटॉक्स करें और बच्चों को डिजिटल संस्कार दें।
  2. स्मार्टफोन, टीवी स्क्रीन और वर्चुअल वर्ल्ड से पूरी तरह दूरी बनाने को ही डिजिटल डिटॉक्स कहते हैं।
  3. पेरेंट्स बच्चों को दें डिजिटल संस्कार, करें डिजिटल डिटॉक्स
  4. 1 साल तक के बच्चों को मोबाइल से दूर रखें
  5. बच्चों को ज्यादा देर स्क्रीन देखने के नुकसान बताएं
  6. वर्चुअल स्क्रीन पर लोरी और गाने न दिखाएं
  7. टाइमर सेट करके बच्चों के स्क्रीन टाइम को लिमिटेड करें
  8. ज्यादा टाइम लेने वाले ऐप बच्चों के लिए लॉक करें
  9. बेडरूम और डाइनिंग रूम को नो-मोबाइल जोन बनाएं
  10. बच्चा जिद करे तो प्यार से समझाएं
  11. क्रिएटिविटी और नॉलेज एक्टिविटी के लिए समय तय करें
  12. बच्चों को माइंड गेम्स और नए टास्क देकर उन्हें बिजी रखें
  13. डिजिटल स्क्रीन से हर आधे घंटे बाद 5-10 मिनट का ब्रेक दिलाएं
  14. सोते समय मोबाइल फोन को डू नॉट डिस्टर्ब मोड में कर दें
  15. हर दो घंटे में कुछ ऐसा करने का नियम बनाएं जो डिजिटल न हो
  16. काम के बाद फोन स्विच ऑफ कर दें
  17. टहलते समय अपना फोन या स्मार्टवॉच साथ लेने से बचें

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