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मर गई थी 9 साल की बच्ची CPR से फिर जिन्दा उठ खड़ी हुई, जानें क्या है CPR

सोनाराम राजस्थान के शिवगंज के रहने वाले हैं। उनकी 9 साल की बेटी सीता को सुबह 3 बजे सीने में दर्द हुआ। थोड़ी देर बाद वो सो गई। सुबह 6 बजे जब परिवार वालों की नींद खुली। उन लोगों ने देखा कि सीता के मुंह से झाग निकल रहा। वे तुरंत उसे शिवगंज सरकारी अस्पताल ले गए।

यहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची जिंदा नहीं है इसे सिरोही सरकारी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लेकर जाए। परिवार वाले जैसे ही सीता को लेकर वहां पहुंचे, डॉक्टरों ने तुंरत उसका ECG किया गया। इसमें धड़कन नजर नहीं आई। डॉक्टर कुछ सेकेंड के लिए खामोश हो गए, फिर सीता को कुछ इंजेक्शन लगाने के साथ करीब 15 मिनट तक लगातार CPR दिया। इसके बाद बच्ची की सांस धीरे-धीरे लौटने लगी।

एक्सपर्ट: डॉ. नरेश त्रेहन, चेयरमेन और मैनेजिंग डायरेक्टर, मेदांता हॉस्पिटल

सवाल: CPR का क्या मतलब होता है?

जवाब: CPR का फुल फॉर्म कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (Cardiopulmonary Resuscitation) है। यह एक तरह की प्राथमिक चिकित्सा यानी फर्स्ट एड है। जिससे आप किसी की जान बचा सकते हैं।

सवाल: क्या CPR देने के लिए डॉक्टर की जरूरत होती है?

जवाब: नहीं। आप इसे खुद दे सकते है। बस सही तकनीक या तरीका पता होना जरूरी है।

CPR देने के दो तरीके हैं

पहला- जब यह पेशेंट को कोई दूसरे व्यक्ति से दिया जाता है। इसे कोई भी किसी भी जगह पर दे सकता है।

दूसरा- यह मेडिकल इक्विपमेंट की मदद से पेशेंट को दिया जाता है। ये हॉस्पिटल में हो सकता है।

सवाल: किन कंडीशन में या किन लोगों को CPR देने की जरूरत होती है?

सवाल: किसी भी पेशेंट को CPR देने से क्या फायदा होता है?

जवाब: इसकी मदद से पेशेंट को सांस लेने में सहायता मिलती है। CPR देने से हार्ट और ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन में मदद मिलती है। कई मामलों में CPR की सहायता से व्यक्ति की जान बच जाती है।

सवाल: बच्चों को CPR देने का क्या प्रोसेस है?

जवाब: एक साल से लेकर किशोरावस्था यानी एडोलसेंस तक के बच्चों को CPR उसी तरह दिया जाता है जैसे बड़ों को दिया जाता है।

4 महीने से लेकर एक साल तक के बच्चों को CPR देने का तरीका थोड़ा अलग होता है।

अगर बच्चा सांस नहीं ले पा रहा है, तो बच्चे की स्थिति को समझें और उसे छूकर उसका रिएक्शन यानी प्रतिक्रिया देखें। बच्चे को जोर से हिलाएं नहीं। अगर बच्चा कोई रिएक्शन नहीं दे रहा है, तो CPR शुरू करें।

सवाल: CPR देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब: इन बातों का रखें ध्यान।

CPR देते समय अपनी कोहनी और हाथों को सीधा रखें।

बच्चे या बड़े को जमीन पर पीठ के बल लिटाकर ही CPR दें।

पेशेंट का हाथ या पैर कुछ भी मुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए।

सवाल: आमतौर पर लोग CPR देते समय कौन सी गलतियां करते हैं जो नहीं करनी चाहिए?

जवाब:

  • चेस्ट (छाती) को ठीक से नहीं दबाते हैं।
  • पेशेंट के मुंह से अपना मुंह अच्छे से लॉक नहीं करते हैं।
  • कोहनी को सीधा नहीं रखते हैं।
  • पेशेंट की बॉडी को सीधा नहीं रखते हैं।

हार्ट के जरिए सांस लेना बंद करने के चार से छह मिनट बाद ब्रेन की डेथ हो जाती है। CPR प्रभावी ढंग से ब्लड फ्लो को बनाए रखता है।

ब्रेन और बाकी जरूरी अंगों को ऑक्सीजन प्रदान करता है, जिससे पेशेंट को पूरी तरह से ठीक होने का बेहतर मौका मिलता है।

हेल्थ रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगर कार्डियक अरेस्ट के पहले दो मिनट के अंदर CPR दिया जाता है, तो बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

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