सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मशहूर बॉडी बिल्डर जो लिंडनर की 30 साल की उम्र में एन्यूरिज्म से मौत, क्या इसका जिम और बॉडी बिल्डिंग से रिलेशन है

जर्मनी के मशहूर बॉडी बिल्डर जो लिंडनर। 30 साल की उम्र में इनकी जान चली गई। लिंडनर यूट्यूब पर काफी फेमस थे। यंगस्टर्स इन्हें फॉलो करते थे। इन्होंने साउथ इंडियन फिल्म में भी बतौर बॉडी बिल्डर काम किया था।जो लिंडनर सोशल मीडिया पर 'Joesthetics' नाम से मशहूर थे। इंस्टाग्राम पर उनके 8 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।


मौत से कुछ दिन पहले लिंडनर ने RMD यानी रिपलिंग मसल्स डिजीज होने का खुलासा किया था। अब मौत के बाद उनकी गर्लफ्रेंड ने बताया कि लिंडनर का निधन एन्यूरिज्म की वजह से हुआ।

एन्यूरिज्म क्या है, क्या इसका कोई इलाज नहीं, इसका जिम और बॉडी बिल्डिंग क्या रिलेशन है, जानें विशेषज्ञों के अनुसार.

डॉ. संजय मित्तल, डायरेक्टर, क्लीनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, मेदांता, गुरुग्राम

डॉ. सुधीर कुमार, न्यूरोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, हैदराबाद

सवाल: एन्यूरिज्म क्या है?

जवाब: एन्यूरिज्म एक डेंजरस बीमारी है। इसे धमनी स्फीति यानी Arteriosclerosis भी कहते हैं।

ब्लड वेसेल्स यानी आटर्री की दीवार असामान्य तौर से फैल जाती है या गुब्बारे जैसी हो जाती है तो उसे एन्यूरिज्म कहते हैं। यह तब होता है जब दीवार कमजोर हो जाती है और अपनी लचक खो देती है।

एन्यूरिज्म ब्रेन, आटर्री और शरीर के दूसरे हिस्सों में विकसित हो सकता है। इसकी वजह से प्रभावित हिस्से में सूजन आ जाती है और उस हिस्से में खून जमा होने लगता है।

कई लोग इसकी वजह से जान गंवा चुके हैं।

भारत में इस बीमारी के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। जिस वजह से हर साल हजारों लोग इसका शिकार होते हैं।

सवाल: न्यूरो का एन्यूरिज्म से क्या कनेक्शन है?

जवाब: यह शरीर के किसी भी आटर्री में बन सकता है। लेकिन ज्यादातर ये ब्रेन में डेवेलप होता है। ब्रेन की आटर्री हार्ट से शुरू होती है। गर्दन होते हुए ब्रेन में पहुंचती है। इसका मतलब साफ है कि न्यूरो से इसका कनेक्शन है।

सिर्फ एन्यूरिज्म है तो कोई दिक्कत नहीं। इसके कारण अगर आटर्री की दीवार कमजोर और पतली होकर फट जाए खून बहने लगे तब प्रॉब्लम सीरियस है।

सवाल: रिपलिंग मसल्स डिजीज यानी RMD क्या है? क्या ये एन्यूरिज्म ही होता है?

जवाब: अमेरिकी सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक संस्था जेनेटिक एंड रेयर डिजीज इंफॉर्मेशन सेंटर यानी GARD के अनुसार, RMD एक दुर्लभ बीमारी है। यह भी मसल्स यानी मांसपेशियों को प्रभावित करती है, लेकिन एन्यूरिज्म से अलग है।

यह एक न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर है। जो मसल्स में खिंचाव, टकराव या मूवमेंट की वजह से होता है। इस बीमारी में थकान, शरीर ऐंठना और मांसपेशियों में दर्द-अकड़न आम बात है।

सवाल: एन्यूरिज्म के लक्षण क्या होते हैं?

जवाब: वैसे तो इस बीमारी के लक्षणों का पता लगाना बहुत मुश्किल है। कुछ इसके शुरुआती लक्षण हैं, जिन्हें इग्नोर न करें। डिटेल के बारे में नीचे लगी क्रिएटिव को पढ़ें।

सवाल: किन लोगों में एन्यूरिज्म का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब: इसका खतरा 35 से 40 साल के लोगों को ज्यादा होता है। बच्चे को भी ये रोग हो सकता है।

कुछ आदतें भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ाती हैं, जैसे-

  • ज्यादा फैट और कोलेस्ट्रॉल वाला खाना खाना
  • परिवार में दिल की बीमारी अगर किसी को है तब
  • सिगरेट पीने की आदत
  • मोटापा
  • कई बार प्रेग्नेंसी

सवाल: किन कारणों से लोगों को एन्यूरिज्म होता है?

जवाब: इस बीमारी के सही कारणों का पता अब तक नहीं चल पाया है। कुछ ऐसे फैक्टर हैं, जो इस बीमारी की आशंका को बढ़ाते हैं, जैसे कि

  • स्मोकिंग
  • हाई बीपी
  • दिमाग की चोट
  • धमनियों के टिशूज खराब होने से उसकी दीवारों का कमजोर होना
  • खून का थक्का यानी ब्लड क्लॉटिंग होने से नस का फटना
  • हाई ब्लड प्रेशर से नसों पर प्रेशर पड़ना

सवाल: क्या इस बीमारी का लिंडनर की बॉडी बिल्डिंग या जिम से कोई कनेक्शन है?

जवाब: बिल्कुल सही बात है, इस बीमारी का कनेक्शन जिम से है। प्रॉब्लम यह है कि जब हम जिम करते हैं तो अपनी बॉडी की कैपेसिटी नहीं चेक करते। हम दूसरों को फॉलो करते हुए वो सब करने की कोशिश करते हैं जिसके लिए हमारा शरीर तैयार नहीं। अगर आप जिम अपनी लिमिट से ज्यादा करेंगे तो आपका ब्लड प्रेशर अप डाउन होगा, पल्स रेट बढ़ेगा, आपके शरीर पर निगेटिव असर होगा।

लिंडनर जैसे लोगों की फैन फॉलोइंग थीं। ऐसे लोगों पर कुछ अलग करने, कूल दिखने का अलग से दवाब होता है। ऐसे में हो सकता है वो भी कुछ ऐसी एक्सरसाइज कर रहे होंगे जिससे उन्हें परेशानी हो गई। एक और बात। एन्यूरिज्म होने की एक वजह हाइपरटेंशन भी है। यह एक साइलेंट किलर है। अगर बीपी बढ़ा है और आप जिम करते रहते हो तो इससे भी ब्रेन हेमरेज, ब्रेन एन्यूरिज्म होगा।

स्मोकिंग और तम्बाकू प्रोडक्ट का यूज करना से भी एन्यूरिज्म हो सकता है। यह आटर्री के पास एक लेयर बना देता है, जो खतरनाक है।

सबसे जरूरी बात यह कि जिम जाने वाले ज्यादातर लोग सप्लीमेंट लेते हैं। इससे क्लॉट बनता है, जो आपको नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में एक्सरसाइज करने की आपकी क्षमता कितनी है इसे पहचानें। आपको अपने शरीर को जरूरत से ज्यादा थकाना नहीं है।

दूसरी ओर जिम ट्रेनर का काम सिर्फ एक्सरसाइज करवाने पर जोर देना नहीं है। उनका काम जिमर की प्रॉब्लम को आइडेंटिफाई करना है, जिम में मौजूद डॉक्टर के साथ डिस्कस करना है। ताकि इस तरह की कोई परेशानी होने पर उसका सॉल्यूशन सही समय पर निकाला जा सके।

सवाल: एन्यूरिज्म से बचने के लिए कैसी लाइफस्टाइल को फॉलो करें?

जवाब: एन्यूरिज्म जैसी बीमारी को अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है।

प्रोटीन और फाइबर रिच डाइट खाएं। फास्ट फूड्स, जंक फूड्स और घी-तेल वाली चीजें न खाएं। इनमें अनसैचुरेटेड फैट होता है।

  • सैचुरेटेड फैट वाली डाइट जैसे- मीट, अंडा, मछली खा सकते हैं।
  • स्मोकिंग और तंबाकू से बचें।
  • बर्थ कंट्रोल पिल्स का यूज न करें।
  • वजन कंट्रोल रखें, रेगुलर एक्सरसाइज करें। कार्डियो एक्सरसाइज जरूर करें।
  • ब्लड प्रेशर नॉर्मल रखें।
  • हाइपर टेंशन से बचें।

सवाल: एन्यूरिज्म का इलाज कैसे करें?

जवाब: अगर पेशेंट को ज्यादा ब्लीडिंग हुई है तब बचाना मुश्किल है। अगर ब्लीडिंग कम हुई है और उसे हॉस्पिटल लेकर आया गया है तब उसे वैंटिलेटर पर डालकर, ब्रेन प्रेशर कम करने की दवाई देकर कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है। लेकिन यह भी दो से तीन घंटे के अंतर करना जरूरी है।

एन्यूरिज्म से ब्लीडिंग दोबारा न हो इसके लिए दो ऑप्शन हैं...

सर्जिकल क्लिपिंग: एन्यूरिज्म का इलाज करने के लिए क्लिपिंग सर्जरी की जाती है। इसमें न्यूरोसर्जन सर्जरी से ब्रेन की हड्‌डी खोलकर जहां एन्यूरिज्म है, वहां क्लिप लगाते हैं ताकि बैलून पिचक जाए और खून दोबारा न आए।

एंडोवस्कुलर कॉयलिंग: इसमें सर्जरी की जरूरत नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट पैथ लैब में एक खोखले प्लास्टिक ट्यूब यानी कैथेटर को धमनी में डालते है। इसके बाद ब्लीडिंग को रोकने के लिए कुछ कॉयल्स डालते हैं। आमतौर पर यह जांघ से डाला जाता है।

टिप्पणियाँ