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प्रदेश में बिजली व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर को हैक कर अब तक 20 करोड़ के बिजली घोटाले आए सामने

बिलासपुर/ विद्युत वितरण कंपनी जर्मनी से एक करोड़ रुपए में लाए गए जिस सैप सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल पूरे प्रदेश में बिजली व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए कर रही, उसमें गड़बड़ी सामने आई है। इस सॉफ्टवेयर में कई तरह की खामियां हैं, जिसके चलते जिले के किसी भी जोन, डिवीजन या सर्किल में कोई भी बिजली का कर्मचारी अपने बड़े अधिकारियों के आईडी पासवर्ड का इस्तेमाल कर आर्थिक गड़बड़ी कर रहा है। रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ समेत कई जगह से इसकी शिकायतें आ रही हैं। इसके मद्देजनर उन्होंने इस सॉफ्टवेयर को बदलने या इसमें सुधार की गुंजाइश को लेकर शासन को पत्र लिखा है।

  • सिर्फ बिलासपुर में 6 साल में इसके चलते 10 करोड़ का घोटाला फूट चुका है

सैप सॉफ्टवेयर में खामियां है, जिससे कभी बिलिंग मॉड्यूल के चलते तो कभी बिल मॉडिफिकेशन का पाॅवर देने के कारण ये गड़बड़ी हो रही है। मस्तूरी में कुछ साल पहले एफपी-40 घोटाले में डेढ़ से दो करोड़ की आर्थिक अनियमितता सामने आ चुकी है। बिजली कंपनी के एमडी मनोज खरे इन सारे मामलों की जड़ इस सॉफ्टवेयर को मान रहे हैं। इसकी पुष्टि कर बताया कि वे इस सैप सिस्टम को पूरी तरह बदल तो नहीं सकते, लेकिन जहां जहां इस सिस्टम खामियां हैं उनमें बदलाव की बात जारी है। उनके मुताबिक इस सिस्टम में गड़बड़ी की शिकायत पूरे प्रदेश से आ रही है।

जानिए, कहां किस तरह की आर्थिक अनियमितता की गई

1.9 करोड़ रुपए की गड़बड़ी

नेहरू नगर जोन में 2019-20 में बिजली विभाग की महिला क्लर्क फर्जी लेजर में एंट्री कर रकम गबन कर देती थी। शिकायत की जांच पर 1.09 करोड़ रुपए के गबन का खुलासा हुआ। पुलिस ने धोखाधड़ी का जुर्म दर्ज किया।

  • मस्तूरी में हुआ दो करोड़ का घोटाला

मस्तूरी क्षेत्र में एफपी-40 के नाम पर बिजली बिल घोटाला सामने आ चुका है। यह गड़बड़ी भी दो करोड़ रुपए से ज्यादा की है। यहां की महिला जूनियर इंजीनियर ने हेल्पर पति के साथ मिलकर पहले 24 लाख रुपए की गड़बड़ी की।

बड़े लोगों को 1 करोड़ की छूट

विद्युत वितरण विभाग में बीपीएल को छूट देने के नाम पर रसूखदारों को सवा करोड़ रुपए से ज्यादा का लाभ पहुंचाया गया है। पहले यह गड़बड़ी 40 लाख रुपए की थी, जिसके बाद यह मामला एक करोड़ से ऊपर जा पहुंचा।

शिफ्टिंग में 5 करोड़ का घोटाला

बिलासपुर में मीटर शिफ्टिंग के नाम पर पांच करोड़ का घोटाला फूट चुका है। 2016-17 में अंजाम तक पहुंचाया गया। सैप सिस्टम में खामियों का फायदा उठाकर मीटर का टेंडर जारी करने और आर्थिक अिनयमितिता का खेल जशपुर से किया गया।

  • हम बदलाव के प्रयास में लगे हैं

"जर्मनी के जिस सैप सॉफ्टवेयर से पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था संचालित है, उसमें कई खामियां हैं। इन्हें बदलने का प्रस्ताव तैयार है। इस सॉफ्टवेयर के कारण गड़बड़ी सामने आ रही। कई लोगों को दोषी करार दिया गया है।"

- मनोज खरे, एमडी, विद्युत वितरण कंपनी

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