कभी सिंगर, एक्ट्रेस तो कभी एडवोकेट या सीए बनना चाहती थी देवती मलिक आज वाइन एक्सपर्ट बनकर जा रही हैं देश-विदेश, उनकी कहानी उन्ही की जुबानी
नई दिल्ली/ मेरा नाम देवती मलिक है। मैं मूल रूप से कोलकाता से हूं। लेकिन मेरी पैदाइश बेंगलुरु की है और वहीं पली-बढ़ी हूं। 12वीं तक आर्मी स्कूल में पढ़ी। आज मैं ‘वाइन सोमलियर’ यानी वाइन एक्सपर्ट हूं। शायद ये शब्द आपके लिए नया हो। मेरे लिए भी नया था लेकिन दिलचस्प लगा तो मैंने इसकी पढ़ाई ही कर डाली। आज मैं लोगों को वाइन पीने, खरीदने के तौर-तरीके सिखाती हूं। तो चलिए जानिए मेरी वाइन एक्सपर्ट बनने की कहानी…
- बंगाली होने की वजह से घर का माहौल काफी खुला रहा
घर में मेरे अलावा मम्मी और भाई हैं। बंगाली होने की वजह से मेरे घर का माहौल काफी खुले विचारों वाला रहा है। हमारे घर में सभी खाने के शौकीन हैं। मेरे मम्मी-पापा दोनों ही बहुत अच्छा खाना बनाते थे। वो हमें खिलाने के लिए नई-नई डिश बनाते।
खानपान को लेकर भी हम काफी खुले विचारों के थे। मेरे घर में एक नियम था कि एक टाइम का खाना सबको साथ बैठकर खाना होता था। उस दौरान हम अपनी-अपनी लाइफ डिस्कस करते। हम दोनों भाई-बहन कुछ भी करते तो पेरेंट्स हमें रोकते नहीं लेकिन वो अपनी राय जरूर रखते थे। उन्हें हमें ख्याल होता लेकिन हमें आगे बढ़ने और कुछ नया करने से रोकते नहीं।
- कभी सिंगर, एक्ट्रेस तो कभी एडवोकेट या सीए बनना चाहती थी
बचपन में मैं कभी सिंगर, कभी एक्ट्रेस तो कभी वकील बनना चाहती थी। लेकिन बारहवीं तक आते-आते मेरी रूचि फाइनेंस में होने लगी। कॉमर्स से पढ़ाई कर रही थी और चार्टेड अकाउंटेंड बनने का प्लान था। लेकिन उसी दौरान एक दिन ओबेरॉय होटल से कुछ लोग हमारे स्कूल आए। अपने अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम के बारे में बताया।
उन्होंने बताया कि इसमें कोई फीस नहीं लगेगी बल्कि स्टाइपेंड मिलेगा। उन्होंने होटल की फोटो दिखाई तो मेरा मन बदल गया। खाने का शौक था तो शेफ के अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए अप्लाई कर दिया। कई राउंड के इंटरव्यू के बाद मेरी बातचीत और पर्सानैलिटी देख उन्होंने मुझे फूड एंड बेवरेज के कोर्स के लिए अप्लाई करने को कहा।
- कोर्स के दौरान ही वाइन को लेकर दिलचस्पी बढ़ी
मैंने उनके एक अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम में एडमिशन ले लिया। इस डिग्री में पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट को ऑन द जॉब एक्सपीरियंस मिलता है। उस कोर्स को करने वाले स्टूडेंट को ओबेरॉय के किसी भी होटल, रिसॉर्ट के किसी भी डिपार्टमेंट में काम करके एक्सपीरियंस लेना होता है। तीन साल का कोर्स करने के बाद मैं उनके पोस्ट ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए दिल्ली चली गई।
मेरी स्पेशलिटी फूड एंड बेवरेज डिपार्टमेंट में थी। उस कोर्स के बाद मैंने अपना करियर हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री से शुरू किया। मेरी पोस्टिंग बेंगलुरू होटल ओबरॉय में बतौर बार मैनेजर हुई। मैंने तीन साल तक वहां काम किया। तीन साल तक बेंगलुरू ओबेरॉय के साथ काम करने के दौरान मैं होटल के बार ऑपरेशन, बेवरेज और वाइन लिस्ट हैंडल कर रही थी। ऐसे में धीरे-धीरे वाइन को लेकर मेरी दिलचस्पी बढ़ी।
भारत में बियर-व्हिस्की पॉपुलर, वाइन का कॉन्सेप्ट नया
हमारे देश में बियर-व्हिस्की की खपत ज्यादा है। वाइन का कॉन्सेप्ट लोगों के लिए नया है। मैं जब ग्रेजुएशन में थी, तभी से वाइन के बारे में ज्यादा जानने की कोशिश करती। लेकिन बार में काम करने के दौरान मैंने ज्यादा विस्तार से वाइन के बारे में पढ़ा और इसे समझा। सर्विस के लिए गेस्ट के सवालों को कैसे हैंडल करना है, उन्होंने वाइन के बारे में कैसे जानकारी दी जाती है, ये सब मैंने सीखा।
काम के दौरान ही मैंने वाइन से जुड़े कई सर्टिफिकेट कोर्स किए। जब मैंने शुरू किया था, तब वाइन को लेकर ज्यादा करियर स्कोप नहीं था। मेरे फील्ड वाले ज्यादातर लोग कॉकटेल मेकिंग, रम, विहस्की का सर्टिफिकेशन ज्यादा कर रहे थे। मैंने ‘कोर्ट ऑफ मास्टर सोमलियर’ का कोर्स किया। जिसके बाद मैं एक सर्टिफाइड वाइन सोमलियर बन गई। जब मुझे बार मैनेजर की जिम्मेदारी मिली, उस वक्त पूरे देश में ओबेरॉय की इकलौती लड़की बार मैनेजर थी।
सेटल नौकरी और अच्छी सैलरी छोड़ बिजनेस का रिस्क लिया
तीन साल तक ओबेरॉय की नौकरी करने के बाद मैंने एक इंडियन वाइन ब्रांड से जुड़ी। ये कर्नाटक के हंपी में है। यहां मेरी जॉब ब्रांड हेड की रही। उनकी टीम काफी छोटी थी इसलिए वहां मैं कई जिम्मेदारियां संभालती थी। मैं मार्केटिंग, वाइन टेस्टिंग, वाइन इवेंट, ट्रेनिंग सबकुछ देखने लगी। यहां मेरी जॉब प्रोफाइल अच्छी थी और मेरा करियर अच्छी शेप लेने लगा। रेगुलर इनकम और प्रोमिसिंग फ्यूचर। लेकिन, दो साल तक वहां काम करने के बाद मैंने सोचा कि अब मुझे अपने कौशल और प्रोफेशनल जानकारियों के साथ आगे बढ़ना चाहिए और कुछ नया करना चाहिए। मैंने नौकरी छोड़ने रिस्क लिया और अपना बिजनेस खड़ा करना शुरू किया।
होटल स्टाफ को वाइन सर्विस की देती हूं ट्रेनिंग
साल 2022 में मैंने अपनी कंपनी बनाई, जिसका नाम Drink with D, Wine Solutions है। ये एक वाइन कंसल्टेंट कंपनी है। बड़े-बड़े होटल हो या रिसॉर्ट हर जगह स्टाफ को खाना, ड्रिंक सर्व करने की ट्रेनिंग दी जाती है। मेरी कंपनी होटल रिसार्ट के साथ ज्यादा काम करती है। मेरी कंपनी होटल स्टाफ को ट्रेनिंग देती है। वाइन कैसे सर्व की जाती है, वाइन के बारे में क्या जानना जरूरी है, गेस्ट से वाइन के बारे में कैसे बात करनी चाहिए, वाइन से जुड़ी टेक्निकल जानकारी भी दी जाती है। साथ ही, अगर कोई नया रेस्तरां खुल रहा है और वो अपना वाइन मेन्यू बनाना चाहते हैं तो मैं उनका वाइन मेन्यू भी डिजाइन करने में मदद करती हूं।
मेरी कंपनी लोगों को वाइन एक्सपीरियंस भी देती है
मैं बेंगलुरू, दिल्ली और गुड़गांव में नॉर्मल कंज्यूमर के लिए फन वाइन एक्सपीरियंस इवेंट करती हूं। ये दो घंटे का एक चार्जेबल इवेंट होता है। जहां, कस्मटर को 2-3 हजार तक की फीस देनी होती है। बदले में उन्हें थीम के अनुसार फूड और चार-पांच तरह की वाइन सर्व की जाती है। फिर मैं उन्हें परोसे जाने वाली वाइन के बारे में जानकारी देती हूं। किस तरह की वाइन खरीदें, वाइन को कैसे एंजॉय करें ये सब बताती हूं।
मेरी कंपनी की तरफ से ऑर्गेनाइज होने वाले इस इवेंट को कोई भी बुक कर सकता है। मेरे वाइन एक्सपीरियंस इवेंट में 30-35 लोग होते हैं। इस इवेंट में आने वाले ऑडियंस 25 से 40 एज ग्रुप के होते हैं। उनमें बहुत सारे न्यू ड्रिंकर होते हैं, जिन्होंने अभी-अभी वाइन पीना शुरू किया।
कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो सालों से वाइन पी रहे हैं। इवेंट में वो मुझे वाइन से जुड़ी तमाम सवाल भी पूछते हैं। जैसे वाइन को घर में कैसे स्टोर कर सकते हैं? वाइन को पीने के क्या स्टेप्स होते हैं? वाइन खरीदते समय किन बातों का ध्यान में रखना होता है? किस देश में कौन सी वाइन बनती है और कौन सी वाइन सबसे बढ़िया है? वाइन के टेस्ट अलग हैं तो क्यों? मैं लोगों को वाइन का ग्लास पकड़ना और पीना भी सिखाती हूं। आम कस्टमर के लिए वाइन एक्सपीरियंस इवेंट करती हूं।
वाइन एक्सपीरियंस के लिए ऑडियंस जुटाना चुनौती है
मेरे जॉब में चैलेंज भी बहुत हैं। हमारे देश में सोमलियर बहुत सारे हैं। जो कि किसी न किसी होटल ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हैं। लेकिन सिर्फ वाइन को लेकर काम करने वाले बहुत कम लोग हैं। खासकर इंडिपेंडेंट काम करने वालों की संख्या गिनी-चुनी ही है। इस वजह से मुझे अपना बिजनेस सेट करने में काफी दिक्कत हुई। फिर वाइन एक्सपीरियंस के लिए ऑडियंस जुटाना ये भी चुनौती है।
भारत में भले ही वाइन इंडस्ट्री का सर्कल छोटा है लेकिन यहां सब बहुत खुली और सुलझी सोच रखते हैं। उनलोगों के बीच अपनी बात रखना आसान होता है लेकिन ऑडियंस के बीच खुद की पहचान बहुत बड़ी है। यंग जेनरेशन को इवेंट के लिए समझना थोड़ा आसान है। शुरुआत में काफी दिक्कत हुई लेकिन अब ‘वर्ड ऑफ माउथ’ के जरिए मेरी एक कम्युनिटी बन गई है। हमारे समाज में एल्कोहल से जुड़ी हर चीज खराब मानी जाती है। और ऐसे में उनके आपसी अंतर को समझना मुश्किल होता है। वाइन बाकी एल्कोहल से काफी अलग है। इसकी पहुंच एक सीमित क्लास तक ही है। ये एल्कोहल का वो रूप नहीं, जहां व्यक्ति बदहवास और बेकाबू हो जाए।
कम उम्र होने के कारण सीनियर क्लाइंट सीरियसली नहीं लेते
मैं कॉरपोरेट इवेंट भी करती हूं। कई दफा कंपनियां अपनी टॉप मैनेजमेंट या क्लाइंट ग्रुप के लिए कुछ बढ़िया करना चाहती हैं तो वो वाइन टेस्टिंग इवेंट बुक कर देती हैं। ऐसे में मुझे एक या डेढ़ घंटे का इवेंट मिल जाता है। जहां मैं उनके लिए वाइन एक्सपीरियंस इवेंट अरेंज करती हूं। इस इवेंट की चुनौती अलग होती है। टॉप मैनेजमेंट या क्लाइंट ग्रुप में वो लोग होते हैं, जो दुनिया घूम चुके हैं।
वाइन के टेस्ट को चाहे न समझे लेकिन अलग-अलग तरह की वाइन को चख चुके होते हैं। उनके लिए मैं काफी यंग होती हूं। और जब मैं वाइन के बारे में बात करना शुरू करती हूं तो वो थोड़ा असहज महसूस करते हैं। उनके बिहेवियर से पता चलता है कि जैसे मेरी कही जाने वाली बात को वो हल्के में ले रहे हैं। उनके हावभाव से लगता है जैसे कह रहे हों ‘हमने दुनिया देखी है। ये कल की लड़की हमें वाइन पर क्या ज्ञान देगी।’
लड़की बार मैनेजर हो सकती है गेस्ट के गले नहीं उतरा
जब मैं बतौर बार मैनेजर काम कर रही थी, तब एक बार ऐसा हुआ कि हमारे एक गेस्ट को ड्रिंक पसंद नहीं आई और वो काफी गुस्से में थे। मेरे स्टाफ ने आकर मुझसे उनके बारे में बताया और कहा कि ‘आप प्लीज उनसे बात कर लीजिए’। मैं उस गेस्ट के पास गई और उनके खराब एक्सपीरियंस के लिए माफी मांगी लेकिन उन्होंने कहा मुझे आपसे बात नहीं करनी, आप मैनेजर को बुलाइए। मैं बार-बार कहती रही कि सर मैं ही मैनेजर हूं। फिर भी वो अपनी बात पर अड़े रहे। उनके लिए ये यकीन करना मुश्किल हो रहा था कि इतनी कम उम्र की लड़की बार मैनेजर कैसे हो सकती है।
बार मैनेजर, बार टेंडर और वाइन सोमलियर में फर्क है
बार मैनेजर, बार टेंडर और वाइन सोमलियर एक-दूसरे से जुड़े तो हैं लेकिन तीनों का वर्क प्रोफाइल अलग है। एक बार में आपको ये तीनों प्रोफेशनल मिलेंगे। लेकिन इन तीनों की स्किल्स, क्वालिफिकेशन और काम अलग होता है। बार मैनेजर का काम पूरी बार टीम को हैंडल करना है। वो बस ऑपरेशन संभलता है। जैसे ड्रिंक सही से बन रही है या नहीं, गेस्ट का एक्सपीरियंस अच्छा रहे। पूरी बार टीम अच्छे से परफॉर्म कर पाए।
बार टेंडर का काम बार के अंदर रहकर सारे ड्रिंक को ‘डिस्पेंस’ करना यानी बनाना होता है। वो ही ड्रिंक बनाता है, बार को सेटअप करता है, बार को क्लीन रखने जैसी जिम्मेदारियां भी उसकी होती है। सोमलियर का काम वाइन से जुड़ा होता है। ‘बार टेंडर’ वाइन की बोतल देता है और ‘सोमलियर’ का काम उसे गेस्ट तक ले जाना और उनकी ग्लास में वाइन को ‘पोर’ यानी ग्लास में वाइन उड़ेलना होता है।
इंटरनेशनल वाइन कम्पीटिशन में भारत को किया रिप्रेजेंट
हाल ही में क्रोएशिया में तीन दिन का इंटरनेशनल वाइन कम्पीटिशन हुआ, जहां मैं बतौर ज्यूरी गई थी। इस कॉम्पिटिशन में कई देशों से वाइन प्रोफेशनल को बुलाया जाता है। इसमें अलग-अलग वाइन ब्रान्ड अपने सैंपल को लेकर आते हैं। और ज्यूरी में शामिल प्रोफेशनल उनको टेस्ट (चखकर) करके रैंक देते हैं। जैसे बेस्ट रेड वाइन, बेस्ट वाइट वाइन। जीतने वाले को फिर मेडल मिलता है। इसमें मुझे देश को रिप्रेजेंट करने का मौका मिला और काफी बढ़िया अनुभव रहा है।



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