भारत के राष्ट्रपति की लग्जिरियस लाइफ देख रह जायेंगे दंग, 14 लिफ्ट व 350 कमरे हैं घर में, 15 एकड़ का बागीचा, रिटायरमेंट के बाद भी स्टाफ रखने के लिए मिलता है 60 हजार महीना, मिसाइल अटैक को भी सह जाने वाली मर्सडीज कार
भारत के प्रथम नागरिक कहे जाने वाले राष्ट्रपति को मिलने वाली सुविधाएं किसी लग्जरी से कम नहीं हैं। दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रपति भवन में रहने के दौरान भारत के राष्ट्रपति को भारतीय सेना की सर्वोच्च यूनिट स्कॉट करती है।
नई दिल्ली में रायसीना हिल पर राजपथ के पश्चिमी किनारे पर स्थित राष्ट्रपति भवन 330 एकड़ में फैला है। यह कितना बड़ा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भवन के गलियारों की कुल लंबाई 2.5 किलोमीटर है। राष्ट्रपति भवन में 9 टेनिस कोर्ट, एक पोलो ग्राउंड, गोल्फ ग्राउंड्स और एक खूबसूरत मुगल गार्डन है।
252 साल पुरानी यूनिट करती है सुरक्षा, छह फीट हाइट वाले ही चुने जाते हैं
प्रेसीडेंट्स बॉडीगार्ड यानी पीबीजी भारतीय सेना की सर्वोच्च यूनिट होती है। इसका प्राथमिक रोल राष्ट्रपति की सुरक्षा करना और हर पल उनके साथ चलना है। यह यूनिट राष्ट्रपति भवन में ही रहती है।
भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेना की सबसे बेस्ट यूनिट लगी रहती है। चूंकि राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का मुखिया भी होता है इसलिए प्रेसीडेंट्स बॉडीगार्ड यानी पीबीजी हर पल उनके साथ रहती है। इसमें सेलेक्ट होने के लिए छह फीट की लंबाई जरूरी है साथ ही सेना से जाट, सिक्ख और राजपूतों को प्राथमिकता दी जाती है।
इस यूनिट में चार ऑफिसर, 11 जूनियर कमीशन ऑफिसर( जेसीओ ) और 161 जवान होते हैं। ये जवान 15 अगस्त और 26 जनवरी व अन्य राष्ट्रीय समारोह मे सभी भारतीय रेजिमेंट मे सबसे आगे खडे होते हैं।
अलग यूनिट के गठन की परंपरा 252 साल पुरानी है। पहली बार 1773 में ऐसी यूनिट बनाई गई जो वायसराय के लिए थी। अंग्रेजों के जाने के बाद यह प्रक्रिया राष्ट्रपति को ट्रांसफर कर दी गई। इस यूनिट में शामिल होने के लिए दो साल की कठिन ट्रेनिंग का हिस्सा बनना पड़ता है। पैरा ट्रूपिंग से लेकर बाकी क्षेत्रों में भी उनकी दक्षता जांची जाती है। इसमें शामिल होने की प्रथा भी पुरानी ही है। घोड़े 50 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से बिना लगाम के दौड़ सकते हैं। इन सैनिकों का हावभाव और चेहरा आदि रौबदार होता है। यही इनकी खासियत है।
इसमें शामिल होने वाला जवान अपने कमांडेंट को अपनी तलवार देता है और उसे छूकर उसे पीबीजी में शामिल करते हैं। इसका अर्थ है कि मेरा हथियार और मेरा जीवन आपके हाथों में है। इस यूनिट के घोड़े ही इसकी खासियत हैं। अंग्रेजों के जमाने से घोड़ों की यह प्रथा जारी है। सैनिकों के दिन की शुरुआत इन घोड़ों के साथ होती है।
भारत को टॉस में मिली सोने की परत चढ़ी बग्घी
भारत के राष्ट्रपति के पास सोने की परत चढ़ी एक बग्घी है जो टॉस में हासिल हुई थी। दरअसल भारत पाक बंटवारे के दौरान सोने की बग्घी किसके पास रहेगी इस पर विवाद बढ़ गया। तय हुआ कि टॉस होगा। सिक्का उछाला गया और भारत टॉस जीत गया। सोने की परत चढ़ी, घोड़े से खींची जाने वाली ये छोटी गाड़ी यानी बग्घी मूल रूप से भारत में ब्रिटिश राज के दौरान वायसराय की थी।
शुरूआत में 330 एकड़ में फैले राष्ट्रपति भवन में घूमने के लिए राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल करते थे। धीरे-धीरे सुरक्षा कारणों से इसका इस्तेमाल कम हो गया।
1984 के बाद राष्ट्रपति बग्घी का इस्तेमाल लगभग खत्म हो गया और इसकी जगह अतिरिक्त सिक्योरिटी कवर वाली कार ने ले ली। करीब दो दशक बाद 2014 में प्रणब मुखर्जी ने बग्घी के इस्तेमाल की परंपरा फिर शुरू की और वह बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इसी बग्घी में पहुंचे थे।
मिसाइल अटैक को भी सह जाने वाली मर्सडीज कार
फिलहाल भारत के प्रेसिडेंट के पास मर्सिडीज- बेंज एस क्लास (S 600) पुलमैन गार्ड है। इस कार पर एके-47 समेत मिलिट्री राइफ शॉट्स, बम और मिसाइल से भी अटैक होता है, तो इसमें पीछे बैठे यात्री को कुछ नहीं होगा। इस कार के टायर पंक्चर होने के बाद भी कई सौ किमी की रफ्तार से चल सकती है।
इस कार में 5.5 लीटर का ट्वीन टर्बो पेट्रोल इंजन है जिसकी बदौलत कैमिकल अटैक भी इस गाड़ी का कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
इस कार में सैटेलाइट सिस्टम और जैमर भी लगा है। इससे कार में चलते हुए राष्ट्रपति किसी से भी सीधे बात कर सकते हैं। इसमें इमरजेंसी फ्रेश एयर सिस्टम मौजूद है। कभी गैस बॉम्ब अटैक हो तो इसके जरिए ऑक्सीजन सप्लाई की जा सकती है। इस कार की कीमत 11 करोड़ रुपए है।
18 सीढ़ियां, 74 बरामदे और 37 फव्वारे 14 लिफ्ट वाला ‘घर’
राष्ट्रपति भवन में 18 सीढ़ियां और 74 बरामदे हैं। साथ ही इस बिल्डिंग में 227 खंभे, 37 फव्वारे और 14 लिफ्ट हैं। राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट के मुताबिक, इस इमारत को बनाने में 70 करोड़ ईंटें और 30 लाख क्यूबिक फीट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।
इस भवन को 23 हजार मजदूरों ने बनाया था। इसे बनाने में 1.4 करोड़ रुपए की लागत आई थी।
राष्ट्रपति भवन 330 एकड़ में फैला है, जिसमें H शेप में बनी राष्ट्रपति भवन की बिल्डिंग 5 एकड़ में फैली है।
इसमें राष्ट्रपति भवन के अलावा राष्ट्रपति गार्डन, ओपन स्पेस, अंगरक्षकों और कर्मचारियों के आवास, अस्तबल और अन्य दफ्तर शामिल हैं।
इस परिसर के पीलर तक काफी सोच समझ कर बनाए गए हैं। यहां के खंभों पर अलग-अलग तरह की घंटियां लगाई गई हैं। अंग्रेजों द्वारा कहा गया कि घंटियां जितना स्थिर रहेंगी सत्ता उतनी ही मजबूत रहेगी।
इन घंटियों को ‘डेली आर्डर’ कहा जाता है। हालांकि जैसे ही अंग्रेजों ने राष्ट्रपति भवन का निर्माण पूरा कर लिया उसके बाद ही उनकी सत्ता कमजोर होने लगी।
2.5 किलोमीटर की गैलरी और 15 एकड़ का बागीचा
भारत का राष्ट्रपति भवन दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्राध्यक्ष आवास है। 350 कमरे और 2.5 किलोमीटर के कॉरिडोर वाले राष्ट्रपति भवन में 15 एकड़ का बगीचा है। इसे पहले मुगल गार्डेन के नाम से जानते थे जिसका नाम बदल कर अब अमृत उद्यान कर दिया गया है।
सर एटविन लुटियंस ने साल 1917 में अमृत उद्यान (मुगल गार्डन) का डिजाइन तैयार किया । हालांकि पौधारोपण 1928-1929 में हो सका था यानी इसका इतिहास 95 साल पुराना है।
अमृत उद्यान में फिलहाल 138 तरह के गुलाब, 10,000 से ज्यादा ट्यूलिप (कंद-पुष्प) और 70 प्रजातियों के लगभग 5,000 मौसमी फूल हैं। सभी फूलों का यूनिक क्यू आर कोड लगा है जिसे स्कैन करने पर सारी जानकारी मिल जाती है।
इस बगीचे में आम इंसान भी जा सकता है जिसका श्रेय भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को दिया जाता है।
राष्ट्रपति भवन के सभी कमरों और हिस्सों का अपना इतिहास है। सभी कमरों के हेरिटेज नेचर को मेंटेन करने के लिए दर्जनों लोगों की टीम केवल कमरे के रख रखाव में लगी रहती है।
फर्नीचर, ग्राफिक्स, आर्ट्स आदि को समय-समय पर रिस्टोर किया जाता है और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों के हिसाब से उन्हें अरेंज किया जाता है। मसलन किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष अगर डिनर पर आते हैं तो कोशिश रहती है कि उस देश से मिले पुराने उपहार वहां दिखाए जाएं।
सांची के बौद्ध स्तूप जैसा दिखने वाला सेंट्रल डोम, तांबे की प्लेट से सुरक्षा
राष्ट्रपति भवन की तस्वीर में दूर से दिखने वाला गुबंद, जिसपर तिरंगा लहराता रहता है, पूरी बिल्डिंग की ऊंचाई से दोगुनी हाइट का है। इसे सेंट्रल डोम भी कहा जाता है। कई जगहों पर उल्लेख है कि यह गुंबद सांची के बौद्ध स्तूप से प्रेरित है।
हालांकि कई जगहों पर इसके रोम के पैन्थियॉन शैली में बनाए जाने का जिक्र हुआ है। गुंबद के चारों ओर तांबे का प्लेट लगा है जिससे यह गहरे रंग का दिखाई देता है। इस गुंबद की विशेषता है कि यह विजय चौक से दिखता है।
सजावट के लिए दो टन का झूमर और 5 वीं सदी की मूर्ति
सेंट्रल डोम के नीचे जो हॉल है उसे दरबार हॉल कहते हैं। यहां घुसते ही किसी राजघराने के मेन इंट्रेंस जैसा फील होता है। 33 मीटर ऊंचे गोलंबर वाले दरबार हॉल में 2 टन का एक झूमर लगा है। यह हॉल सेंट्रल डोम के ठीक नीचे है। यहां भारत की पहली सरकार ने शपथ ली थी।
अब यहां राष्ट्रपति द्वारा सैन्य सम्मान, पद्म पुरस्कार व अन्य पुरस्कार दिये जाते हैं। नई सरकार के शपथ समारोह भी आमतौर पर यहीं आयोजित किए जाते हैं। हॉल की 42 फुट ऊंची दीवारें सफेद मार्बल से सजी हुई है। यहां अंग्रेजों के समय में वायसराय और वायसरीन के बैठने की जगह थी, जहां अब राष्ट्रपति के लिए एक कुर्सी लगी रहती है। पीछे की तरफ पांचवी शताब्दी के गुप्त काल की एक बुद्ध की मूर्ति लगी है।
कॉर्पेट का रंग भी थीम आधारित, स्टडी रूम का रॉयल लुक
राष्ट्रपति भवन का स्टडी रूम रॉयल लुक वाला है। यहां तकरीबन 30 के करीब रॉयल कुर्सियों हैं। यहां लगी कॉर्पेट का रंग बहुत सोच समझ कर रखा गया है। राष्ट्रपति भवन की सेक्रेटरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि कॉर्पेट का रंग और नक्काशी यह बताती है कि कैसे ऊपर की ओर सोच कर काम करना चाहिए। इस रूम का एक हिस्सा मॉर्निंग रूम की तरफ खुलता है जहां राष्ट्रपति अपने डेलीगेट्स से मिलते हैं।
- अशोक हॉल के छत पर अलग किस्म के चमड़े की पेंटिंग
राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल को विदेशी अतिथियों का परिचय जानने और राजकीय भोज के शुरू होने से पहले आने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का परिचय जानने के लिए किया जाता है। रॉयल लुक वाले इस हॉल पर वुडेन फ्लोर है और छत के बीचों बीच चमड़े की एक पेंटिंग बनी है।
छत पर बनी पेंटिंग को फारस के शासक ने स्वयं किंग जॉर्ज IV को दिया था।
जिसमें फारस के शासक फत अली शाह घुड़सवारी कर रहे हैं। इस पेंटिग में वो अपने 22 बच्चों के साथ शिकार कर रहे हैं। इस पेंटिंग की खासियत यह है कि इसे कमरे के अंदर कहीं से भी अगर राजा की आंख में देखा जाए, तो लगता है कि वो आई कॉन्टैक्ट कर रहे हैं।
पेंटिंग, जिसकी लंबाई 5.20 मीटर और चौड़ाई 3.56 मीटर मापी गई है।
104 लोगों को एक साथ खिलाने की व्यवस्था, बत्ती जलाकर दिया जाता है कमांड
राष्ट्रपति भवन में स्थित इस डाइनिंग हॉल में एक साथ 104 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसे बैंक्वेट हॉल भी कहा जाता है और इसी कमरे में भारत के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों की तस्वीरें लगाई गई हैं। यह कमरा 104 फीट लंबा और 34 फीट ऊंचा है। इसकी सिलिंग 35 फीट की है।
यहां से मुगल गार्डेन दिखता है। बैंक्वेट हॉल की दीवारों को बर्मा के टीक तख्तों से सजाया गया है। कमरे में चार झूमर हैं जो डाइनिंग टेबल के ठीक ऊपर लगे हैं।
यहां राष्ट्रपति अपने समकक्षों को राजभोज पर बुलाती हैं। इस हॉल में एक तरफ बैंड गैलरी है। इस गैलरी को पहले म्यूजिशियन गैलरी कहा जाता था और इसे राजभोज के दौरान लाइव संगीत के लिए यूज में लाया जाता है।
राष्ट्रपति भवन के किचन में एग्जीक्यूटिव शेफ के अलावा दर्जनों शेफ, हलवाई और कुक काम करते हैं। एक खास टीम साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान रखती है। राष्ट्रपति और मेहमानों को परोसने से पहले खाने की जांच सुरक्षा एजेंसियाों द्वारा की जाती हैं।
यहां एक खास बात खाना परोसने में भी है। यहां तीन स्पेशल लाइट्स लगी हैं। एक व्यक्ति टेबल के एक तरफ खड़ा होकर इन्हें जलाता-बुझाता है। नीले रंग की लाइट जलने पर हॉल में खाना परोसे जाने का संकेत माना जाता है। हरे रंग की लाइट सर्विस शुरू करने का निर्देश देती है और लाल रंग की लाइट प्लेट उठाने का संकेत देती है।
वेज और नॉनवेज खाने की पहचान के लिए भी अलग तरीका अपनाया जाता है। वेज खाने के सामने लाल गुलाब के छोटे गुलदस्ते रखे जाते हैं।
रिटायरमेंट के बाद भी स्टाफ रखने के लिए मिलता है 60 हजार महीना
देश के राष्ट्रपति को साल 2018 तक 1.5 लाख सैलरी मिलती थी, जिसे बढ़ाकर अब 5 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया है। साथ ही उन्हें ट्रेन, आवास, हवाई और रेल यात्रा, टेलीफोन, सुरक्षा, चिकित्सा, भारतीय वायुसेना के पायलटों के साथ बोइंग 777-300ERs विमान, बीमा जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं। राष्ट्रपति को टैक्स नहीं देना होता। रिटायरमेंट के बाद भारत के राष्ट्रपति को 1.5 लाख महीने पेंशन और आजीवन एक बंगला दिया जाता है। साथ ही उन्हें स्टाफ रखने का 60 हजार खर्च दिया जाता है। संचार के लिए दो फ्री लैंडलाइन और एक मोबाइल देने का भी प्रावधान है।




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