अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट पूरा हुआ ही नहीं और सिंचाई विभाग के अफसरों ने दो साल पहले ही ठेकेदार को 300 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया, जमा नहीं हुई 7 करोड़ की खनिज रायल्टी
बिलासपुर/ अरपा भैंसाझार पहला ऐसा प्रोजेक्ट होगा जिसमें ठेकेदार को तकरीबन पूरा भुगतान हो चुका है लेकिन अब भी काम बाकी है। इसके दोषी अफसरों को सजा दिए जाने की बजाय रिटायर होने के बाद भी संविदा में रखकर उन्हें अच्छी सेवा का ईनाम दिया जा रहा है।
जिस प्रोजेक्ट में अब भी 44 किलोमीटर की नहर और सर्विस रोड बनना बाकी है उसे प्रोजेक्ट पूरा होना मानते हुए सिंचाई विभाग के अफसरों ने दो साल पहले ही ठेकेदार को 300 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। यही नहीं अब प्रोजेक्ट में खनिज विभाग को रायल्टी जमा नहीं करने की बात भी सामने आ रही है। जिस प्रोजेक्ट से किसानों के खेतों को पानी मिलता वह अब भी ठेकेदार की मनमानी का शिकार है। बताया जा रहा है कि बेहिसाब प्रोजेक्ट में लगे पत्थर,मुरुम और मिट्टी की रायल्टी ही ठेकेदार ने खनिज विभाग को नहीं जमा की है जबकि इसकी कीमत भी तकरीबन छह से सात करोड़ रुपए बताई जा रही है।
अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट में ज्यादातर गड़बड़ियां पूर्व कार्यपालन अभियंता आरएस नायडू और अशोक तिवारी के कार्यकाल में होने की बात कही जा रही है। हद तो ये है कि जांच व कार्रवाई की बजाय इन्हें उपकृत किया जा रहा है। वर्तमान में नायडू प्रभारी अधीक्षण अभियंता हैं जबकि रिटायर हो चुके कार्यपालन अभियंता तिवारी को संविदा में लेने की तैयारी है।
- बगैर काम पूरा हुए पूरे भुगतान का अनोखा मामला
दरअसल यह पहला एग्रीमेंट था जिसमें सिंचाई शुरू होने के बाद ही पूरा भुगतान होना था। प्रोजेक्ट का आधार ही 25 हजार एकड़ में सिंचाई करने का था। वर्तमान में विभाग के अफसर 12 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का दावा करते हैं लेकिन हकीकत इससे भी कोसों दूर है। नहर बनने का काम अधूरा, सर्विस रोड तक नहीं बनी है। प्रोजेक्ट अधूरा होने की वजह से किसानों को फायदा नहीं हो रहा है।
- दस्तावेजों में पहले ही बन चुकी है नहरें
जिस वक्त ठेकेदार सुनील अग्रवाल को 300 करोड़ का भुगतान किया गया उस वक्त कोटा डिवीजन के ईई अशोक तिवारी थे, जो वर्तमान में रिटायर हो चुके हैं। नहरें अभी बनी नहीं है और भुगतान हो गया है। तब क्या नहरें पहले ही दस्तावेजों में बन चुकी है। या फिर यह अंदाजा लगाया जाए कि बची राशि 2 करोड़ रुपए में 44 किमी की नहरें, सर्विस रोड और नहरों में माइलस्टोन लगाने का काम पूरा हो जाएगा।
- अफसर ने 2 साल पहले ही कहा था काम पूरा हो गया
तत्कालीन कार्यपालन अभियंता अशोक तिवारी ने दो साल पहले ही भुगतान किए जाने की बात सार्वजनिक होने पर यह स्वीकार किया था कि प्रोजेक्ट का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। तब अभी काम कैसे अधूरा है। दरअसल कार्यपालन अभियंता आरएस नायडू और अशोक तिवारी के कार्यकाल में ठेकेदार को पूरी मनमानी करने की छूट मिली थी।
नायडू प्रभारी अधीक्षण अभियंता के पद पर पदस्थ, तिवारी को संविदा की तैयारी
2014 में हुई थी पाैने दाे कराेड़ की रायल्टी चाेरी
वर्ष 2014 में रायल्टी चोरी का मामला सामने आया था जिसमें तत्कालीन कलेक्टर से कम रायल्टी कटौती की शिकायत की गई थी। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के 25 अनुबंधों की जांच हुई और उसके बाद तत्कालीन सहायक ग्रेड तीन को दोषी पाया गया था और उसे निलंबित कर दिया गया था। पौने दो करोड़ रायल्टी चोरी के मामले में आगे क्या हुआ अधिकारी नहीं बता पा रहे हैं।
रतनपुर-कोटा रोड में भी वहीं हुआ
एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से लोरमी से रतनपुर बनी सड़क में रतनपुर कोटा मार्ग पर पहाड़ों से मुरुम खुदाई का मामला सामने आया था जिसमें कांट्रेक्टर ने पहाड़ से कई टन मुरुम खोदकर उसे सड़क मार्ग में उपयोग में लाया था। मामले की खबर पाकर तत्कालीन कोटा एसडीएम दिलेराम डाहिरे ने मामले की जांच कर ठेकेदार को रायल्टी चोरी का दोषी पाया था।

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