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रायपुर का विकास 800 साल पहले से हो चुका था शुरू, दक्षिणी भाग में राजा हाजीराज के बेटे ने बूढ़ातालाब , महामाया मंदिर और महाराज बंध के मध्य किला बनवाया था

रायपुर/ ऐतिहासिक और पुरातत्व दृष्टि से रायपुर का इतिहास हज़ारों वर्ष पुराना है। कलचुरी वंश में जब विभाजन हुआ रायपुर 14 वीं शताब्दी के अंत में रायपुर की स्थापना हुई। शुरूआत में इसकी राजधानी खल्लारी थी।

 ऐतिहासिक और पुरातत्व दृष्टि से रायपुर का इतिहास हज़ारों वर्ष पुराना है। कलचुरी वंश में जब विभाजन हुआ, तब 14 वीं शताब्दी के अंत में रायपुर की स्थापना हुई। शुरूआत में इसकी राजधानी खल्लारी थी। इतिहासकार आचार्य महेन्द्रनाथ मिश्रा ने बताया, राजा हाजीराज ने दक्षिणी भाग में हाटकेश्वर मंदिर और किला बनाया। खारुन नदी जिसे पहले राठिका नदी के नाम से जाना जाता था। उनके बेटे ने शहर के विकास के लिए बूढ़ातालाब , महामाया मंदिर और महाराज बंध के मध्य किला बनवाया। इसका प्रमाण 1402 के शिलालेख से हुआ है। इसके आधार पर यह कह सकते हैं कि रायपुर का विकास 800 साल पहले शुरू हो गया था। उस समय बस्ती का नाम ब्रह्मपुरी रखा गया।

किले की खासियत

 मिश्रा के अनुसार खारुन नदी के पास स्थित किला सफलिस पत्थर से बना हुआ था। दरवाजा चरों तरफ की खिड़की आकर्षक थी। बूढ़ातालाब में बने राजघाट किले में मिले पत्थर के लेख में रायपुर के इतिहास के बारे में जानकारी मिली है। कलचुरी वंश के बाद नागपुर भोसला वंश ने राज किया। इसके बाद अंग्रेजों ने सं 1818 से 1830 तक रायपुर में नई व्यवस्था लागु की।

पुरानीबस्ती इलाके में रहते थे राजमहल के अधिकारी

मिश्रा के मुताबिक राजमहल के अधिकारी पुरानी बस्ती इलाके में रहते थे। जिसे उस समय ब्रह्मपुरी के नाम से जाना जाता था। वह के लोगो के समाज के अनुसार बस्ती का नाम रखा गया। इसमें बनिया , ठाकुर सोनकर , सोनार ,धोबी समेत अन्य बस्ती का विकास हुआ। जब अंग्रेज आये तपोह और बस्ती जुड़ गई। इनमे राममुण्डा , नयापारा , आमापारा , गोलबाज़ार , हलवाई लाइन शामिल हैं।

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