पांच महीने बीतने को हैं लेकिन मिलरों के अपने ही उठाए धान का चावल जमा नहीं करने के मामले में जोहार राइस मिल को किया सील साथ ही दो अन्य का प्रकरण बनाया खाद्य विभाग ने
रायगढ़। सरकारी धान उठाकर चावल जमा नहीं करने वाले राइस मिलों पर खाद्य विभाग ने कार्रवाई की है। जोहार राइस मिल को सील कर दिया गया है जबकि दो अन्य का प्रकरण बनाया है। धान उठाव के पांच महीने बाद भी मिलर चावल जमा नहीं कर सके हैं। कस्टम मिलिंग का काम जल्द से जल्द पूरा हो, इसके लिए सरकार ने फरवरी तक समितियों से पूरा धान उठवा लिया था।
धान का एक-एक दाना मिलों में पहुंच चुका था। इसके बाद पांच महीने बीतने को हैं लेकिन मिलरों ने अपने ही उठाए धान का चावल जमा नहीं किया है। समीक्षा के दौरान मिलरों के चावल जमा का आंकड़ा सामने आया था। कई राइस मिलर ऐसे थे जिन्होंने दस दिनों में एक भी लॉट जमा नहीं किया था। इसके बाद कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा ने खाद्य विभाग को जांच के आदेश दिए थे।
खाद्य अधिकारी चितरंजन सिंह ने जोहार राइस मिल में जांच की। जमा करने योग्य चावल के अनुपात में धान स्टॉक में होना था। पता चला है कि राइस मिल में उसका आधा भी धान नहीं मिला। खाद्य विभाग ने जोहार राइस मिल को सील कर दिया है। इसके बाद बालाजी राइस मिल और गौरीशंकर राइस मिल पर भी खाद्य विभाग ने जांच की। दोनों मिलों में भी धान का स्टॉक बेहद कम मिला। इनके प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। अभी भी कई मिलों में धान का स्टॉक जीरो है क्योंकि उनका चावल ओडिशा में बेच दिया गया। सरना धान का चावल ओडिशा और महाराष्ट्र भेजा गया।
होनी चाहिए एफआईआर
जब समिति में कोई प्रबंधक धान का गबन करता है तो उस पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाती है। लेकिन राइस मिलरों पर मेहरबानी की जाती है। इस साल मिलरों ने सरकारी धान तो उठाया लेकिन उसका चावल कूटकर दूसरे प्रदेशों में सप्लाई कर दिया। राइस मिलरों ने भी धान की अफरा-तफरी की और कस्टम मिलिंग के निर्देशों का पालन नहीं किया। राइस मिलरों पर भी एफआईआर होनी चाहिए तभी सिस्टम सुधरेगा।

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