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बर्फ वाला पानी पीने में जितना ठंडक देता है, उतना ही है नुकसानदायक

गर्मी के दिनों में घर से बाहर निकलते ही तेज प्यास लगती है। इस प्यास को बुझाने के लिए हम कभी ठेले पर मिलने वाले गन्ने का रस पीते हैं, तो कभी जूस, तो कभी नींबू सोडा। इन सबमें एक चीज कॉमन होती है- बर्फ।

इस मौसम में घर पर भी बर्फ डालकर पानी पीना और दूध वाली चाय की जगह आइस टी और कोल्ड कॉफी पीना नॉर्मल है।

बर्फ वाला पानी 

सर्दी-जुकाम के साथ बर्फ हमें किस तरह नुकसान पहुंचाता है। क्या घर की फ्रिज में जमा बर्फ भी हेल्थ के लिए हानिकार है…

एक्सपर्ट

डॉ. पी वेंकट कृष्णन, इंटरनल मेडिसिन, आर्टिमिस हॉस्पिटल, गुड़गांव

डॉ. साई प्रवीण हरनाथ, पल्मोलाजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, हैदराबाद

सवाल: बर्फ का पानी पीना चाहिए या नहीं?

जवाब: बर्फ का पानी पीने से बचना चाहिए। आपको पानी हमेशा कमरे के तापमान के हिसाब से ही पीना चाहिए। इसका मतलब न ज्यादा ठंडा पानी पीना सही न ही ज्यादा गर्म।

सवाल: तेज गर्मी में बाहर से आकर बर्फ डालकर कोल्ड कॉफी, जूस या पानी पीने से क्या नुकसान होता है?

जवाब: जब हम तेज धूप से आकर सीधे बर्फ वाला पानी पीते हैं, तब यह पानी शरीर के टेम्परेचर से मेल नहीं खाता। इससे शरीर का टेम्परेचर बिगड़ जाता है। जिससे हम बीमार पड़ने लगते हैं। यह हमारे पाचनतंत्र को बिगाड़ देता है।

बर्फ डालकर कुछ खाने-पीने से होने वाली बीमारियों की वजह डिटेल में समझते हैं…

हेपेटाइटिस: बर्फ अगर साफ पानी से नहीं जमाया गया है, पानी गंदा है तो उससे हेपेटाइटिस ए और ई वायरस होने का रिस्क रहता है। कई बार घर की फ्रिज में भी महीनों बर्फ जमकर पड़ा रहता है। वहां भी गंदगी होती है जो हमें बीमार करती है। जॉन्डिस होने के पीछे भी यही कारण है।

माइग्रेन: यह दूसरों के मुकाबले माइग्रेन वालों को ज्यादा तकलीफ दे सकता है। जब आप ठंडा पानी पीते हैं तो यह आपके नाक और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को ब्लॉक कर देता है। जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ा देता है।

गले में खराश: बर्फ वाला पानी पीने से नाक में रेस्पिरेटरी म्यूकोसा बनता है, जो रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की एक प्रोटेक्टिव लेयर होती है। जब यह लेयर जम जाती है तो रेस्पिरेशन यानी सांस लेने में समस्या होती है। रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट कई संक्रमणों की चपेट में आ जाता है, जिससे गले में खराश होती है।

सवाल: कोई तो ऐसा समय होगा जब बर्फ वाला पानी पी सकते हैं?

जवाब: नहीं किसी भी समय इसे पीने की सलाह मेडिकली नहीं दी जा सकती। यह हर वक्त नुकसानदायक है।

सवाल: बर्फ वाला पानी पीने से कौन सी परेशानियां हो सकती हैं?

जवाब: इसकी डिटेल हम नीचे दे रहे हैं…

बॉडी हाइड्रेट नहीं रहती: बर्फ का पानी ठीक तरह से बॉडी को हाइड्रेट नहीं कर पाता है। कभी भी खाने के तुरंत बाद बर्फ वाला पानी पीने से बचना चाहिए। यह शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

न्यूट्रिएंट्स का नुकसान: आमतौर से बॉडी टेम्प्रेचर 37 डिग्री तक होता है। जब आप बर्फ का पानी पीते हैं तो शरीर को टेम्प्रेचर मेंटेन करने के लिए बहुत सारी एनर्जी खर्च करनी पड़ती है। जो एनर्जी डाइजेशन या न्यूट्रिएंट्स को ऑब्जर्व करने के लिए इस्तेमाल होती है।

वह बर्फ का पानी पचाने में लग जाती हैं। इसकी वजह से शरीर में न्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है।

मोटापा: हर वक्त बर्फ वाला पानी पीने से शरीर में मौजूद फैट आसानी से बर्न नहीं हो पाता है। इसकी वजह यह है कि ठंडा पानी फैट को सख्त बना देता है। जिसकी वजह से वजन कम करने में परेशानी होती है।

कम होती है प्यास: पानी जब बहुत ठंडा होता है तो थोड़े से पानी से ही आपको ऐसा महसूस होगा, जैसे बहुत ज्यादा पानी पी लिया हो। यह आपकी प्यास पर कंट्रोल लगा देता है।

इससे आपके शरीर में पानी की मात्रा भी कम होती है। डॉक्टर की मानें तो हमे हमेशा 20 से 22 डिग्री टेम्प्रेचर वाला पानी ही पीना चाहिए।

सवाल: घर की फ्रिज में जमा बर्फ भी क्या नुकसान करती है?

जवाब: दरअसल बर्फ जमाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी बहुत महत्व रखता है। घर पर आप इसे आरओ वॉटर या फिल्टर के पानी से जमाते हैं। इस वजह से वो उतना नुकसान नहीं पहुंचाता। इसके बावजूद इसे पीने से बचें और कभी-कभी पी भी रहे हैं तो बर्फ के ट्रे और फ्रीजर को साफ रखें।

सवाल: बाहर से जो बर्फ खरीदकर लाते हैं, उससे क्या नुकसान है?

जवाब: बाहर जो बर्फ मिलती है वो आर्टिफिशियल होती है। उसे जमाने का तरीका हाइजीनिक नहीं है। इसमें कैमिकल यूज होता है, देर तक जमाकर रखने के लिए।

अगर बर्फ को जमाने के लिए ज्यादा कार्बन मोनो डाइऑक्साइड यूज करते हैं तो वो पाचन को खराब करता है।

ज्यादा बर्फ का पानी आप पीते हैं तो उससे कार्बन मोनोऑक्साइड के मोलेक्यूल्स पेट में चले जाते हैं तो लंग्स भी खराब होता है।

फूड रेगुलेटर अथॉरिटी की एक रिपोर्ट भी इस बारे में है, जो बताती है कि खाने-पीने की चीजों को ठंडा करने वाला बर्फ खतरनाक है। वहीं, सड़क किनारे बर्फ के गोले से लेकर जूस तक में फैक्ट्री में बनी बर्फ का ही इस्तेमाल किया जाता है।

सवाल: बाजार में मिलने वाला बर्फ यानी आर्टिफिशियल बर्फ कैसे जमता है?

जवाब:

बर्फ बनाने के लिए एक फैक्ट्री में Ice Cans रखे जाते हैं।

इन Ice Cans में अमोनिया गैस भरी जाती है।

टैंक में गैस आने के बाद वो लिक्विड बनती है।

Cooling Coil की मदद से गैस वाष्प में बदल जाती है।

टैंक में पहले से ही 30% तक नमक मौजूद रहता है।

टैंक में ह्यूमिडिटी यानी आद्रता के टेम्परेचर को 15 F तक लाया जाता है।

अब फाइनली इसमें पानी भर दिया जाता है।

पानी की हाई फ्रीजिंग क्षमता 30 F होने पर यह बर्फ बन जाती है।

बर्फ बनने में लगभग 18 घंटे लगते हैं।

पानी की किल्लत वाली बहुत सी जगहों पर बर्फ बनाने के लिए गंदे पानी और कैमिकल का यूज किया जाता है। इससे पेट संबंधी बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल: कुछ लोगों को बर्फ खाने की भी आदत होती है, इससे हेल्थ को क्या नुकसान होता है?

जवाब: बर्फ खाने से एनीमिया कॉम्प्लिकेशन और कई डायट्री प्रॉब्लम भी होने लगती हैं।

इससे दांत के एनेमल को नुकसान पहुंचता है और दांत टूटने लगते हैं। मुंह की कई समस्याएं जैसे सेंसिटिविटी और दर्द भी होने लगता है।

बर्फ खाने से धमनियों पर असर पड़ता है और वो सिकुड़ जाती हैं। जो हेल्थ के लिए डेंजरस है।

बर्फ खाने से इम्यून सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। जिसकी वजह से सर्दी और जुकाम जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।

बर्फ खाने से मल सख्त होता है जिससे बवासीर या फिर आंतों में घाव यानी अल्सर की प्रॉब्लम हो सकती है।

सवाल: बर्फ खाने की इच्छा लोगों को क्यों होती है?

जवाब: इसके कुछ कारण नीचे बता रहे हैं …

एनिमिया: आयरन की कमी की वजह से लोग बर्फ खाते हैं। ऐसे लोगों में खून की कमी होती है जिसे एनीमिया कहते हैं। इस बीमारी में RBC यानी लाल रक्त कोशिकाओं का लेवल कम हो जाता है। यह ऑक्सीजन शरीर को मिले इसके लिए जरूरी है। आयरन की कमी इन कोशिकाओं का स्तर कम कर देती है। जिसकी वजह से बर्फ खाने की इच्छा बढ़ जाती है।

प्रेग्नेंसी और पीरियड: इस दोनों ही कंडीशन में महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी होती है। इसलिए वो बर्फ खाती हैं।

पोषक तत्वों की कमी: इस वजह से भी बर्फ खाने की इच्छा बढ़ती है। इस कंडीशन में पेशेंट को बर्फ का गोला, बर्फ वाले शरबत या कोल्ड पीने की इच्छा होती हैं।

हम पानी क्यों पीते हैं? इसे कितना पीना चाहिए?

डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक रखने और इम्युनिटी को स्ट्रॉन्ग रखने के लिए हम पानी पीते हैं। यह बॉडी को हाइड्रेट करता है। इसके बावजूद अगर हम ज्यादा पानी पीते हैं तब पेट फूल जाता है। इससे पाचन बिगड़ जाता है। इसलिए इंसान को अपने शरीर की जरूरत के हिसाब से ही पानी पीना चाहिए।

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