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25 लीटर से ज्यादा ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर चुकी विश्वा कुंतल चर्चा में क्यों जानते हैं, मौत से जूझ रहे नवजातों की जान बचाता है यह 'लिक्विड गोल्ड', खरीदना-बेचना अपराध,


नई दिल्ली/ अहमदाबाद में रहने वालीं विश्वा कुंतल इन दिनों चर्चा में हैं। फरवरी से अब तक वह ‘ब्रेस्ट मिल्क बैंक’ में 25 लीटर से ज्यादा ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर चुकी हैं। ‘ब्रेस्ट मिल्क बैंक’ यानी ऐसी जगह जहां मां का दूध सुरक्षित रखा जाता है ताकि आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे नवजातों की जान बच सके। समय से पहले जन्मे इन बच्चों की मां के खुद तकलीफ में होने की वजह से वे बच्चों को दूध पिलाने में असमर्थ थीं।

शादी के 10 साल बाद मां बनने वाली विश्वा पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट हैं। प्री-मैच्योर डिलिवरी के बाद उन्हें जुड़वा बच्चे हुए, लेकिन बेटी नहीं बच सकी। बेटे को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। इस दौरान डॉक्टर के कहने पर उन्होंने ब्रेस्ट पंप के जरिए अपने बच्चे को अपना दूध पिलाना शुरू कर दिया। उन्हें ज्यादा दूध आ रहा था, जिसे उन्होंने ‘ब्रेस्ट मिल्क बैंक’ को डोनेट करने का फैसला लिया, ताकि वहां भर्ती दूसरे जरूरतमंद बच्चों को दूध मिल सके।

  • लॉकडाउन में भी ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करती रहीं रूशिना

विश्वा से पहले अहमदाबाद की ही रुशिना डॉक्टर मारफतिया भी 18 लीटर से ज्यादा ब्रेस्ट मिल्क जरूरतमंद बच्चों के लिए डोनेट कर चुकी हैं। सितंबर 2019 में मां बनीं रुशिना बताती हैं, 'मुझे बच्चे की जरूरत से ज्यादा दूध बन रहा था। कई मांएं ऐसी स्थिति में अतिरिक्त दूध को फेंक देती हैं, लेकिन मेरी फैमिली ने ऐसा करने से मना किया।

तब मैंने अर्पण न्यूबॉर्न केयर सेंटर के मिल्क बैंक के बारे में पता लगाया, जहां भर्ती बच्चों को मां के दूध की जरूरत थी। जिसके बाद मैं 10 महीने तक मिल्क डोनेट करती रही। इस बीच लॉकडाउन भी लगा, लेकिन मैंने बैंक तक दूध पहुंचाना बंद नहीं किया। मुझे देखकर दूसरी मांओं ने भी मिल्क डोनेट करने का फैसला लिया।'

जन्म के तुरंत बाद मां का दूध जरूरी, न मिलने से जान जाने का खतरा

ब्लड डोनेशन की तरह मिल्क डोनेशन से भी कई जानें बचाई जा सकती हैं। मां का पहला दूध बच्चे के लिए वैक्सीन का काम करता है, जो उसे कई रोगों से बचाता है। यूनिसेफ के मुताबिक अगर जन्म के 23 घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान नहीं कराया जाता, तो बच्चे की जान जाने का खतरा 33 फीसदी तक बढ़ जाता है। जन्म के 24 घंटे या इससे ज्यादा समय तक मां का दूध न मिले, तो यह खतरा दोगुना हो जाता है।

इसके बावजूद नवजात बच्चों को जन्म के बाद मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। यूनिसेफ के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 4 में से 3 महिलाएं अस्पताल में बच्चों को जन्म देती हैं। फिर भी 5 में से सिर्फ 1 बच्चे को ही जन्म के पहले घंटे में ब्रेस्ट मिल्क मिल पाता है।

कई बार सीजेरियन डिलीवरी की वजह से मांएं अपने बच्चों को तुरंत दूध नहीं पिला पातीं। समय से पहले जन्मे बच्चों के इलाज के दौरान भी उन्हें मां का दूध मिलने में देरी होती है। काफी महिलाओं में डिलीवरी के तुरंत बाद दूध नहीं उतरता, जिससे उनके बच्चे को दूसरे विकल्पों की जरूरत पड़ती है। भारत में हर साल करीब 2.6 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें से 2 करोड़ बच्चों को मां का पर्याप्त दूध नहीं मिल पाता।

अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक अमेरिका में जन्म के बाद 84 फीसदी बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराई जाती है, लेकिन उनमें से सिर्फ 58 फीसदी बच्चों को ही 6 महीने तक मां का दूध मिल पाता है। इसमें भी पूरी तरह से स्तनपान पर निर्भर बच्चों की संख्या महज 25 फीसदी है।

आगे जानें मां का दूध न मिलना बच्चे के लिए जानलेवा क्यों है और कैसे ब्रेस्ट मिल्क बैंक से ऐसे बच्चों की जान बचा सकते हैं।

  • ब्रेस्टमिल्क न मिलना बच्चों के लिए जानलेवा, मां को भी कैंसर का खतरा

यूनिसेफ समेत तमाम संस्थाओं की रिसर्च बताती हैं कि जिन बच्चों को मां का दूध पर्याप्त नहीं मिल पाता, वे ज्यादा बीमार पड़ते हैं। डायरिया और निमोनिया के साथ ही कई गंभीर रोगों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। वे डायबिटीज, ल्यूकेमिया, फूड एलर्जी के शिकार हो सकते हैं। ऐसे बच्चे इन्फेक्शन का जल्दी शिकार होते हैं। वहीं, बच्चों को दूध न पिलाने वाली मांओं को ब्रेस्ट कैंसर, ओवरी कैंसर, मोटापा, डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस और दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

  • आखिर मां का दूध बच्चों के लिए इतना जरूरी क्यों?

वेलमॉम एंटीनेटल सेशन, दिल्ली की डायरेक्टर और लैक्टेशन एक्सपर्ट डॉ. रश्मि बावा बताती हैं कि बच्चे को जैसी जरूरत होती है, मां का शरीर उसी तरह का दूध बनाता है। अगर बच्चे को डायरिया है, तो उस समय मां को ज्यादा पतला दूध उतरता है। ब्रेस्टमिल्क विटामिन, मिनरल्स और कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। डिलीवरी के तुरंत बाद मां में बनने वाले दूध को कोलोस्ट्रम कहते हैं।

गाढ़े पीले रंग के इस दूध में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और एंटीबॉडीज होती हैं। नजवात की जिंदगी के लिए कोलोस्ट्रम बहुत जरूरी है। इसीलिए 6 महीने बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना चाहिए। WHO और 'अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स' के अनुसार इसीलिए कम से कम 2 साल तक बच्चों को स्तनपान कराते रहना चाहिए।

ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ बच्चों के लिए ही फायदेमंद नहीं है, यह मां को भी कई बीमारियों से बचाती है...

मां का दूध न मिलने पर अक्सर बच्चों को गाय-भैंस का दूध या फिर बाजार में बिकने वाला फॉर्मूला मिल्क घोलकर पिलाया जाता है। लेकिन, मिल्क पाउडर के तौर पर मिलने वाला यह दूध बच्चों की जिंदगी खतरे में डाल सकता है।

फॉर्मूला मिल्क नवजात बच्चों के लिए हो सकता है जानलेवा

अहमदाबाद स्थित अर्पण न्यूबॉर्न केयर सेंटर के डायरेक्टर और नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. आशीष मेहता बताते हैं कि डिब्बे वाला फॉर्मूला मिल्क और गाय-भैंस का दूध बच्चे की आंत के लिए अच्छा नहीं है। नवजात को फॉर्मूला मिल्क पिलाने से वह 'नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस' नाम की बीमारी का शिकार हो सकता है।

इस बीमारी में बैक्टीरिया बच्चे की आंत में संक्रमण फैला देते हैं। आंत में छेद होने पर बैक्टीरिया लीक होकर बच्चे के पेट और खून तक पहुंच जाते हैं। यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि इसके शिकार 50 फीसदी नवजात बच्चों की जान चली जाती है।

डॉ. मेहता कहते हैं कि यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि गाय-भैंस का दूध बछड़ों के लिए होता है और ह्यूमन मिल्क नवजात बच्चों के लिए। मां के दूध से मिलने वाली इम्यूनिटी फॉर्मूला मिल्क या गाय-भैंस के दूध से नहीं मिलती। न ही इनमें बच्चों की जिंदगी के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं।

 मिल्क बैंक ही क्यों जरूरी, सीधे किसी दूसरी महिला से स्तनपान क्यों न करवाएं?

बिना जांच के दूसरी मां का दूध सेफ नहीं

डॉ. रश्मि कहती हैं कि हमारी सोसायटी में एक परंपरा सी रही है कि जब किसी बच्चे को मां का दूध नहीं मिलता, तो कोई दूसरी परिचित महिला उसे अपना दूध पिला देती है। लेकिन, मेडिकल साइंस के मुताबिक ऐसा करना सेफ नहीं है।

आमतौर पर डिलीवरी कराने वाले डॉक्टर को यह पता होता है कि कहीं मां बीमार तो नहीं है, वह बच्चे को स्तनपान करा सकती है या नहीं। अगर किसी खास वजह से डॉक्टर ने मना नहीं किया है, तो मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है।

लेकिन, अगर कोई और महिला बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा रही है, तो बिना जांच नहीं बताया जा सकता कि उसके दूध में कोई बैक्टीरिया तो नहीं है। ब्रेस्ट मिल्क बैंक में पूरी जांच के बाद ही किसी मां का दूध लिया जाता है, फिर उसे प्रोसेस करने के बाद बच्चे को दिया जाता है। जिससे किसी तरह के इन्फेक्शन की आशंका खत्म हो जाती है।

मां के दूध को 'लिक्विड गोल्ड' कहते हैं, लेकिन इसे स्टोर करने के लिए मिल्क बैंक की जरूरत क्यों होती है

ब्रेस्ट मिल्क बैंक की क्या जरूरत?

डॉ. आशीष मेहता ने 2019 में गुजरात का पहला प्राइवेट ब्रेस्ट मिल्क बैंक खोला था। पिछले 3 साल में उनके बैंक में 256 मांएं 567 लीटर मिल्क डोनेट कर चुकी हैं। वह कहते हैं कि नवजात के लिए दूध का दूसरा विकल्प सिर्फ मां का दूध ही हो सकता है। लेकिन, कई बार कुछ वजहों से मां का दूध नहीं उतरता या कम आता है। अगर बच्चा प्रीमैच्योर होता है, तब भी मां को लैक्टेशन में समस्या का सामना करना पड़ता है।

मिल्क बैंक इसी समस्या का सॉल्यूशन है। दुनिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक 1909 में ऑस्ट्रिया में खुला, जबकि भारत का पहला ब्रेस्ट मिल्क बैंक 1989 में मुंबई में शुरू हुआ।

ब्रेस्ट मिल्क बेचना-खरीदना अपराध

डॉ. बावा बताती हैं ब्रेस्ट मिल्क के लिए किसी तरह के पैसे का लेन-देन नहीं होता। ब्रेस्ट मिल्क खरीदना और बेचना कानूनन अपराध है। इसलिए जो महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क देती हैं, वह बिना कोई पैसा लिए अपनी मर्जी से दूध दान करती हैं। यह दूध बच्चों को फ्री में मुहैया कराया जाता है। मिल्क डोनेशन के लिए डोनर मदर के साथ ही जिस बच्चे को दूध दिया जाता है, उसकी फैमिली की सहमति भी जरूरी है।

कुछ कंपनियों ने ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ से डेयरी का लाइसेंस लेकर ब्रेस्ट मिल्क बेचना शुरू कर दिया था। 2022 ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत इन कंपनियों का लाइसेंस रद्द कर किसी भी तरह से ब्रेस्ट मिल्क को बेचने पर बैन लगा दिया।

ब्लड बैंक की तरह खुलें ब्रेस्ट मिल्क बैंक

सार्वजनिक जगहों पर ब्रेस्टफीडिंग बूथ की सुविधा मुहैया कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष करने वाली दिल्ली की एडवोकेट नेहा रस्तोगी कहती हैं, 'हर बच्चे को मां का दूध मिल सके, इसके लिए ब्रेस्ट मिल्क बैंक जरूरी हैं। जिन मांओं को ज्यादा दूध आता है, वे उसे डोनेट करना चाहती हैं। लेकिन, उन्हें कोई मिल्क बैंक नहीं मिलता। मैं अपने एनजीओ और डॉक्टर्स के जरिए ऐसी मांओं और बच्चों की मदद कर रही हूं। जब बच्चे को दूध की जरूरत होती है, उस वक्त जाति, धर्म के बंधन भी टूट जाते हैं।'

डॉ. रश्मि बावा बताती हैं कि उनके पास आने वाली आधी से ज्यादा मांएं वर्किंग होती हैं। वे ऑफिस जाने से पहले ब्रेस्ट मिल्क को फ्रिजर में रख सकती हैं। ताकि, जब बच्चे को भूख लगे, तो घर पर रखा दूध उसे दिया जा सके।

मिल्क बैंक या फिर घर पर डीप फ्रीजर में रखे गए दूध को यूज करने में सावधानी बरतनी चाहिए। फ्रिज, दूध का बर्तन और हाथ अच्छे से साफ होने चाहिए। हाईजीन मेंटेन करने में लापरवाही न बरतें। सिर्फ उतना ही दूध पिघलाना चाहिए, जितना एक बार में यूज हो जाए। गर्म दूध बच जाए तो उसे न तो दोबारा फ्रिज में रखना चाहिए और न ही बाद में बच्चे को पिलाना चाहिए।

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