पंडित सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी में भर्ती घोटाला - असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में हुई थी गड़बड़ी अब नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती में गड़बड़ी सामने आई
बिलासपुर।पंडित सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के बाद नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। भर्ती के लिए वैकेंसी निकालने के पहले ही विभाग के मंत्री, बड़े अफसर के करीबी और विश्वविद्यालय के ही स्टाफ को नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है। यही वजह है कि भर्ती नियमों को ताक में रखकर दोषपूर्ण चयन प्रक्रिया अपनाई गई है। इतना ही नहीं जिन लोगों की नियुक्ति की जानी है , उनके नाम भी पहले से तय कर लिए गए हैं। इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग में की गई है।
कुछ महीने पहले पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में सिस्टम एनालिस्ट, जनसंपर्क अधिकारी, सहायक छात्र कल्याण अधिकारी सहायक निदेशक और छात्र कल्याण अधिकारी के एक- एक पद के लिए विज्ञापन निकाला गया था, विज्ञापन निकालने के बाद ही पूरा मामला घोटाले की भेंट चढ़ गया है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही अब सवाल उठने लगा है।सबसे पहले कार्य परिषद से कोई भी अनुमोदन नहीं लिया गया, जब यह मामला बाहर आया, तब आनन-फानन में विज्ञापन को रद्द करके कुछ दिन बाद दूसरा विज्ञापन जारी किया गया। लेकिन, नियुक्त के लिए कार्यपरिषद से सहमति तक नहीं ली गई। दरअसल, यह भर्ती सुनियोजित तरीके से विभाग के मंत्री और अफसर और विश्वविद्यालय मके ही कार्यरत कुछ लोगों के लिए करने की बात कही जा रही है और उनका नाम पहले से तय माना जा रहा है। इसलिए नियुक्ति करने के लिए दोषपूर्ण प्रक्रिया अपनाई गई है।
स्ववित्तीय मद से भर्ती फिर भी वित्त समिति से अनुमति नहीं
इस विज्ञापन में भी वित्त समिति से कोई भी अनुमति नहीं ली गई है। खास बात यह है कि राज्य शासन ने यूनिवर्सिटी को स्ववित्तीय मद से भर्ती करने की स्वीकृति दी है। ऐसे में यूनिवर्सिटी के वित्त समिति से सहमति लेना आवश्यक है। यही नहीं विज्ञापन में परीक्षा के नियमों की भी धज्जियां उड़ाई गई। विज्ञापन में कहा गया कि दो परीक्षाएं ली जाएंगी, जिसमें पहली परीक्षा ऑप्शनल और दूसरी परीक्षा रिटर्न फॉर्मेट नहीं होगी। पहले ऑप्शनल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाला विद्यार्थी ही रिटर्न परीक्षा में प्रतिभागी हो सकेगा और इसके बाद ही इंटरव्यू के लिए पात्र होगा। लेकिन परीक्षा के बाद कोई भी रिजल्ट घोषित नहीं किया गया, दोनों चरणों के परीक्षा के परिणाम घोषित नहीं किए गए, सीधे चयनित किए जाने वालों को मेल से इंटरव्यू का कॉल लेटर भेजा गया है। विज्ञापन में किसी भी प्रकार का न तो सिलेबस नहीं बताया गया था और सीधे परीक्षा आयोजित कर ली गई।
बिना रिजल्ट जारी किए ही इंटरव्यू
इन पदों के लिए इंटरव्यू आयोजित किया जा रहा है। इस बात को लेकर पूरे प्रदेश स्तर पर हंगामा मचा हुआ है। लोगों ने इसकी शिकायत उच्च शिक्षा विभाग, राज भवन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक कर दी है। इस मामले की जानकारी आने के बाद आनन-फानन जांच समिति बनाकर गोपनीय जांच करने का दावा भी किया जा रहा है। लेकिन, बिना रिजल्ट जारी किए इंटरव्यू के लिए चहेते कैंडिडेट्स को बुलाना भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़ा कर रहा है।
सेवा नियम ही नहीं, दावा आपत्ति गायब
विज्ञापित पदों के लिए कोई भी सेवा नियम नहीं बनाए गए हैं। जबकि नियमानुसार स्व वित्तीय योजना के तहत नियुक्ति के लिए पृथक से सेवा नियम बनाया जाना है यह सेवा नियम विज्ञापन के पूर्व बनाया जाना आवश्यक होता है। साथ ही सेवा नियमों की जानकारी शासन को देना जरूरी होता है। इसी तरह रिजल्ट के संदर्भ में कोई भी दावा आपत्ति आमंत्रित नहीं की गई और ना ही कोई पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है।
इनका होगा चयन
सिस्टम एनालिस्ट के लिए शिक्षा विभाग के एक सचिव के PA रह चुके व्यक्ति का चयन किया जाना तय है , जिसे पूर्व में ही चीफ सेक्रेटरी ने शिकायत के आधार पर हटा दिया था। वह वर्तमान में सचिव के घर में अपनी सेवा दे रहे हैं। प्रोग्रामर के पद पर विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी का चयन तय माना जा रहा है, जिन्हे इंटरव्यू के लिए कॉल किया गया है। सहायक छात्र कल्याण अधिकारी के पद में मंत्री के करीबी का चयन किया जाना है , जो रायगढ़ के रहने वाले हैं और वर्तमान में कुलपति सचिवालय में पदस्थ हैं। इसी तरह छात्र कल्याण अधिकारी के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष के करीबी का चयन किया जाना है, जो वर्तमान में विश्वविद्यालय में ही पदस्थ हैं। सहायक क्षेत्रीय निदेशक के पद पर विश्वविद्यालय में ही पदस्थ व्यक्ति का चयन करने की तैयारी है।
पहले असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में हुई थी धांधली
इससे पहले भी पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी में हुई सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति को लेकर सवाल उठे थे। तब आरक्षण नियमों को दरकिनार कर भर्ती की गई थी। विवि में 13 पदों पर हुई भर्तियों में 11 पद अनारक्षित वर्ग से भर लिए गए। जबकि आरक्षण रोस्टर के मुताबिक, 6 पद सामान्य, 4 अनुसूचित जनजाति, 2 पिछड़ा वर्ग, 2 अनुसूचित जाति वर्ग से भरे जाने थे। रजिस्ट्रार का कहना है कि उन्होंने इस पर आपत्ति की थी, पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए विवि में होने वाली नियुक्तियों से खुद को अलग कर ली। हैं। वहीं कुलपति वंश गोपाल सिंह ने नियमों के तहत भर्ती होने का दावा किया है।

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