जल संसाधन विभाग में लगभग 10 करोड़ 86 लाख की गड़बड़ी- जहां से नहर गुजरी ही नहीं, वहां का मुआवजा बांटा 1.9 किमी में
बिलासपुर/ अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट में राजस्व और जल संसाधन विभाग के 11 अफसरों ने मुआवजा बांटने में 10 करोड़ 86 लाख 44 हजार 846 रुपए की गड़बड़ी की है। जांच रिपोर्ट में 10.86 करोड़ के अवैध मुआवजा का खुलासा हुआ है। 7 बिंदुओं पर जांच नहीं की गई। इसकी जांच होती और भी खुलासे होते। सिलसिलेवार जो खुलासे हुए थे, उन पर जांच में मुहर लग गई है। एक ही परिवार को करोड़ों का मुआवजा बांटा गया है। जिन अफसरों ने मुआवजा बांटने में गड़बड़ी की है, उसमें किसी का प्रमोशन हो गया तो कोई रिटायर हो चुका है।
सकरी में सवा हेक्टेयर निजी जमीन के नाम पर बगैर अधिसूचना प्रकाशित किए करोड़ों का मुआवजा अवैध तरीके से बांट दिया गया और रास्ता बदलकर सरकारी जमीन पर नहर बनाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया। कलेक्टर की गठित छह सदस्यीय समिति की यह जांच रिपोर्ट 2 फरवरी 2023 को सिंचाई सचिव के अलावा कमिश्नर संजय अलंग को सौंपी गई। इसमें तत्कालीन कोटा एसडीएम आनंदरूप तिवारी, कीर्तिमान सिंह राठौर, तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहरसाय सिदार,तत्कालीन राजस्व निरीक्षक हुल सिंह, तत्कालीन पटवारी दिलशाद अहमद ,मुकेश साहू के अलावा जल संसाधन विभाग के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आरएस नायडू, अशोक तिवारी, तत्कालीन एसडीओ तखतपुर राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, आरपी द्विवेदी, उप अभियंता तखतपुर आरके राजपूत को मुआवजा राशि में गड़बड़ी का दोषी पाया गया है। फिलहाल दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सिंचाई के 2 ईई, 2 एसडीओ, राजस्व के 2 एसडीएम, 1 नायब तहसीलदार भी दोषी
अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट में कब क्या हुआ
- 9 जून 2021 को मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर पवन अग्रवाल ने 13 बिंदुओं में शिकायत की थी।
- 5 जुलाई 2021 को राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने विधानसभा में इस मामले को लेकर जांच के आदेश दिए थे।
- 6 जुलाई 2021 काे तत्कालीन एडीएम उइके के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम गठित की।
- 24 जुलाई 2021 को जांच टीम ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी थी और बताया गया कि बारिश के चलते जांच पूरी नहीं हुई है।
जांच में पाया गया कि 19 जुलाई 2019 से 21 जुलाई 2019 के बीच राजस्व भू-पोर्टल के कंप्यूटर नक्शे में तत्कालीन पटवारी मुकेश साहू द्वारा खसरों का अवैध बटांकन करना पाया गया था।
खसरों की कूटरचना में खसरा नंबर 1, 9, 10 के फर्जी बटांकन की पुष्टि हुई।
तत्कालीन एडीएम आरए कुरूवंशी ने 20 सदस्यीय टीम बनाकर मौके का सीमांकन कराया। जो 19 दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 तक चला।
20 सदस्यीय टीम ने फरवरी 2023 में कलेक्टर को सीमांकन रिपोर्ट साैंपी।
सीमांकन रिपोर्ट और 6 सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर 24 फरवरी 2023 को वर्तमान कलेक्टर सौरभ कुमार ने सचिव एवं कमिश्नर को यह रिपोर्ट सौंपी है।
- ऐसे किया गया खेल
अरपा आरआई परियोजना नहर निर्माण में कुल 19 खसरा नंबरों की 3.04 एकड़ जमीन नहर निर्माण में प्रभावित होना पाया गया। राजस्व व जल संसाधन विभाग के तत्कालीन अफसरों ने गलत बटांकन करते हुए नहर संरेखण को लाल स्याही से अंकित कर अवार्ड पारित किया। नक्शा तैयार करने में गंभीर अनियमितता बरती और नहर निर्माण में प्रभावित खसरा नंबरों को धारा 11 व धारा 19 का प्रकाशन कराए बिना अवार्ड पारित कर भुगतान कर दिया गया।
क्या है मुआवजा घोटाले की जांच रिपोर्ट में
1. खसरा नंबर 0.40 एकड़ मनोज अग्रवाल पवन कुमार अग्रवाल को 27 लाख 86 हजार 400 रुपए मुआवजे का भुगतान कर दिया गया, जबकि इस खसरा नंबर की जमीन नहर से प्रभावित ही नहीं हुई है।
2. खसरा नंबर ⅙ रकबा 0.50 एकड़ मनोज अग्रवाल पिता पवन कुमार अग्रवाल निवासी बिलासपुर को 3 करोड़ 4 लाख 77 हजार 384 रुपए मुआवजा दिया गया। जबकि इस खसरे नंबर की जमीन प्रभावित नहीं हुई है।
3. खसरा नंबर 18/5 घ रकबा 0.64 एकड़ शारदा अग्रवाल पति पवन अग्रवाल,दिप्ती अग्रवाल पति मनोज अग्रवाल का 0.03 एकड़ का प्रकाशन किया गया है, जबकि 8.08 एकड़ जमीन को अवार्ड में शामिल किया गया।
4. खसरा नंबर 19/9 रकबा 0.75 एकड़ मुकेश पिता पवन कुमार अग्रवाल निवासी बिलासपुर का धारा 11 व 19 में प्रकाशन कर 0.25 एकड़ जमीन पारित कर 81 लाख मुआवजे का का भुगतान किया गया।
5. खसरा नंबर 19/2 रकबा 0.75 एकड़ जमीन पवन पिता शंकरलाल अग्रवाल निवासी बिलासपुर का धारा 11 व 19 में प्रकाशन कर 9.25 एकड़ जमीन पारित कर खातेदार को 81 लाख मुआवजा दिया, जबकि यह एलाइनमेंट में प्रभावित नहीं है।
6. खसरा नंबर 19/4 रकबा 1.70 एकड़ जमीन शारदा देवी पति पवन कुमार अग्रवाल निवासी बिलासपुर का धारा 11 व 19 में प्रकाशन कर अवार्ड में 1.07 एकड़ जमीन पारित कर खातेदार को 2 करोड़ 4 लाख 68 हजार मुआवजा दिया।
7. खसरा नंबर 19/4 रकबा 1.70 एकड़ शारदा देवी पति पवन कुमार अग्रवाल का धारा 11 व 19 में प्रकाशन कर भूमि पवन अग्रवाल के नाम पर पारित कर 89 लाख मुआवजा भुगतान किया गया, जबकि यह नहर एलाइनमेंट में प्रभावित नहीं हुई।
8. खसरा नंबर 44/21 रकबा 0.45 एकड़ नंदिता पांडेय पति अरूण कुमार निवासी रायपुर का प्रकाशन धारा 11 व 19 में नहीं किया गया है। अवार्ड में 0.45 एकड़ भूमि पारित कर 68 लाख 98 हजार 994 रुपए का आंकलन किया गय।
घोटाले को लेकर किस अधिकारी पर क्या आरोप, जवाब में किसने क्या कहा...
आनंदरूप तिवारी तत्कालीन एसडीएम ने मुआवजा बांटने में गड़बड़ी के मुख्य दोषी हैं। प्रमोशन पर जीपीएम में पदस्थ।
कीर्तिमान राठौर तत्कालीन एसडीएम ने गलत बटांकन किया है। इन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
आरएस नायडू, तत्कालीन ईई कोटा जलसंसाधन ने गलत नक्शा बनाया है। इन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
अशोक तिवारी तत्कालीन ईई कोटा जलसंसाधन ने गलत नक्शा तैयार किया है। इन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
राजेंद्र प्रसाद मिश्रा तत्कालीन एसडीओ तखतपुर जलसंसाधन ने गलत नक्शा तैयार किया है। इन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
आरपी द्विवेदी, तत्कालीन एसडीओ पर गंभीर अनियमितता पाई गई है। इन्होंने कहा कि मामले में मेरी भूमिका नहीं है।
- एलाइनमेंट में नहीं, फिर भी मुआवजा
शिवकुमार, पुन्नीलाल, धरमप्रकाश से खसरा नंबर 9/2 के 0.10 एकड़ , मनोज कुमार अग्रवाल पिता पवन अग्रवाल से खसरा नंबर 9/5 के 0.18, बंशीलाल को खसरा नंबर 10/3 में 0.12 एकड़, नंदलाल, विजय, धीरसिंह पिता मालिकराम निवासी पांड़ के खसरा नंबर 11 में 0.12 एकड़, माया दुबे पति एसएस दुबे निवासी बिलासपुर के खसरा नंबर 40/4 में 1.36 एकड़, रोहणी तिवारी पति स्व. अजय तिवारी खसरा नंबर 42/30 में 0.02 एकड़ के मुआवजे की राशि वसूली योग्य है।
आयुक्त बिलासपुर संभाग व जल संसाधन विभाग को जांच रिपोर्ट भेज दी गई है। जांच में जो भी अधिकारी-कर्मचारी दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। -आरए कुरूवंशी, अतिरिक्त कलेक्टर, बिलासपुर

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