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50 की उम्र में ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीत कर मॉडल गीता जे कहा "उम्र कोई पिंजरा नहीं", ब्रांड ने मॉडल बनाने से किया इनकार तो खुद लॉन्जरी पहन की मॉडलिंग

नई दिल्ली/ क्यों विज्ञापनों में भी केवल युवा मॉडल्स को दिखाया जाता है, भले ही वह प्रोडक्ट हर उम्र की महिला के लिए बना हो। विज्ञापन कंपनियों का फोकस उम्रदराज महिलाओं पर भी हो और उन्हें उम्र को लेकर रिजेक्शन ना झेलना पड़े, इस पर मुंबई की रहने वालीं फैशन मॉडल गीता जे आवाज उठा रही हैं।

उन्होंने 50 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की और विज्ञापन की दुनिया में कदम रखते ही उम्र से जुड़े भेदभाव का सामना किया। तब उन्होंने 'ऐज नॉट केज’ नाम से कैंपेन शुरू किया। यानी ‘उम्र कोई पिंजरा नहीं’। इस कैंपेन में उन्होंने लॉन्जरी ब्रांड्स से रिक्वेस्ट की है कि वे अपने विज्ञापनों में हर उम्र की मॉडल्स को शामिल करें। यही वजह थी कि उन्होंने लॉन्जरी में फोटोशूट भी कराया।

 53 साल की फैशन मॉडल, एक्टिविस्ट और बिजनेसवुमन गीता जे की कहानी:

  • प्री प्राइमरी टीचर से बनी फैशन मॉडल

मैं बचपन से मॉडल बनना चाहती थी। लेकिन उस वक्त मैं किसी से अपने मन की बात शेयर नहीं कर सकी, क्योंकि मैं जिस माहौल से आती हूं, उसमें मॉडलिंग के करियर को ठीक नहीं समझा जाता था। दिल में अपने सपने को दबाए मैंने कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और कुछ साल चार्टर्ड अकाउंटेंट की कंपनी में नौकरी तक की।

मुझे बच्चे बहुत पसंद है इसलिए मैंने ‘अर्ली चाइल्डहुड और केयर एजुकेशन’ का कोर्स भी किया। कुछ दिनों के बाद ऑफिस की नौकरी को छोड़कर एक स्कूल में प्री प्राइमरी टीचर बन गई। बच्चों के साथ मैं भी बच्ची बन जाती और वक्त कब बीत जाता पता ही नहीं चलता था।

एक दिन मैंने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट का विज्ञापन देखा जिसमें हर उम्र की महिला भाग ले सकती थीं। उस विज्ञापन ने मेरे दिल में दबे सभी अरमानों को फिर जगा दिया और मैंने फॉर्म भर दिया।

50 साल की उम्र में मैंने इंडिया ब्रेनी ब्यूटी 2019 में हिस्सा लिया और मैं फर्स्ट रनर अप रही। जब मुझे यह टाइटल मिला तो मैं खुशी से झूम उठी। दिल को बहुत सुकून भी मिला। सोचा, ‘चलो मॉडलिंग के रास्ते तो खुले।’

इसके बाद मैंने इंस्टाग्राम पर अपना प्रोफाइल बनाया और अपने कई फोटोशूट करवाए ।

गीता जे इंडिया ब्रेनी ब्यूटी 2019 में फर्स्ट रनर अप रहीं

गीता जे इंडिया ब्रेनी ब्यूटी 2019 में फर्स्ट रनर अप रहीं

  • उम्र को लेकर भेदभाव झेला

मॉडलिंग का करियर जितना आसान लग रहा था, उतना है नहीं। चूंकि मैं 50 साल की थी, इसलिए मुझे कई बार उम्र को लेकर भेदभाव झेलना पड़ा।

कभी-कभी ऐसा होता था कि कोई प्रोजेक्ट आता तो सबसे पहले कंपनी वाले मेरी उम्र पूछते और कहते कि हम आपकी उम्र वाली मॉडल को मॉडर्न ड्रेस पहनाकर फोटोशूट नहीं कर सकते।

लॉन्जरी ब्रांड ने किया रिजेक्ट

मेरे पास एक लॉन्जरी ब्रांड भी आया। उन्होंने भी मेरी उम्र पूछी तो कहा कि हम फैंसी लॉन्जरी के लिए युवा मॉडल ढूंढ रहे हैं। जब आपकी उम्र की महिलाओं के लायक कॉटन के अंडरगार्मेंट्स बनाएंगे, तब हम आपको बुलाएंगे। उनके कहे ये शब्द मेरे दिलों-दिमाग पर छप गए।

मुझे यह सुनकर दुख भी हुआ कि आखिर मुझसे ऐसा क्यों कहा गया? क्यों लॉन्जरी को मेरी उम्र से जोड़ा गया? अच्छा कपड़ा पहनना, चाहे वह ड्रेस हो या लॉन्जरी हर महिला का हक है। इसमें उम्र का दखल कहां है?

उस समय मेरे पास 2 ऑप्शन थे। एक तरीका था कि मैं उनकी बात मान जाती। दिल को भी समझा देती कि ये लोग सही कह रहे हैं।

दूसरा ऑप्शन था उम्र को लेकर होने वाले भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाऊं और अपने मन का कर जाऊं। मैंने दूसरा ऑप्शन चुना क्योंकि ज्यादातर ब्रांड हकीकत को नहीं दिखा रहे। जबकि सच यही है कि लॉन्जरी हर उम्र की महिला पहनती है। चाहे कोई भी उम्र हो सब महिलाओं को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है। मुझे लोगों को हकीकत बतानी थी।

‘ऐज नॉट केज’ कैंपेन शुरू करने से पहले की रिसर्च

उम्र कोई पिंजरा नहीं इस सोच पर काम करने से पहले मैंने अपनी रिसर्च शुरू की। मैंने कई लॉन्जरी की वेबसाइट्स देखीं लेकिन कहीं पर भी हर उम्र की मॉडल्स का रीप्रेजेंटेशन नहीं दिखा। उसी दौरान मुझे ब्राजील की 79 उम्र की लॉन्जरी मॉडल हेलेना शार्गल के बारे में पता चला

उन्होंने मुझे प्रेरित किया और मुझे एहसास हुआ कि इस मुद्दे के खिलाफ अब बोलने की बारी आ गई है। इसके बाद मैंने 2021 में ‘ऐज नॉट केट’ कैंपेन की शुरुआत की। इसी कैंपेन के लिए मैंने पहली बार लॉन्जरी शूट करवाया।

  • ब्राजील की 79 उम्र की लॉन्जरी मॉडल हेलेना शार्गल
  • इसलिए लॉन्जरी पर ही किया फोकस

साड़ी, सूट, जींस सब महिलाएं नहीं पहनतीं लेकिन लॉन्जरी हर उम्र की महिला पहनती है। फिर हर उम्र की मॉडल इसे रिप्रेजेंट क्यों नहीं करती?

मुझे यह जरूरत महसूस हुई कि अगर लॉन्जरी में मैच्योर मॉडल्स दिखेंगी तो दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए भी उनके दरवाजे खुलेंगे।

इससे भारत में एक नई शुरुआत होगी इसलिए मैंने लॉन्जरी पर ही फोकस किया।

मीडिया ने उम्रदराज महिला को गलत तरीके से पेश किया

इंडियन सोसाइटी में उम्र एक बड़ा मुद्दा है। जो मीडिया और ब्रांड्स ने दिखाया समाज ने उसे मान लिया। दूरदर्शन में आने वाले विज्ञापन हो, पुरानी मैगजीन हो या अखबारों में छपने वाले विज्ञापन, सभी में उम्रदराज मॉडल को बहुत कम दिखाया जाता है।

वहीं, हमारा समाज पुरुष प्रधान रहा है। महिलाओं को घर तक सीमित रखकर देखा गया और उम्र बढ़ने के साथ उनके शरीर को आकर्षक नहीं समझा गया। समाज में धारणा बन गई कि अगर महिला उम्रदराज है तो वह किसी काम की नहीं, उसके पास कोई नई सोच नहीं, वो कुछ नया नहीं कर सकती लेकिन ऐसा सोचना गलत है क्योंकि महिला का उम्र के साथ आया अनुभव उसे कामयाब बना सकता है।

  • समाज पुरुष को बढ़ती उम्र के बावजूद नजरअंदाज नहीं करता, फिर स्त्री को क्यों नाकारा जाता है?

एक कहावत भी बरसों से चली आ रही है ‘बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम।' इस कहावत में जानवर को फीमेल बताया गया है। कहने वालों ने उसे घोड़ा क्यों नहीं कहा? अपने समाज में औरतों को उम्र के आधार पर भेदभाव का सामना ज्यादा करना पड़ता है। पुरुष जो बोलते हैं, उसका समाज पर गहरा असर पड़ता है और वही परंपरा बन जाती है।

  • ट्रोलिंग और लोगों के कमेंट से हुई परेशान

मॉडलिंग के शुरुआती दिनों में मैं इंस्टाग्राम पर वेस्टर्न ड्रेसेज में फोटो डालती। जब कैंपेन शुरू किया तब लोगों को मेरी उम्र पता चली। ‘ऐज नॉट केज’ कैंपेन के तहत ही मैंने पहली बार सोशल मीडिया पर लॉन्जरी पहन अपनी पोस्ट शेयर की।

शुरुआत में मुझे लोग जब ट्रोल करते तो मैं परेशान हो जाती। नेगेटिव कमेंट्स देखकर मैं अपना फोन तक बंद कर देती।

मैंने एक फोटो पोस्ट की थी जिसमें मैंने थाई हाई स्लिट की ड्रेस पहनी हुई थी। उस पोस्ट पर किसी ने कमेंट किया कि ‘आपकी उम्र पर ये ड्रेस नहीं जंचती’ इस पर मैंने जवाब भी दिया।

लेकिन अब मुझे ये चीजें परेशान नहीं करती। लोगों के नेगेटिव कमेंट भी अब नहीं आते क्योंकि उन्हें समझ आने लगा है कि बढ़ती उम्र एक सामाजिक मुद्दा है और इसके लिए आवाज उठाना जरूरी है।

वुमंस डे पर शुरू किया लॉन्जरी का बिजनेस

8 मार्च 2022 को इंटरनेशनल वुमंस डे पर मैंने 'ऐज नॉट केज' कैंपेन के तहत अपना लॉन्जरी ब्रांड लॉन्च किया। मेरे प्रोडक्ट ‘ऐज न्यूट्रल’ है यानी उम्र की सीमा से परे हैं। चूंकि बिजनेस मेरे लिए नया है और मुझे इस फील्ड में कोई एक्सपीरिएंस नहीं है। मैं हर दिन नई चीज सीख रही हूं।

बिजनेस करना आसान नहीं है और मेरे लिए सबसे मुश्किल है फाइनेंस जुटाना। मुझे विश्वास है कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन मैं बिजनेस करना सीख जाऊंगी क्योंकि मैं खूब मेहनत कर रही हूं।

गीता जे फिट रहने के लिए हफ्ते के 6 दिन वर्कआउट करती हैं जिसमें जिम और योग शामिल है।

कई महिलाएं मुझसे प्रभावित हुईं

मेरे पास कई महिलाओं के मैसेज आते हैं जो मुझसे प्रेरित हुई हैं। एक 40 साल की महिला ने मुझे मैसेज भेजा कि वह स्विमिंग करती हैं लेकिन हमेशा सोचती हैं कि वह बिकनी कैसे पहनें क्योंकि उन्हें बिकनी पहनने में शर्म आती थी। जब उन्होंने मेरी तस्वीरें देखीं तो उन्हें हिम्मत मिली और उन्होंने अपने लिए बिकनी खरीदी।


इसी तरह जिस ब्यूटी कॉम्पिटिशन में मैंने भाग लिया था, उसी में 2020 में मैं जज बनी। वहां एक लेडी आई और मुझे गले लगाकर कहा कि वह मेरी कहानी पढ़ने के बाद घर से बाहर निकलने का सोच पाई हैं।

एक और महिला ने मुझे देखकर 50 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की। जब मैं ऐसे मैसेज पढ़ती हूं तो मुझे खुशी मिलती है कि मैं अपनी जैसी महिलाओं की हिम्मत बढ़ा रही हूं। वह जागरूक हो रही हैं और अपने सपनों को पूरा कर रही हैं क्योंकि महिलाएं अपने सपनों को हमेशा परिवार से पीछे रखती हैं।

मुझे पता था कि मैं गलत नहीं कर रही

जब मैंने उम्र को लेकर भेदभाव का मुद्दा उठाया तो मुझे दोस्तों और अपने आसपास के लोगों का सपोर्ट मिला और उन्होंने मेरी खूब तारीफ भी की। किसी ने नहीं कहा कि मैं गलत कर रही हूं।

मैंने हमेशा अपने मनपसंद कपड़े पहने हैं। मुझे स्टाइलिश और ट्रेंडी ड्रेसेज पहनना पसंद है।

जब मैंने पहली बार लॉन्जरी शूट किया तो मैं थोड़ी नर्वस थी लेकिन मुझे खुद पर यकीन था और जानती थी कि मैं जो कर रही हूं, ठीक कर रही हूं।

मैं लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही हूं कि उम्र को बहाना मत बनाएं। उम्र हो गई है तो अब ये नहीं कर सकते, ये करना चाहिए, ये नहीं करना चाहिए, ऐसा बिल्कुल मत सोचिए।

लोग क्या कहेंगे यह सोचकर खुद को मत रोकिए। उम्र महज एक नंबर है। उम्र को खुद पर हावी ना होने दें। जिंदगी को अपने तरीके से खुलकर जीएं। ‘कौन क्या सोचता है’ यह सोचने की बजाय यह सोचे कि आप क्या सोचती हैं और क्या चाहती हैं।

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