दिन में 10-15 पाउच तंबाकू-गुटखा खाने के कारण महिला का बच्चा हुआ नीले रंग में पैदा; बच्चे को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा
मामला गुजरात के मेहसाणा जिले का है। यहां एक हॉस्पिटल में महिला ने सी-सेक्शन से बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्चे का पूरा शरीर नीला पड़ गया। ब्लड प्रेशर का लेवल भी कम होने लगा। इसके बाद तुंरत बच्चे को अहमदाबाद के नवजात अस्पताल में ट्रांसफर किया गया। यहां डॉक्टरों ने बच्चे की बारीकी से जांच की, तो मेडिकल रिपोर्ट से पता चला कि बच्चे के शरीर में भारी मात्रा में निकोटीन था।
एक्सपर्ट:
डॉ. रितू सेठी, गायनेकोलॉजिस्ट, गुड़गांव
डॉ. रोमिका कपूर, गायनेकोलॉजिस्ट, भोपाल
सवाल: नवजात बच्चे में जन्म के बाद इतना ज्यादा निकोटीन कैसे आया?
जवाब: दरअसल गुजरात वाले मामले में नवजात बच्चे की मां अस्थमा पेशेंट थी। उसको 15 साल की उम्र से तंबाकू खाने की लत थी। वह दिन में 10-15 पाउच तंबाकू-गुटखा का खाती थी। जिसका डायरेक्ट असर कोख में पल रहे बच्चे पर पड़ा।
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, जन्म के बाद नवजात में निकोटीन लेवल 60 ng/ml था। जो एडल्ट में निकोटीन के सामान्य लेवल से 3000 गुना तक ज्यादा है। यह हेल्थ के लिए डेंजरस है। 5 दिनों तक इलाज के बाद जब बच्चे में सुधार देखा गया, तब डॉक्टरों ने उसे डिस्चार्ज किया।
सवाल: इस केस में जन्म के बाद बच्चे का शरीर नीला क्यों हो गया, इसका तंबाकू से क्या कनेक्शन है?
जवाब: बच्चे की मां तंबाकू की आदी थी। तंबाकू में निकोटिन होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मां और बच्चा नाल से जुड़े होते हैं। बच्चे के शरीर में खून, नाल और प्लेसेंटा से निकोटिन चला गया।
निकोटिन की वजह से ऑक्सीजन की सप्लाई सही से नहीं हो पाई। बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन की कमी और प्रॉपर ब्लड फ्लो न होने की वजह से शरीर नीला पड़ने लगा।
सवाल: तंबाकू में ऐसा क्या होता है जो हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है?
जवाब: तंबाकू में निकोटीन, कार्बन मोनो ऑक्साइड समेत 60 तरह के टॉक्सिक सब्सटेंस होते हैं, जो तंबाकू, गुटखा, सिगरेट के जरिए खून से लंग्स तक पहुंचता है और टार बनकर उससे चिपक जाता है।
इससे लंग्स की सेल्स में ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने की क्षमता कम होती जाती है।
इसी रुकावट की वजह से धीरे-धीरे सेल्स कैंसर में बदल जाते हैं। जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करती जाती है। इससे व्यक्ति की डेथ तक हो जाती है।
सवाल: तंबाकू खाने से बेबी कंसीव करने में कैसे दिक्कत होती है?
जवाब: FDA यानी यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, निकोटीन, साइनाइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे केमिकल्स महिला के एग्स को नुकसान पहुंचाते हैं।
एक बार एग्स के मर जाने के बाद वह रीजेनरेट या रिप्लेस नहीं हो सकते हैं।
सिगरेट पीने वाली महिलाओं में मेनोपॉज, स्मोकिंग न करने वाली महिलाओं की अपेक्षा में 1 से 4 साल पहले होता है।
सवाल: आजकल महिलाओं में स्मोकिंग और अल्कोहल लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है, तो क्या इससे भी उनमें मेंस्ट्रुअल साइकिल और बेबी कंसीव करने में दिक्कत होती है?
जवाब: तंबाकू, स्मोकिंग और अल्कोहल से महिलाओं में आमतौर पर फर्टिलिटी इफेक्ट होती है।
तंबाकू से सिर्फ महिलाओं में एन्ड्रोजन हार्मोन ही नहीं, बल्कि पुरुष हार्मोन जैसे टेस्टोस्टेरोन पर भी बुरा असर पड़ता है।
इसलिए तंबाकू और स्मोकिंग करने वाली महिलाएं स्मोकिंग न करने वालों की अपेक्षा आसानी से कंसीव नहीं कर पाती हैं।
IVF जैसी फर्टिलाइजेशन प्रोसेस, फर्टिलिटी पर तंबाकू खाने से होने वाले बुरे प्रभाव को पूरी तरह से दूर नहीं कर पाते।
नॉर्मल महिलाओं की अपेक्षा जो फीमेल स्मोकर्स IVF से बच्चा पैदा करने जा रही हैं, उन्हें उस दौरान और रिट्राइवल टाइम पर ओवरी-स्टिम्युलेशन यानी ओवरी को एक्टिव करने के लिए दवाओं की ज्यादा जरूरत होती है।
सवाल: बेबी कंसीव करने के बाद स्मोकिंग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे को क्या परेशानी होती है?
जवाब: ऐसी महिलाओं में कंसीव करने के बाद भी रिस्क बना रहता है। प्रेग्नेंसी में स्मोकिंग करने से मां और उसके गर्भ में पनप रहे फीटस यानी भ्रूण के लिए खतरा बढ़ जाता है। वहीं डिलीवरी के समय और बाद में या मां का दूध पीने के दौरान बच्चे को कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं जैसे-
- अबॉर्शन यानी गर्भपात
- समय से डिलीवरी या प्रीमैच्योर बर्थ
- नवजात का वजन नॉर्मल से भी कम या लो बर्थ वेट
- अन्य कई जन्मजात विकारों का खतरा
- नवजात का ब्रेन ड्रेमैज
- नवजात को लंग्स में प्रॉब्लम
- सडन इन्फैंट डेथ सिंड्रोम
सवाल: कुछ सिचुएशन में महिला तंबाकू, स्मोकिंग और अल्कोहल नहीं लेती है और उसका पार्टनर एडिक्टेड है तब भी क्या बेबी कंसीव करने में प्रॉब्लम होगी?
जवाब: हां बिल्कुल इससे भी बेबी कंसीव करने में प्रॉब्लम होती है। ये दो तरह से बॉडी को इफेक्ट करता है-
पहला पुरुषों की फर्टिलिटी भी तंबाकू या स्मोकिंग करने से इफेक्ट होती है। इससे स्पर्म काउंट कम हो जाता है, स्पर्म की क्वालिटी खराब हो जाती है।
दूसरा पैसिव स्मोकिंग यानी स्मोकर के साथ रहने से नुकसान होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नुकसान पहुंचता है। गर्भ में बच्चे के लंग्स डेवलेप होते हैं और उनके सांस लेने की स्पीड भी तेज होती है।
जिससे जब बच्चे का जन्म होता है तो लंग फंक्शन और ब्रेन डेवलपमेंट में गड़बड़ी की वजह से वे बार-बार बीमार पड़ सकते हैं।
यह कई बार सडन इन्फैंट डैथ सिंड्रोम का कारण बन सकता है। इसमें पैदा हुए बच्चों की एक साल के अंदर बिना किसी कारण मौत हो सकती है।
सवाल: आमतौर पर लोग मेंटल स्ट्रेस को दूर करने के लिए तंबाकू, सिगरेट और अल्कोहल का सहारा लेते हैं, इससे मेंटल हेल्थ पर भी कोई असर पड़ता है क्या?
जवाब: तंबाकू की लत से फिजिकल हेल्थ के साथ ही मेंटल हेल्थ पर भी निगेटिव असर पड़ता है। नशे वाली चीजों की लत होने से कुछ देर के बाद टेंशन, बेचैनी, डिप्रेशन होने जैसी मानसिक परेशानियां होने लगती हैं।
असल में तंबाकू में निकोटिन ब्रेन में सडन यानी एकदम से बदलाव लाता है। जिसका सीधा असर सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है।
इसके साथ ही पुरुषों और महिलाओं की फर्टिलिटी इफेक्ट होने का डायरेक्ट असर अगली पीढ़ी यानी आने वाली जेनेरेशन पर भी पड़ता है।
सवाल: अगर किसी को भी इन चीजों की आदत है तो कैसे खुद को, गर्भ में पल रहे बच्चे को और अपने आसपास के लोगों को कैसे सेफ रखें?
जवाब: पॉइंट्स से समझते हैं-
- तंबाकू, सिगरेट और अल्कोहल छोड़ने की कोशिश करें।
- निकोटिन फ्री होने के लिए डॉक्टर से कंसल्ट करें।
- घर में ऑक्सीजन रिच इनडोर प्लांट्स लगाएं।
- वेंटिलेटेड रूम में रहें।
- हेल्दी डाइट के साथ नट्स लें।
- योग करें, प्राणायाम हर रोज करें।
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