भवनों निर्माण के लिए गलत तरीके से अनुमति समेत पांच अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी, नगर निगम के पूर्व आयुक्त और कर्मचारी हो सकते हैं गिरफ्तार
रायगढ़/ वर्ष 2016 की शुरुआत में दर्ज हुए धोखाधड़ी के मामले में नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त प्रमोद पांडेय, मानचित्रकार प्रतुल श्रीवास्तव समेत 10 से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ अब चालान पेश किया जाएगा ।
तत्कालीन विधायक रोशनलाल अग्रवाल की शिकायत पर करोड़ों के खरीदी घोटाले, कर्मचारियों के नियमितीकरण, भवनों निर्माण के लिए गलत तरीके से अनुमति समेत पांच अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पूर्व आयुक्त समेत कर्मचारी महीनों तक फरार रहे। मामले में अग्रिम जमानत के साथ हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। स्टे हटने के बाद अब एक बार फिर इन लोगों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
लगातार मनमानी की शिकायतों के बाद 2016 में तत्कालीन विधायक रोशनलाल अग्रवाल ने कलेक्टर के साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग को नगर निगम में हो रही धांधली की शिकायत की थी। जांच में शिकायत सही पाई गई तो पांच अलग-अलग मामलों में तत्कालीन आयुक्त प्रमोद शुक्ला, कार्यपालन अभियंता डीके शर्मा, भवन शाखा के मानचित्रकार प्रतुल श्रीवास्तव, सहायक उप अभियंता एसएन अघरिया, टिल्लू शर्मा, उप अभियंता प्रभा टोप्पो, मयंक सिंह, अनिल वैध, जोगी, अशोक कुंभकार, खूबचंद चौधरी, हरिकेश्वर लकड़ा के विरुद्ध धारा 420, 467, 468 व अन्य धाराओं के तहत अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
नियमितीकरण में हुई थी धांधली
शासन से तब निर्देश आया था, जिसमें कहा गया था कि नगर निगम में 1995 से पहले से काम कर रहे संविदा या अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाए। इसमें नगर निगम में तब के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारियों ने लेन-देन कर बाद में संविदा पर आए कर्मचारियों को नियमित कर दिया। इसके साथ ही बारबेट वायर, सीमेंट पोल, कंटेनर, डस्टबिन की लाखों रुपए की खरीदी हुई। आरोप लगा कि तत्कालीन आयुक्त ने अपनी वित्तीय क्षमता से ज्यादा राशि खरीदी पर खर्च की। इन खरीदियों के लिए प्रक्रिया का पालन किए बगैर पसंदीदा लोगों को काम दे दिया। इसके साथ ही गाइडलाइन से अलग कुछ लोगों को बड़े परिसर और भवन निर्माण की अनुमति देने का खुलासा हुआ। भूपदेवपुर पुलिस ने नगर निगम का एक मालवाहक जब्त किया। इसमें कथित तौर पर मोटर, पंप समेत कई महंगे सामान तत्कालीन आयुक्त के घर भेजे जा रहे थे।
अवैध कॉलोनी का मामला अधर में
कलेक्टर के आदेश पर नगर निगम आयुक्त ने तीन महीने पर तीन मामलों में 9 लोगों के खिलाफ अवैध प्लाटिंग और प्लाट बेचने के कारण मामला दर्ज कराया था। इसमें जितेंद्र कुमार, दयासागर मिश्रा, हेमलता, सीमा, ललिता, बिहारी, अजय अग्रवाल, महेंद्र सिंह के खिलाफ थानों एफआईआर दर्ज हुई थी। नगर निगम ने रेरा या नगर निगम से अनुमति के लिए बगैर प्लाटिंग के मामले में नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 262(3)(2)(3) के तहत मामला दर्ज कराया था। नगर निगम ने तहसीलदार से जानकारी मिलने के बाद एफआईआर कराई। वहीं राजस्व विभाग ने मिट्ठूमुड़ा, रामपुर, कौहाकुंडा में अवैध प्लाटिंग करने वालों की जानकारी नगर निगम को नहीं दी। यहां अब भी अवैध प्लाटिंग चल रही है। एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस की कार्रवाई भी आगे नहीं बढ़ी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्टे खत्म, पेश होगा चालान
जांच अधिकारी सीएसपी अभिनव उपाध्याय ने बताया, मामले में हाईकोर्ट से स्टे था। आरोपियों ने अग्रिम जमानत ली हुई थी। सुप्रीम कोर्ट से आदेश जारी हुआ जिसमें कहा कि 6 माह से पुराने जितने भी स्टे अदालतों द्वारा दिए गए हैं, विशेष परिस्थितियों को छोड़कर ऐसे स्टे खत्म किए जाएं। 10 मई को आदेश मिलने के बाद इस मामले में कार्रवाई शुरू की गई है। पूर्व आयुक्त प्रमोद शुक्ला, प्रतुल श्रीवास्तव समेत कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था, अग्रिम जमानत के कारण उन्हें तुरंत रिहा भी किया गया। अगले दो-तीन दिनों में मामले में चालान पेश करेगी।

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