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बिहार से हर साल लीची खाने से मौत के पीछे का कारण क्या है?

लीची का मौसम है। ठेले पर जहां देखो लीची दिखाई दे रही है। दूसरी ओर कई लोग इसे खाने से डरते हैं, उन्हें लगता है कि ये खाने की चीज नही है। दरअसल बिहार से हर साल लीची खाने से मौत के कई मामले आते हैं। इन्हीं घटनाओं ने उनके मन में लीची को लेकर कई तरह का डर बैठा दिया है।

आज हम ये समझेंगे कि लीची क्या वाकई मौत का कारण बन सकती है।

एक्सपर्ट पैनल:

डॉ. शुचिन बजाज, कंसल्टेंट फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल, दिल्ली

डॉ. सुधीर कुमार, न्यूरोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, हैदराबाद

सवाल: लीची खाने से क्या फायदा होता है?

जवाब: लीची में कई तरह के न्यूट्रिशन मौजूद होते हैं। जैसे-

  1. पोटैशियम
  2. विटामिन सी
  3. विटामिन ई
  4. आयरन
  5. फाइबर
  6. मैग्नीज
  7. फॉस्फोरस
  8. एंटीऑक्सीडेंट्स

इस वजह से यह मेटाबॉलिज्म मजबूत करता है। मेटाबॉलिज्म एक केमिकल प्रोसेस है, जो हमारे खानपान को एनर्जी में कन्वर्ट करता है इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है इससे गर्मी में डिहाइड्रेशन की शिकायत नहीं होती।

यह वजन भी कंट्रोल रखता है।

सवाल: एक दिन में कितनी लीची खानी चाहिए?

जवाब: बच्चों को एक दिन में 2-3 लीची खानी चाहिए। जबकि एडल्ट 5-6 लीची खा सकता है।

सवाल: लीची कब नहीं खाना चाहिए?

जवाब: इन दो सिचुएशन में-

  1. खाली पेट
  2. रात में

नोट: अगर आपने फलहार से व्रत रखा हैं तो लीची न खाएं।

सवाल: लीची खाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब: फ्रेश और पकी हुई यानी लाल रंग वाली लीची खाने के लिए अच्छी होती है।

हरी यानी कच्ची लीची गलती से भी न खाएं। इससे बीमार हो सकते हैं।

यह भी याद रखें कि खाने से पहले इसे पानी में भिगोकर रखना चाहिए।

सवाल: लीची पानी में क्यों भिगोने के बाद क्यों खानी चाहिए और इसे खाने से कितनी देर पहले पानी में भिगोकर रखना चाहिए?

जवाब: इसकी तासीर गर्म होती है। इसमें थर्मोजेनिक गुण होता है यानी यह आपके शरीर के तापमान को बैलेंस रखता है। इससे मेटाबॉलिज्म भी सही रहता है।

लीची अगर बिना पानी में भिगोए खाएंगे तो कब्जियत, सिरदर्द या लूज मोशन भी हो सकता है।

इन दिनों फल-सब्जी उगाने में पेस्टिसाइड्स यानी कीटनाशकों का यूज होता है। नॉर्मल वॉश से पेस्टिसाइड का बुरा असर कम नहीं होता। इस वजह से स्किन प्रॉब्लम और दूसरी समस्या हो सकती है।

यह भी याद रखें कि लीची के छिलके थोड़े सख्त होते हैं। अगर वे सूख जाते हैं, तो उन्हें निकालने में परेशानी होती है। पानी में डुबोने से न सिर्फ छिलके पर लगी धूल-मिट्टी साफ होती है, बल्कि छिलके उतारना भी आसान हो जाता है। इसलिए इसे खाने के आधा घंटे पहले पानी भी भिगोकर रख दें।

सवाल: लीची और मौत का क्या कनेक्शन है, इस तरह की खबरें हर साल गर्मी के दिनों में बिहार से आती हैं?

जवाब: लीची खाने से मौत नहीं होती। इसे गलत तरीके से खाएंगे तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

असल में लीची में नेचुरली हाइपोग्लाइसीन A और मेथिलीन साइक्लो प्रोपाइल ग्लाइसिन केमिकल पाए जाते हैं। ये शरीर में टॉक्सिक की तरह काम करते हैं और ग्लूकोज बनने से रोकते हैं। ये दोनों केमिकल कच्ची लीची में ज्यादा और पकी में कम होते हैं।

बिहार में बच्चों की मौत के केस में शरीर देर तक भूखे रहने और पोषण की कमी के कारण शरीर में शुगर लेवल कम हो जाता है तो यह दिमाग को प्रभावित करता है। जिससे बेहोशी आने लगती है और 4-5 घंटे तक इलाज न मिल पाने पर होश नहीं आ पाता। तो जान चली जाती है।

बिहार में लीची खाने पर जिन बच्चों की मौत हुई उनमें एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम के लक्षण थे।

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के होने पर पेशेंट का शरीर अचानक से टाइट यानी सख्त हो जाता है। दिमाग और शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है।

ये खासकर तब होता है जब रात का खाना न खाने से ब्लड शुगर लेवल पहले से कम हो और सुबह खाली पेट लीची खा ली जाए, तो इससे बेहोशी आने का रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल: किन लोगों को लीची नहीं खाना चाहिए?

जवाब: इन लोगों को लीची खाने से परहेज करना चाहिए।

1. लो ब्लड प्रेशर पेशेंट: लीची ज्यादा खाने से ब्लड प्रेशर एकदम से लो यानी कम हो सकता है। जिससे चक्कर आना, सुस्ती और थकान हो सकती है। बीपी की दवाइयां ले रहे हैं तो लीची खाने से बचें।

2. जिन्हें एलर्जी है: किसी को पहले से फूड एलर्जी है तो लीची न खाएं। इससे स्किन पर खुजली हो सकती है, लाल चकत्ते पड़ सकते हैं और होठों में सूजन आ सकती है।

3. डायबिटीज पेशेंट: लीची खाने से ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है। डायबिटीज यानी शुगर पेशेंट इसे खाने से बचें। खाते भी हैं तो अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें।

4. सांस लेने में जिन्हें तकलीफ होती है: अगर आप अस्थमा के मरीज हैं तो आप लीची न खाएं, इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

5. जिनकी सर्जरी हुई है: इसे खाने से ब्लड शुगर लेवल को कम हो सकता है इसलिए सर्जरी के दौरान और बाद में प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए लीची न खाएं।

6. अर्थराइटिस पेशेंट: लीची ज्यादा खाने से अर्थराइटिस हो सकता है। लीची में शुगर और कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है। अर्थराइटिस पेशेंट रोजाना लीची खाने से बचें।

7. गले में खराश होने पर: लीची गर्म तासीर की होती है। जिन लोगों के गले में प्रॉब्लम होती है, ज्यादा लीची खाने से उनके गले में खराश और दर्द हो सकता है।

सवाल: क्या प्रेग्नेंट महिलाएं लीची खा सकती हैं?

जवाब: प्रेग्नेंट महिलाओं को लीची खाने से परहेज करना चाहिए। साथ ही बच्चे को फीड कराने वाली महिलाओं को भी लीची को अवाइड करना चाहिए।

पड़ोसी देश बांग्लादेश के ढाका में 10 साल के बच्चे के गले में लीची का बीज फंस गया। जिससे उसकी मौत हो गई। यह घटना दो दिन पुरानी है। ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है। इसलिए ...

सवाल: गले में अगर लीची का बीज फंस जाए तो निकालने के लिए क्या करें?

जवाब: सबसे पहले एंबुलेंस को कॉल करें। इसके बाद मेडिकल हेल्प मिलने तक हेमलिच टेक्नीक यूज करें।

सवाल: क्या होती है हेमलिच टेक्नीक?

जवाब: गले में कुछ फंसने से दम घुटने और सांस लेने में परेशानी होने पर हेमलिच टेक्नीक का इस्तेमाल किया जाता है। यह सांस नली में फंसी हुई चीजों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है।

दरअसल हेमलिच मेनयोवर टेक्नीक के लिए जो आप पोजिशन लेते हैं, उसमें पेट पर जोर दिया जाता है।

प्रेशर पड़ने से सांस की महत्वपूर्ण मांसपेशी डायाफ्राम ऊपर उठती है, इससे लंग्स से हवा बाहर निकालते हैं और फंसी हुई चीज सांस नली से बाहर निकाल जाती है।

नोट: इस टेक्नीक को करने से पहले ध्यान रखें कि कोई प्रेग्नेंट महिला तो नहीं है। बच्चा है तो 1 साल से छोटा तो नहीं है।

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