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58 साल की महिला को सब कहते थे घर में चुपचाप पूजा-पाठ करो, लेकिन उन्होंने सपनों के आगे हार नहीं मानी, बनी 58 की उम्र में मॉडल

नई दिल्ली/ हर इंसान अपनी जिंदगी में कुछ न कुछ बेहतर और अपने मन का करना चाहता है। लेकिन वक्त और हालात उसे इसकी इजाजत नहीं देते। नतीजा, जिंदगी आगे बढ़ जाती है और दिल के अरमान दिल के ही किसी कोने में दबकर रह जाते हैं। जिंदगी में बाकी बचता है तो बस एक ही लफ्ज….काश…

काश…खुद के लिए किया होता। काश… ऐसा कर पाते। काश… वैसा किया होता। ज्यादातर लोगों के साथ ऐसा ही होता है। हमारी आज की कहानी की किरदार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिंदगी की आपा-धापी में वो अपने हिस्से की जिंदगी जीना भूल ही गई।

लेकिन कहते हैं न “जब जागो, तभी सवेरा”

उम्र के जिस पड़ाव पर ज्यादातर लोग जोड़ों का दर्द और हजारों बीमारियों का हवाला देकर जिंदगी को जैसे-तैसे गुजारने लगते हैं। वही ओल्ड इज गोल्ड मॉडल को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बनाकर 58वें बरस की उम्र में पहुंच कर फिर से एक नई जिंदगी जीने की शुरुआत की। जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट की सोचते हैं, उन्होंने उस उम्र में मॉडलिंग में करियर बनाया। ‘ये मैं हूं’ में आज मिलिए सीनियर मॉडल मुक्ता सिंह से जो उनकी हम उम्र महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

बोर्डिंग स्कूल में गुजरा बचपन

मैं मुक्ता सिंह एक आर्टिस्ट हूं। पापा की नौकरी ऐसी थी कि आए दिन उनका ट्रांसफर होता रहता। उनके ट्रांसफर की वजह से हम भाई बहनों की पढ़ाई पर इसका गलत असर पड़ रहा था। जिसके बाद पापा ने हमारा दाखिला अजमेर के एक बोर्डिंग स्कूल में करवा दिया।

ख्वाहिशें दबकर रह गईं

मुझे बहुत अच्छी तरह से पढ़ाया-लिखाया गया था। मेरे पापा चाहते थे कि उनके बच्चे आर्थिक तौर पर मजबूत बने। वो शादी को ज्यादा महत्व नहीं देते थे। उस जमाने में भी वो बहुत खुली सोच रखते थे। लेकिन मुझे एक लड़के से प्यार हो गया और हमने शादी कर ली। ऐसा नहीं है कि शादी के बाद सपने खत्म हो गए।

शादी के बाद जिंदगी बड़ी दिलचस्प रही। पति फाइटर पायलट थे। उनका भी ट्रांसफर होता रहता। वो एयरफोर्स में थे। फौजियों को ज्यादा सैलरी तो मिलती नहीं है। उसी तनख्वाह में घर गृहस्थी संभालना मुश्किल हो रहा था। मुझे इसका एहसास तब हुआ और मैं सोचा करती कि काश मैंने भी कुछ किया होता तो पति को फाइनेंशियली सपोर्ट कर पाती।

उसके बाद जब बच्चे हो गए, तो घर की जिम्मेदारियां ज्यादा बढ़ गईं। ऊपर से मैं अपनी बीमार मां की देखभाल भी करती थी।

इन सब वजहों से अपने लिए किसी करियर को नहीं चुन सकी और न ही फुल टाइम जॉब कर सकी। कभी-कभी मैं थोड़े-बहुत काम कर लिया करती।

पति ने सिखाई फिटनेस के लिए दीवानगी, अखबबारों में लिखा, पेटिंग के जरिए जिदगी में रंग भरे

मैने फ्रीलांसर के तौर पर काम किया। न्यूजपेपर और मैगजीन के लिए खूब लिखा। लेकिन मैं कोई फुल टाइम जॉब नहीं कर पाईं। मुझे आर्ट और म्यूजिक से बहुत लगाव है। ऐसे में पेंटिंग शुरू की और आइकॉनिक म्यूजिशियन के चेहरों को अपने कैनवास पर उतारा। साथ ही, ग्राफिक इमेजरी के जरिए उनके सबसे लोकप्रिय गीतों को भी शामिल किया। इतना सब करने के बावजूद मन में कुछ और एक्ट्रा करने की ख्वाहिश बनी रही। लेकिन पति-बच्चों और बीमार मां की देखभाल में न तो वक्त निकाल सकी और न ही इस बारे में ठीक से सोच सकी।

बच्चे की होम स्कूलिंग पर ध्यान दिया

पहले बेबी के बाद दूसरा बेबी बहुत देर बाद प्लान किया। हम अपने बच्चों को ऐसी एजूकेशन नहीं दे सके जैसी मुझे और मेरे पति को मिली थी। क्योंकि कम सैलरी में हम अच्छा स्कूल अफोर्ड नहीं कर सकते थे। इसलिए बच्चे की होम स्कूलिंग पर बहुत ध्यान देती। अब मुझे बच्चों की कामयाबी देखकर गर्व होता है कि वो फैंसी स्कूलों से पढ़े बच्चों से ज्यादा क्वालिफाइड है। मेरे बेटे ने लंदन से लॉ की पढ़ाई की और वह वहीं पर सेटल है।

मॉडलिंग का सिलसिला मां और बेटी को खुश करने से शुरू हुआ

मेरी मॉडलिंग की शुरुआत बाल रंगना बंद करने से हुई। जब मैंने बाल कलर करना बंद किया तो खुद का कॉन्फिडेंस लो हुआ। मुझे लगा मैं सुंदर नहीं लगूंगी। बेटी का कहना था कि अगर मैं बाल कलर करना बंद कर दूंगी तो अपनी जिंदगी में इंटरेस्ट लेना भूल ही जाऊंगी। मेरी मां भी उस वक्त बहुत बीमार थीं और वो मुझे सफेद बालों में नहीं देखना चाहती थीं। अपनी मां और बेटी का दिल रखने के लिए मैंने दोनों को वादा किया कि मैं खुद को फिट और स्टाइलिश रखने की कोशिश करूंगी।

मैं खुद भी बेरंग सी जिंदगी जीना नहीं चाहती

मैं खुद भी बेरंग सी जिंदगी जीना नहीं चाहती थी, क्योंकि सोसाइटी में लोग नजरअंदाज करने लगते हैं। इसलिए मैं बहुत वर्कआउट करती। अपनी फिटनेस, ड्रेसिंग स्टाइल, हेयर हर एक चीज में ज्यादा दिलचस्पी लेना शुरू किया। क्योंकि मैं खुद को फिट और परफेक्ट रखना चाहती थी।

एक साड़ी ने दिलाया मॉडलिंग का ऑफर

मैं एक आर्टिस्ट हूं। अपने इस शौक को पूरा करने के लिए मैंने लॉकडाउन के दौरान इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनाया, ताकि अपनी बनाई पेंटिंग को उस पर पोस्ट कर सकूं। पेंटिंग के साथ मैं अपनी फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहती। देखते ही देखते मेरे फॉलोअर्स बढ़ने लगे। लोग मेरे लुक की तारीफ करने लगे। यह सब देख मेरा आत्मविश्वास बढ़ने लगा।

मैं एक शादी में अपने बालों के कलर से मैच करती ग्रे कलर की साड़ी पहन कर गई। मेरी वो ड्रेसिंग स्टाइल महफिल की जान बन गया। हर कोई मेरे लुक तारीफ कर रहा था। मैंने एक दो दिन बाद उस पार्टी की पिक्चर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी और उस डिजाइनर को टैग कर दिया, जिसने मेरी साड़ी डिजाइन की थी। उस डिजाइनर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी वो पिक्चर शेयर की जिसका बेहतरीन रिस्पॉन्स मिला।

सोशल मीडिया पर साड़ी वाली ड्रेस की अपनी फोटो पोस्ट करना बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

उस डिजाइनर ने मुझे अपनी ड्रेस पहन कर शूट करने का ऑफर दिया। मैंने उनका ऑफर स्वीकार भी कर लिया। लॉकडाउन के दौरान ही वो मेरे घर अपने ड्रेस लेकर आए और नेचुरल लाइट में शूट किया। उन्होंने अपनी वेब साइट पर जब मेरे फोटो डाले तो वहीं से चेक कर के दूसरे डिजाइनर ने भी मुझे कॉल किया। जो मॉडलिंग करियर का पहला ब्रेक और इस उम्र में जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना। अब तक 20 से 25 डिजाइनर और ब्रांड के साथ काम कर चुकी हूं।

मेरे सफेद बाल मुझे ग्लैमरस दिखाएंगे अंदाजा नहीं था

जब मैंने बालों को कलर करना छोड़ा तो मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ये इतना ग्लैमरस माना जाएगा। मैने तो सिर्फ इसलिए छोड़ा कि बाल रंगना मेरे लिए तकलीफदेह होता जा रहा था। क्योंकि मां को देखना, बच्चे देखना इसमें इतना टाइम निकल जाता था कि खुद के लिए समय ही नहीं मिलता था। मैं बालों को कलर करने के लिए सैलून नहीं जा पाती और घर में कलर करना मुझे पसंद नहीं था।

मैंने कहीं पढ़ा भी कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे स्किन का पिगमेंट बदलता है। कुदरत ने भी इंसान को ऐसे बनाया है कि उम्र के हिसाब से स्किन की पैलेट बालों की पैलेट से मैच खाए तो वो ज्यादा आकर्षक लगती है।

फिर मैंने देखा भी नफीसा अली भी उस उम्र में सफेद बालों के साथ कितनी खूबसूरत लगती हैं। मुझे लगा कि फिर मैं क्यों नहीं कर सकती।

काला रंग और सफेद बाल…दोस्तों ने मना किया

मेरे दोस्तों ने कहा जिनकी स्किन लाइट कलर की होती है वो सफेद बाल कैरी कर पाते हैं डार्क स्किन वालों पर सफेद बाल सूट नहीं करते। लेकिन मैंने सोच लिया कि चाहे डार्क स्किन क्यों न हो मैं सफेद बाल में जचूंगी। ब्लैक पैंथर मूवी में हीरोइन की मां का जिसने रोल निभाया था वो ब्लैक वुमन थी और उसके सफेद बाल थे जो उसपर खूब फब रहे थे। फिल्म के उस कैरेक्टर से मुझे हौसला मिला।

मैं फिटनेस की दिवानी हूं

लोग कहते हैं इस उम्र में हल्की फुल्की एक्सरसाइज ही करना चाहिए। मैं भी सबकी तरह सोचती थी कि एक उम्र के बाद एक्सरसाइज करना ठीक नहीं है। क्योंकि जब मैं 40 साल की थी मेनोपॉज के दौरान मेरे बैक में बहुत दर्द रहता था। अगर थोड़ी ज्यादा एक्सरसाइज कर लेती तो घुटने भी दुखने लगते। मुझे मेरी बहनें कहतीं उम्र का लिहाज करो, तुम ज्यादा अपने बदन को मत तोड़ो।

लेकिन मैंने एक्सरसाइज करने के दौरान एक चीज नोटिस की है कि हम जितनी ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं हमारी बॉडी की एक्सरसाइज करने की क्षमता बढ़ती जाती है। जोड़ों के दर्द से राहत और बढ़ती उम्र का असर जल्दी नहीं होता है। मैं खुद को जब 40 की उम्र वाली मुक्ता से तुलना करती हूं तो आज मैं 60 पार कर रही हूं और खुद को ज्यादा फिट और एनर्जेटिक महसूस करती हूं। अब मुझे न पीठ में दर्द होता है न घुटनों में। मैं अपनी बॉडी और सेहत से बहुत खुश हूं। जब मैं स्टाइलिश कपड़े पहनती हूं तो अच्छा फील करती हूं।

कोई स्पेशल डाइट फॉलो नहीं करती

मैं हर चीज खाती हूं लेकिन कम मात्रा में। कई बार चीजें इतनी टेस्टी लगती हैं की हम खाते ही जाते हैं। लेकिन इस उम्र में ऐसा करना हजारों बीमारियों को दावत देना है। इस उम्र में मेटाबॉलिज्म लेवल कम हो जाता है। मैं चीनी कम करना चाहती हूं लेकिन जब मुझे मीठे की तलब होती है तो चाय-कॉफी में चीनी लेती हूं।

लोग करते हैं भद्दे कमेंट

सोशल मीडिया पर लोग अजीबो गरीब कमेंट करते हैं। शुरू में आदमी ज्यादा नेगेटिव कमेंट करते थे। एक पुरुष ने लिखा “अगर मैंने तुझे अपने खेत में देख लिया तो हाथ पैर तोड़ दूंगा बुढ़िया” किसी ने लिखा “घर में बैठकर चुपचाप पूजा-पाठ करो”। उस वक्त मुझे बहुत बुरा लगता लेकिन मैं खामोश रही। एक बार एक महिला ने मुझे ऐसा कमेंट किया कि मुझसे रहा नहीं गया। उसने लिखा “दादी ढब-ढब के घर में बैठने से भी 21वीं सदी में जिया जा सकता है”। मैने उसके जवाब में कबीर दास का दोहा लिख दिया “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय”।। उसके बाद उसे इतनी मिर्ची लगी की वो मुझसे कहने लगी गीता पढ़ी है, राम चरित मानस पढ़ा है अगर यह सब पढ़ा होता तो कबीर को पढ़ने की जरूरत नहीं होती। वो मेरी काबिलियत पर कमेंट करने लगी। शुरू में मुझे बहुत दुख हुआ। लेकिन अब मुझे इन कमेंटस् पर हंसी आती है। सच कहूं तो अब मुझे सेलिब्रिटी वाली फीलिंग आती है हाहाहा…।

यंग लड़कियां करती हैं सपोर्ट

20 से लेकर 40 साल की महिलाएं जो यंग वुमन हैं उनसे मुझे जितना प्यार मिला है अपनी जिंदगी में इतना प्यार आज तक नहीं मिला। मुझे वो लिखती हैं… “आपको देखकर बढ़ती उम्र से अब डर नहीं लगता”।

कहते हैं न “हर उम्र का अपना ही लुत्फ है। उसके हिसाब से जियोगे तो खुश रहोगे और खूबसूरत दिखोगे।” बढ़ती उम्र को छिपाने की जरूरत नहीं बल्कि इस उम्र में खुद को स्मार्टली कैरी करने का हुनर आना चाहिए।

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