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डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना में घोटाला- पीएचसी में प्रोत्साहन राशि फर्जीवाड़े की जांच में लापरवाही

कोरबा/ खड़गवां में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान भारत व डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना के तहत प्रोत्साहन राशि में किए गए फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जिसके बाद राज्य समेत कोरिया जिला कलेक्टर डॉ. विनय लंगेह के निर्देश पर जांच टीम बनाई गई थी।

कोरिया जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई टीम की प्रारम्भिक जांच में प्रोत्साहन राशि में फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई थी। वहीं रायपुर से दो सदस्यों की टीम 13 फरवरी को खड़गवां में संचालित पीएचसी जांच करने पहुंची थी। यहां भी टीम ने फर्जीवाड़ा की पुष्टि की और बताया था कि जांच के बाद डॉक्टर समेत कुछ मेडिकल स्टाॅफ से रिकवरी की जा रही है, लेकिन दोषियों के खिलाफ अबतक धाेखाधड़ी का केस दर्ज नहीं किया गया है।

बता दें कि यह पूरी योजना ऑनलाइन होने की वजह से अधिकारियों ने कहा था गड़बड़ी की आशंका की जांच कर सही तथ्य को सामने लाया जाएगा। अब 4 महीने बीतने के बाद भी जांच की जानकारी और संबंधित डॉ. एस कुजुर, नेत्र सहायक समेत अन्य कर्मियों, जिनके द्वारा पदनाम प्रोत्साहन राशि का लाभ लिया गया है, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

वहीं जांच में शामिल अधिकारी डॉ. प्रिंस जायसवाल ने बताया कि जिला समेत राज्य स्तर की बैठक की वजह से जांच पूरी नहीं हो पा रही है, इधर जांच में शामिल अधिकारी के इस रवैये से कलेक्टर विनय लंगेह ने नाराजगी जताई है।

धाेखाधड़ी का केस दर्ज होना चाहिए: अधिवक्ता

अधिवक्ता नत्थू सिंह परमार ने बताया कि यदि शासकीय अधिकारी या कर्मचारी पदनाम बदलकर शासकीय योजना की कूटरचना के तहत गलत जानकारी शासन को देकर आर्थिक लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ शासन के द्वारा 420 समेत धोखाधड़ी का केस दर्ज होने चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि पूरी राशि की रिकवरी होने का प्रावधान भी है।

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