पिछले महीने अटलांटिक महासागर में फटने वाली टाइटन पनडुब्बी की मैन्युफैक्चरर कंपनी ओशेनगेट अब वीनस यानी शुक्र ग्रह पर कॉलोनी बनाने की तैयारी कर रही है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को ह्यूमंस 2 वीनस नाम दिया गया है। इसके तहत 2050 तक वीनस के वातावरण में रहने लायक पर्मानेंट माहौल बनाया जाएगा और वहां 1000 लोगों को भेजा जाएगा।
ओशेनगेट कंपनी जो कॉलोनी बनाने की तैयारी कर रही है वो एक फ्लोटिंग यानी तैरने वाली कॉलोनी होगी। प्रोजेक्ट का नेतृत्व गुलेर्मो सोनलेन कर रहे हैं, जो ओशेनगेट कंपनी के को-फाउंडर हैं। हालांकि टाइटन पनडुब्बी डूबने और उसमें 4 अरबपतियों और कंपनी के CEO की मौत के बाद कंपनी के खिलाफ जांच की जा रही है।
- 'मेरे प्लान में कोई खामी नहीं'
गुलेर्मो सोनलेन टाइटन पनडुब्बी के समुद्र की गहराई में जाकर फटने से उठे सवालों का असर अपने प्लान पर नहीं पड़ने देना चाहते हैं। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक गुर्लेनो ने कहा है कि उनके प्लान में कोई खामी नहीं है।
उन्होंने कहा- मेरा प्रोजेक्ट 2050 तक मार्स पर 10 लाख लोगों को बसाने जितना महत्वाकांक्षी तो नहीं है। दरअसल, गुर्लेनो ने ये कहते हुए एलन मस्क पर तंज कसा है। मस्क ने 2022 में दिए एक इंटरव्यू में कहा था वो 2050 तक लोगों को मार्स पर बसाना चाहते हैं।
गुर्लेना का कहना है कि वो जब 11 साल के थे तब से उन्हें एक सपना लगातार आता है, जिसमें वो किसी दूसरे ग्रह के कमांडर होते हैं। जब गुर्लेमो से टाइटन पनडुब्बी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 100% सेफ्टी जैसी कोई चीज नहीं होती है। रिस्क तो रहता ही है।
वीनस को पृथ्वी का जुड़वा कहा जाता है। ये सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह है।
वीनस पर होती है एसिड की बारिश
वीनस यानी शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह भी कहा जाता है। हालांकि वहां रहने के लिए पृथ्वी जैसा माहौल नहीं है। सोनलेन भी इस बात से सहमत हैं। उनका कहना है कि जब भी वीनस पर जाने के बारे में बात होती है तो न सिर्फ स्पेस इंडस्ट्री के बाहर बल्कि इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग तक हैरान रह जाते हैं।
शुक्र ग्रह का वातारण कार्बन डाइ ऑक्साइड से भरा है। उसके सरफेस का तापमान लेड को भी पिघला सकता है। वहां सल्फ्यूरिक एसिड की बारिश होती है। वहां वातावरण का दाब पृथ्वी से 90 गुना ज्यादा है। इसके बावजूद गुर्लेमो को लगता है कि वहां जिंदगी तलाशने की कोशिश जरूर की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि इंसानों को नए प्रयोग करना बंद नहीं करना चाहिए। एक रिसर्च के हवाले से वो कहते हैं वीनस के वातावरण से करीब 30 मील की दूरी पर इंसान के लिए जिंदगी संभव हो सकती है। वहां तापमान और दाब दोनों कम हैं। उनका मानना है कि अगर ऐसा स्पेस स्टेशन बना लिया जाए तो एसिडिक रेन को झेला जा सकता है तो वहां कई सौ इंसानों का रहना संभव हो सकता है।
टाइटन सबमरीन अरबपतियों के लिए ट्रैप थी
एकतरफ जहां ओशेनगेट कंपनी लोगों को वीनस पर पहुंचाने के लिए प्लान बना रही है। वहीं, दूसरी ओर टाइटन में जान गंवाने वाले कंपनी के CEO स्टॉकटन रश के दोस्त ने कहा है कि सबमरीन अरबपतियों के लिए बुना एक जाल था।
हादसे के लगभग एक महीने बाद रश के करीबी दोस्त कार्ल स्टेनली ने उनको लेकर कई दावे किए हैं। स्टेनली ने कहा है कि टाइटन सबमरीन अरबपतियों के लिए बनाया गया एक माउस ट्रैप था। रश को पता था कि लोगों को टाइटैनिक का मलबा दिखाने वाली ट्रिप एक दिन खतरनाक साबित हो सकती है। इसके बावजूद उन्होंने सबमरीन बनाने का काम जारी रखा।
सबमरीन में गन शॉट जैसी आवाजें सुनाई देती थीं
स्टेनली ने इंटरव्यू में बताया कि वो 2019 में टेस्ट के दौरान टाइटन की सवारी करने वाले पहले यात्रियों में से एक थे। यात्रा का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया- समुद्र की गहराई में जाना वाकई जोखिम भरा काम है।
जब मैं वहां गया था तो हर तीन-चार मिनट में गोली चलने जैसी आवाजें सुनाई दे रही थीं। समुद्र के नीचे इस तरह की आवाजें सुनकर डर लगना जाहिर सी बात है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि कार्बन के फाइबर से बनी ट्यूब के फेल होने से ही हादसा हुआ।
समुद्र में 12000 फीट नीचे गई थी सबमरीन
टाइटैनिक जहाज के मलबे को दिखाने गई टाइटन सबमरीन का मलबा बरामद किया जा चुका है। इसमें मानव अवशेष बरामद किए गए थे। 18 जून को यह सबमरीन अटलांटिक महासागर में 12000 हजार फीट नीचे गई थी और उसके बाद लापता हो गई थी। चार दिन बाद 22 जून को इसका मलबा टाइटैनिक जहाज से 1600 मीटर दूर मिला था।
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