नई दिल्ली/ यूरोप में इन दिनों एक अनोखी रिसर्च चल रही है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी ये रिसर्च कर रही है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के ऊपर लो ग्रैविटी के प्रभाव के कम करने की संभावनाएं तलाशी जा रही है।
इस रिसर्च के लिए 12 वॉलनटियर्स तलाशे गए हैं। जिनको दो महीने की रिसर्च पूरा होने के बाद लगभग 16 लाख रुपए मिलेंगे। इसके बदले उन्हें कुछ भी नहीं करना होेगा। ये दो महीने सभी वॉलनटियर्स को बिस्तर पर सोकर बिताने होंगे। इस अनोखी रिसर्च की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस काम को बहुत आसान बता रहे हैं। तो कई लोगों का यह भी कहना है लगातार दो महीने बिस्तर पर पड़े-पड़े आराम करने अपने आप में थकाने वाला काम है।
- बिस्तर पर ही खाना-नहाना और फ्रेश होना होगा
दो महीने बिस्तर पर लेट कर होने वाली यह रिसर्च उतनी भी आसान नहीं। रिसर्च में शामिल वॉलनटियर्स को किसी भी स्थिति में बिस्तर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
उन्हें खाना लेटे-लेटे ही खाना होगा। नहाने के दौरान भी कम से एक कंधा बिस्तर से लगा होना चाहिए। उन्हें नित्यकर्म के लिए भी बिस्तर छोड़ने की इजाजत नहीं होगी।
किसी अंतरिक्ष यात्री की तरह उन्हें ये काम लेटे-लेटे बिस्तर पर ही करने होंगे।
सिर की तरफ से 6 डिग्री झुका रहेगा बेड
वॉलनटियर्स को दो महीने जिस बिस्तर पर काटने हैं, वह बहुत आरामदायक भी नहीं है। इसमें उन्हें तकिया लगाने की इजाजत नहीं है। उल्टे यह बेड तकिए की ओर से 6 डिग्री नीचे की ओर झुका रहेगा।
जिसके चलते वॉलेंटियर्स के पांव ऊपर और सिर नीचे की ओर झुके रहेंगे।
बिस्तर पर लेटकर ही चलाएंगे साइकिल
रिसर्च में शामिल वॉलनटियर्स दो महीने के दौरान वर्क आउट भी कर पाएंगे। लेकिन उन्हें यह काम भी लेटकर ही करना पड़ेगा।
इसके लिए वॉलनटियर्स के लिए खासतौर से साइकिल डिजाइन की गई है। जिसमें लेटे-लेटे ही पैडलिंग की जा सकती है।
वॉलनटियर्स को एक्सरसाइज वगैरह भी लेटकर ही करना होगा।
अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत सुधारने के लिए हो रही रिसर्च
यूरोपीय स्पेस एजेंसी की इस रिसर्च का मकसद अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत को सुधारना है। दरअसल, अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले वैज्ञानिक वहां लो ग्रैविटी फील करते हैं। यानी उन्हें अपने शरीर का भार महसूस नहीं होता।
जिसके चलते उनकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा असर होता है। धरती पर लौटने के बाद कई अंतरिक्ष यात्रियों की आंखें, दिल और दूसरे बॉडी पार्ट्स में खराबी आ जाती है।
इस रिसर्च में वॉलनटियर्स को बिल्कुल अंतरिक्ष जैसा माहौल दिया जाएगा। इस दौरान लगातार उनकी सेहत की जांच भी होगी।
फिर इसमें देखा जाएगा कि किन गतिविधियों से उनकी सेहत पर अच्छा या बुरा असर होता है।
सोने का रिकॉर्ड बनाकर बंगाली लड़की ने जीते 6 लाख
पिछले साल सोने के एक कॉम्पिटिशन में बंगाल की लड़की ने बाजी मारी। कॉम्पिटिशन में शामिल 4 लाख लोगों का हराकर हुगली की रहने वाली त्रिपर्णा चक्रवर्ती ने 6 लाख रूपए जीते।
उसने लगातार 100 दिनों तक 9 घंटे की नींद ली। कॉम्पिटिशन कराने वाली कंपनी ने सभी प्रतिभागियों को एक-एक मैट्रस और एक स्लीप ट्रैकर दिया था। स्लीप ट्रैकर प्रतिभागियों की नींद मापता था। जिसमें पाया गया है कि त्रिपर्णा चक्रवर्ती ने लगातार 9 घंटे या उससे ज्यादा की गहरी नींद ली। जिसके बाद उसे विजेता घोषित किया गया।
- कई कंपनियों में रखे जाते हैं प्रोफेशनल स्लीपर
वैसे सोकर पैसे कमाना नई बात नहीं है। दुनिया भर की कई कंपनियों में प्रोफेशनल स्लीपर रखे जाते हैं। जिनका काम सिर्फ आराम की नींद सोना होता है।आमतौर पर मैट्रेस, बेडरोल, नींद की गोली और स्लीप ट्रैकर बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्ट को जांचने के लिए प्रोफेशनल स्लीपर रखती हैं।
लेकिन कई बार रिसर्च के लिए हॉस्पिटल और लैब वगैरह में भी प्रोफेशनल स्लीपर्स को नौकरी मिल जाती है।

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