जल जीवन मिशन के काम में निकली कई खामियां जांच के बाद भी खामियों की अनदेखी, ग्रामीणों को पीने का पानी भी नसीब नहीं हो रहा
जांजगीर चंपा।
जिले में जल जीवन मिशन के काम में ठेरों खामियों का उजागर अधिकारियों ने जांच में उजागर की है। लेकिन यहां विडंबना यह है कि जांच अधिकारियों ने खामियों को ठीक करने ठेकेदार को निर्देशित किया था, लेकिन यह खामियां अब तक धरी की धरी रह गई है। इसके चलते ग्रामीणों को गर्मी के दिनों में भी पीने के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा है।
जांजगीर-चांपा। गौरतलब है कि जिले में जल जीवन मिशन में तकरीबन १२०० करोड़ रुपए का काम चल रहा है। जिसमें ५० फीसदी काम घटिया व गुणवत्ताविहीन हो रहा है। इसकी शिकायत राज्य के अलावा केंद्र स्तर में हुई है। शिकायतों की जांच के लिए रायपुर से सीईओ के पीए आए थे। जिसने कई तरह की खामियां पाई। लेकिन दुखद यह है कि ठेकेदार को काम में गुणवत्ता लाकर सही सलामत काम करने के लिए आदेशित कर चलते बने। ऐसे में जांच अधिकारी की कार्यशैली में भी सवाल उठ रहा है।
इस तरह मिली कई खामियां
जहां जहां भी जल जीवन मिशन का काम चल रहा है वहां वहां कई तरह की खामियां मिल रही है। अधिकतर स्थानों में पुराने पाइप से ही नया कनेक्शन देकर बिल बना दिया गया है। इसके लिए नल में पैडस्टल मापदंड के अनुरूप नहीं लगाया गया है। जिससे घरों में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। कई गांवों में पानी टंकी का निर्माण ही बेहद घटिया तरीके से की गई है। जिसके चलते टंकी कभी भी भरभराकर गिर सकता है। ठेकेदार ने घटिया निर्माण कर सरकार की राशि में बंदरबांट कर मोटी रकम बना लिया है।
चार गांव में मिली चार खामियां
०१. पुटपुरा- टंकी निर्माण में मापदंड के अनुसार सरिया व मटेरियल नहीं लगाया गया है। कार्य की प्रगति लगभग ६ माह से ठप है। पाइप लाइन कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। हितग्राहियों से ही पाइप खरीदवाकर उनके घरों में लगाया गया है। नल पैडस्टल बहुत छोटा व गुणवत्ताविहीन है। कार्य कर रहे मिस्त्रियों को कोई टेक्निकल जानकारी नहीं है। उनके पास सुरक्षा के कोई उपकरण भी नहीं है।
०२ भड़ेसर- कार्य की प्रगति लगभग ८ माह से रुका हुआ है। टंकी में बोर सप्लाई नहीं पाया गया। पाइप लाइन लीकेज है और पुराने पाइप लाइन से ही जल प्रवाहित करने की योजना है। हितग्राहियों के घरों में पानी नहीं जा रहा है। नल पैडस्टल बहुत बड़ा व छोटा है। कार्य के दौरान कम मटेरियल लगाने की शिकायत मिल रही है। फोटोग्राफ्स में स्पष्ट दिखाई पड़ रही है। कार्य बेदम घटिया तरीके से की गई है। तालाब किनारे ड्राई वाटर की समस्या बताकर पुराने बोर की सफाई नहीं की गई है। पुरानी टंकी के पाइप लाइन को छेड़ा गया है। जिससे जिन घरों में पानी जाती थी वह भी बंद हो गई है।
०३. मुनुंद- कार्य की प्रगति चार माह से ठप है। पुरानी पाइप से ही पानी की सप्लाई की जा रही है। नल का पैडस्टल मानदंड के अनुरूप नहीं है। पैडस्टल में प्लास्टिक का नल लगाया गया है।
०४. कुटरा- मेन रोड होने के कारण कार्य लगभग संतुष्टि जनक नहीं पाया गया है। हितग्राहियों के घरों में पानी की समस्या है। पानी कम मात्रा में माह में केवल ८ दिन ही आता है। जिससे ग्रामीणों को नल से पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है।
मामले की जांच जारी है। जहां जहां खामियां मिल रही है वहां वहां खामियों को दूर किया जा रहा है। ताकि लोगों को पीने का पानी मिल सके।
- सुनील शुक्ला, ईई, पीएचई

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