गुढियारी एरिया में 600 साल से भी अधिक पुरानी बावली वाले हनुमान मंदिर पर गजब की आस्था, कभी सूखती नहीं यह बावली
रायपुर। पुरानी बस्ती के नागरीदास मठ और जैतूसाव मठ के बीच 600 साल से भी अधिक पुरानी बावली वाले हनुमान मंदिर के स्थानीय देवेंद्र शर्मा ने बताया कि यहां मौजूद भगवान के प्रति लोगों में गजब की आस्था है, मंदिर आने वाले श्रद्धालू खुद अपने अनुभवाें के बारे में कहते हैं कि यहां दर्शन के बाद उनकी मनोकामनाएं पूरी हुई हैं।
देवेंद्र ने बताया कि मेरे सपने में भगवान बजरंग बली दिखे थे। कुछ दिन बाद मुझे मंदिर में लंबी पूंछ दिखी थी, जैसे किसी विशाल वानर की हो, मैं उस वक्त भाव विभोर हो गया था। मंदिर के बारे में स्थानीय लोगों में एक किस्सा प्रचलित है कि बावली के पास आकर एक गाय खड़ी होती थी, उसके थन से अपने आप दूध निकलना शुरू हो जाता था।
गांव वालों ने जब देखा तो बावली के भीतर घुसे, जहां तीन प्रतिमाएं दिखाई दीं। उन प्रतिमाओं को निकाला गया तो वे हनुमानजी की थीं। गांव वालों ने एक प्रतिमा बावली के बगल में ही छोटा सा मंदिर बनवाकर स्थापित कर दिया। कालांतर में इस मंदिर का विस्तार होता गया और आज यहां भव्य मंदिर बन चुका है, जो बावली वाले हनुमान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
कभी सूखती नहीं ये बावली
रायपुर के ऐसे इलाकों में पुरानी बस्ती का हिस्सा भी शामिल हैं, जहां गर्मियों के दिनों में टैंकर से पानी की सप्लाई होती है। ग्राउंड वॉटर लेवल नीचे चला जाता है। मगर मुहल्ले में बनी इस बावली का पानी कभी नहीं सूखा। इस बार जब बावली की सफाई की गई तो कई मोटर लगाकर बावली के पानी को बाहर निकाला गया। रात को सफाई की गई, फिर सुबह पानी लबालब देखने को मिला। बावली में भीतर कई सीढ़ियां बनी हैं, अब तब बावली के पूरी तरह भीतर नहीं देखा जा सका है। बावली में कई कछुए हैं। बड़ी मछलियां भी भीतर रहती हैं। लोगों ने बताया कि पुराने समय में इस बावली का पानी पीने में भी इस्तेमाल होता था।

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