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आंखों को डार्क सर्कल से दूर रखने के लिए आज से ही मलना बंद करें, आँखों को अधिक मलने से कई प्रकार के संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है

अक्सर हम सभी अपनी आंखों को रगड़ते रहते हैं। हल्की-सी खुजलाहट या नींद महसूस हुई तो आंखों को रगड़ लिया। किसी संक्रमण से दिक़क़्त होने पर या उलझन होने पर भी आंखों को हम मसल लेते हैं। अगर सर्दी-ज़ुकाम या थकावट है तो आंखों को रगड़ने में और आनंद महसूस होता है। कई लोगों के लिए आंखों को रगड़ना आदत बन जाती है। आंखें नाज़ुक और संवेदनशील होती हैं, इसलिए अगर उन्हें बहुत ज़ोर से या ज़्यादा मसला या रगड़ा तो आप उन्हें चोटिल कर सकते हैं।

  • आंखों को रगड़ने से होंगे ये नुक़सान...

विशेषज्ञ कहते हैं कि दिन में एक या दो बार आंखों को मलना या रगड़ना सामान्य बात होती है। लोग ऐसा तब करते हैं जब वे जागते हैं या थकान महसूस करते हैं। लेकिन आंखों को बार-बार रगड़ने से पलकों और आंखों के कोनों में कोलेजन बॉन्ड ढीले हो सकते हैं। आईबैग झूल सकते हैं। आंखों के चारों ओर महीन रेखाएं और झुर्रियां हो सकती हैं।

आंखों को रगड़ने से कॉर्निया पर खरोंचें आ सकती हैं। ये खरोंचे इतनी बारीक और छोटी होती हैं कि आपको पता भी नहीं चलेगा। ये खरोंचें समय के साथ कॉर्निया को नुक़सान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा आंखों को रगड़ने से कॉर्निया पतला भी हो सकता है।

आंखों को रगड़ने के कारण होने वाली क्षति के साथ-साथ हाथों से आंखों में छोटे-छोटे कण भी जा सकते हैं। इससे आंखों में जलन हो सकती है जो काफ़ी गंभीर भी हो सकती है। हमारे हाथ दिनभर कहीं न कहीं छूते रहते हैं। ऐसे में गर इन हाथों को धोए बिना आंखों पर लगाएंगे तो संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है।

जब बच्चे अपनी आंखें रगड़ते हैं तो उनकी आंखों में कॉर्निया के उभरने का जोखिम रहता है। इससे नज़रें कमज़ोर हो सकती हैं, कॉर्निया पर निशान पड़ सकते हैं और स्थिति गंभीर हुई तो कॉर्निया ट्रांसप्लांटेशन की ज़रूरत पड़ सकती है।

आंखों में पतली रक्त वाहिकाएं होती हैं जो बहुत नाज़ुक और मुलायम होती हैं। इन धमनियों का काम रक्त संचार को बनाए रखना होता है। जब हम आंखों को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ते हैं तो इन नाज़ुक धमनियों को नुक़सान पहुंच सकता है या टूट सकती हैं, जिसके चलते आंखों से ख़ून निकलने की स्थिति बन सकती है। धमनियों के टूटने को सबकंजक्टिवा हैमरेज कहते हैं।

आंखों को बार-बार और देर तक रगड़ने से डार्क सर्कल भी हो सकते हैं। दरअसल, आंखों के आसपास की त्वचा पतली होती है। अगर ज़ोर से रगड़ेंगे तो नुक़सान तो पहुंचेगा ही। इसलिए आंखों को रगड़ने से इनके चारों तरफ़ की त्वचा काली पड़ जाती है।

ऐसे बचाएं आंखों को...
  • आंखों में रोज़ ड्रॉप डालें। इससे आंखों का कचरा निकल जाएगा। आंखों में सूखापन और तनाव के कारण भी आंखों में खुजली होती है। पर आई ड्रॉप चिकित्सक की सलाह से ही लें।
  • अगर आंखों में किरकिरापन महसूस हो रहा है तो हाथों का उपयोग करने के बजाय पानी से इन्हें धोएं। परंतु पहले हाथों को अच्छी तरह से धोएं, फिर आंखों में पानी डालें।
  • टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण भी आंखों में सूखापन आ सकता है या उलझन हो सकती है। ऐसे में आंखों को मसलने से भले आराम मिलेगा लेकिन ऐसा करने से ख़ुद को रोकें।
  • किसी कपड़े और टिशू पेपर से भी आंखों को साफ़ न करें। ख़ासतौर गीला चेहरा पोंछते वक़्त आंखों का ख़याल रखें।
  • अगर कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं तो हाथों को आंखों पर बिल्कुल न लगाएं। आंखें मलने पर कॉन्टैक्ट लेंस इनको क्षति पहुंचा सकते हैं।

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