ओपन यूनिवर्सिटी की नॉन टीचिंग पदों पर चहेते उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की तैयारी, दिखावे के लिए परीक्षा भी ली, मामला उजागर होने पर कुलपति डॉ. वंश गोपाल सिंह की सेहत खराब हो गई
- चहेतों को नियुक्ति देने नियमों को दरकिनार कर दिया गया है।
बिलासपुर।पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी की भर्ती में धांधली उजागर होते ही कुलपति डॉ. वंश गोपाल सिंह की तबीयत बिगड़ गई है। लिहाजा, दो पदों पर इंटरव्यू लेने के बाद चार पदों की भर्ती प्रक्रिया यानि की साक्षात्कार को स्थगित कर दी गई है। इसके लिए कुलपति की सेहत को कारण बताया गया है। दरअसल, भर्ती पर सवाल उठने के बाद साक्षात्कार स्थगित कर कुलपति मेडिकल लीव पर चले गए हैं। वहीं, गुरुवार को होने वाली कार्य परिषद (EC) की बैठक भी टल गई है।
प्रदेश भर में आरक्षण विवाद के बाद जहां भर्तियों पर रोक लगी है। वहीं, ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. वंशगोपाल सिंह नियमों को ताक में रखकर भर्ती कर रहे हैं। यहां नॉन टीचिंग स्टाफ के छह पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालकर चहेते उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की तैयारी कर ली गई है। दिखावे के लिए यूनिवर्सिटी ने आवेदन जमा करने वाले उममीदवारों की परीक्षा भी ले ली है। लेकिन, रिजल्ट जारी किए बिना ही गोपनीय तरीके से मैरिट सूची बनाकर सीधे इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर भेजा गया है। भर्ती में इतनी तत्परता दिखाई गई कि 24 अप्रैल को दो पद सिस्टम एनालिसिसि और कंप्यूटर प्रोग्रोमर के पद का इंटरव्यू भी ले लिया गया। इस बीच भर्ती में अनियमितता की शिकायत होने के बाद राजधानी रायपुर और राजभवन तक बवाल मच गया है।
कुलपति की बिगड़ी सेहत इसलिए चार पदों का इंटरव्यू स्थगित
इस बीच बाकी के चार पदों के लिए भी इंटरव्यू होना था। इसके लिए उम्मीदवारों को कॉल लेटर जारी किया गया था। इधर, भर्ती में नियमों को दरकिनार कर मनमानी करने को लेकर बवाल मचा तब मंगलवार को दोपहर 3.30 बजे से यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने उम्मीदवारों को मैसेज, मेल और फोन कर इंटरव्यू स्थगित करने की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि कुलपति डॉ. बंश गोपाल सिंह की सेहत खराब है और वे मेडिकल लीव पर चले गए हैं। उम्मीदवारों को यह भी बताया गया कि इंटरव्यू कमेटी के चेयरमैन खुद कुलपति ही होते हैं, ऐसे में अगर वे उपस्थित नहीं रहेंगे, इसलिए साक्षात्कार नहीं हो सकेगा। मालूम हो कि यूनिवर्सिटी ने 26 अप्रैल को भी साक्षात्कार रखा था।
कार्य परिषद की बैठक भी टली, इसी में खुलना था नियुक्ति का लिफाफा
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सुनियोजित तरीके से भर्ती प्रक्रिया पूरी कर चयन सूची जारी कर आनन-फानन में कार्य परिषद की बैठक भी बुला लिया था। इंटरव्यू होने के बाद 27 अप्रैल को यह बैठक होनी थी, जिसमें नियुक्ति का लिफाफा खोलकर अनुमोदन कराने और उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी करने की तैयारी कर ली गई थी। हालांकि, भर्ती में अनियमितता और विवाद सामने आने के बाद कार्य परिषद की बैठक को भी स्थगित कर दी गई है।
बिना नियम और सिलेबस के हो गई भर्ती परीक्षा
यूनिवर्सिटी की भर्ती प्रक्रिया पर शुरू से ही सवाल उठ रहा है। नियुक्ति में विभाग के शिक्षा मंत्री, अफसर, नेता और यूनिवर्सिटी के चेहेते कर्मचारियों को सुनियोजित तरीके से भर्ती करने का आरोप भी लग रहा है। यही वजह है कि इसे लेकर लगातार शिकायतें हो रही है। भर्ती में इसलिए गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं क्योंकि, यूनिवर्सिटी ने न तो कार्य परिषद से सहमति ली है और न ही वित्तीय समिति से स्वीकृति ली गई है। यहां तक भर्ती परीक्षा के लिए सिलेबस भी जारी नहीं किया गया था। स्ववित्तीय मद से होने वाली भर्ती का सेवा नियम भी यूनिवर्सिटी ने नहीं बनाया है। भर्ती में यूनिवर्सिटी कर्मचारियों को बोनस देने की बात कही जा रही है। लेकिन, हाईकोर्ट ने बिजली विभाग की भर्ती में बोनस अंक देने को अवैधानिक बताया है और भर्ती को निरस्त कर दिया है।
रजिस्ट्रार बोली- मेडिकल लीव पर हैं कुलपति
इस संबंध में जानकारी के लिए कुलपति डॉ. बंश गोपाल सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन, उनका मोबाइल बंद था। रजिस्ट्रार डॉ. इंदू अनंत ने बताया कि 27 अप्रैल को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक स्थगित हुई है, क्योंकि कुलपति मेडिकल लीव पर चले गए हैं। भर्ती मामले से मुझे कोई लेनादेना नहीं है, इसलिए मुझे कोई जानकारी नहीं है।

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