अस्थायी कर्मचारी के नियमितीकरण में घोटालों के सात मामलों में तत्कालीन आयुक्त, ईई, स्कूल की तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य समेत 11 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज
रायगढ़/ 2016 में खरीदी, दुकान आवंटन, नियमितीकरण में घोटालों के सात मामलों में तत्कालीन आयुक्त, ईई, स्कूल की तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य समेत 11 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत के कारण आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने 20 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट चालान पेश किया है। कोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद अफसरों की गिरफ्तारी हो सकती है।
2016 में लगातार गड़बड़ी की शिकायतों के बाद तत्कालीन विधायक रोशनलाल अग्रवाल ने कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर अलरमेल मंगई डी नगर निगम में काम नहीं होने और धांधली से नाराज थीं। इसी बीच आयुक्त प्रमोद शुक्ला का स्थानांतरण हुआ तो वे हाईकोर्ट से स्टे लेकर आ गए। बैठकों में दिए गए निर्देश को हवा में उड़ाने लगे। कलेक्टर मंगई डी ने जांच शुरू करा दी। नजूल अधिकारी एनआर साहू को जांच अधिकारी बनाया।
पूर्व आयुक्त प्रमोद पर 4 अलग-अलग मामले दर्ज: सातों में मामलों में प्रमोद शुक्ला के हस्ताक्षर पाए गए। प्रशासनिक टीम की जांच में बयान में भी ये बातें सामने आईं कि बिना टेंडर के, नियमों की अनदेखी करते हुए खरीदी की गई। नियमितीकरण में मनमानी तरीके से अपात्र लोगों को नियमित कर्मचारी बना दिया गया। नगर निगम के परिसर में बनी दुकानें प्रभावितों को छोड़कर रसूखदार और खर्च करने वालों को दे दी गई। अकाउंटेंट अनिल कुमार वैद्य को भी आरोपी बनाया। कहा गया कि अकाउंटेंट ने नोटशीट की कमियां देखे बगैर, भुगतान की प्रक्रिया पूरी की। इस मामले में 29 मई को प्रमोद शुक्ला की गिरफ्तारी हुई, हालांकि उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। अनिल को 15 मई को गिरफ्तार कर रिहा किया गया।
आरोपों के बाद एफआईआर हुई तो प्रमोद शुक्ला समेत तमाम अफसर और कर्मचारियों ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया और जमानत पर रिहा किया। सीएसपी अभिनव शुक्ला ने बताया कि 20 हजार पन्नों से अधिक की जांच रिपोर्ट, बिल, दस्तावेज चालान में पेश किए गए हैं। आरोपी हाईकोर्ट से जमानत पर हैं, इसलिए अब कोर्ट में सुनवाई पर आरोपी दोषी करार दिए जाते हैं। इसके बाद गिरफ्तार हो सकती है।
इन सात मामलों में हुई थी एफआईआर
बारबेट वायर खरीदी
सीमेंट फेंसिंग पोल
क्लोरीन टैबलेट
कंटेनर खरीदी
कर्मचारियों का नियमितकरण
एसपी ऑफिस के बगल में कॉम्प्लेक्स में दुकान आवंटन
ईडब्ल्यूएस प्रकरण
नियमितीकरण धांधली में म्यूनिसिपल स्कूल की प्रभारी प्राचार्य भी शामिल
अस्थायी कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए एक समिति बनाई गई। प्रमोद शुक्ला ने टीम बनाई थी। इसमें म्यूनिसिपल स्कूल की प्रभारी प्राचार्य अल्जीत कुजूर, इंजीनियर सत्यनारायण अघरिया, गंगादीन सारथी, अनिल वाजपेयी भी थे। बताया जाता है कुछ ऐसे लोग जो पात्र नहीं थे, नियमित कर दिए गए। जांच में खामी पाए जाने पर आयुक्त समेत इन सभी लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।
पूर्व ईई दिनेश पर भी एफआईआर दर्ज: तब ईई रहे दिनेश शर्मा खरीदी के अलग-अलग मामलों में आरोपी बनाए गए हैं। इन मामलों में प्रमोद शुक्ला के साथ सत्यनारायण अघरिया, प्रभा टोप्पो भी आरोपी बनाए गए हैं। सभी अफसरों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उन्हें मुचलके पर छोड़ा जा चुका है।
एसपी ऑफिस के नजदीक बने परिसर में दुकान आवंटन में भी गड़बड़ी सड़क चौड़ीकरण में स्टेशन चौक से सुभाष चौक के बीच दुकानें हटाई गईं। इनके लिए एसपी ऑफिस के नजदीक पुराने डीईओ ऑफिस की जगह पर परिसर बनाया गया था। दुकान आवंटन में इन्हें प्राथमिकता देनी थी, लेकिन आवंटन में धांधली की गई। आरोप लगा कि लेन-देन कर कई अपात्र लोगों को दुकान दे दी गई। इस मामले में लिखा-पढ़ी प्रतुल श्रीवास्तव द्वारा की गई थी। राजस्व निरीक्षक हरिकेश्वर लकड़ा ने तब जांच समिति को बताया था कि उनसे दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे। इस मामल में भी आयुक्त के साथ प्रतुल और हरिकेश्वर पर धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया गया है।

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