दो बच्चों की मां को बीमारी के कारण जाना पड़ा जिम, बन गई बॉडीबिल्डर, 41 की उम्र में नेशनल चैंपियन बन गई
नई दिल्ली/'41 साल की उम्र में शॉर्ट्स पहन कर किसे दिखाना चाहती हो', 'पुरुषों जैसी बॉडी बनाकर क्या करोगी', 'दो बच्चों की मां हो, मां ही बनी रहो' जब मैंने बॉडी बिल्डिंग शुरू की, तो लोगों ने मुझे ऐसे ही ताने दिए। इंसान हूं, बुरा तो लगता था, लेकिन मैं न तो मायूस हुई न ही रोई, बस जी जान लगा कर संघर्ष करती रही।
मैं शुरुआत में शॉर्ट्स और बिकिनी पहनकर बॉडी बिल्डिंग के बारे में सोचकर ही असहज महसूस करने लगती थी, लेकिन हसबैंड ने समझाया कि तुम्हें ये सब सोचने की बजाए सिर्फ अपने लक्ष्य पर फोकस करना चाहिए। उनके हौसला बढ़ाने से मुझमें कॉन्फिडेंस आया और मैंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।’
ये कहना है महिला बॉडी बिल्डिंग नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली प्रतिभा थपलियाल का, हमारे देश में जहां शादी के बाद महिलाओं का करियर खत्म समझा जाता है, वहां 40 की उम्र में बिकिनी पहन कर बॉडी बिल्डिंग करने के बारे में सोचना भी आसान काम नहीं था। लेकिन प्रतिभा थपलियाल ने नेशनल सीनियर महिला बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया।
प्रतिभा उत्तराखंड की पहली महिला हैं, जिन्होंने इस चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है। प्रतिभा के लिए यहां तक का सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा। बीमारी और लोगों के ताने जैसी कई रुकावटों के बावजूद वो झुकी नहीं। वुमन भास्कर से बातचीत में प्रतिभा ने बताया कि आखिर शादी के इतने सालों बाद उन्होंने बॉडी बिल्डिंग करने का फैसला क्यों किया।
पिताजी के जाने के बाद भी खेलना नहीं छोड़ा
मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई उत्तराखंड के ऋषिकेश से हुई। बचपन से ही स्पोर्ट्स से मेरा खास लगाव रहा। मैंने स्टेट और नेशनल लेवल पर कई गेम्स खेले हैं। मेरे माता-पिता को भी गर्व था कि उनकी बेटी इतना अच्छा खेलती है, इसलिए उन्होंने कभी मुझे खेलने से नहीं रोका। मगर, साल 1996 में मैंने अपने पिता को खो दिया, जिसने हमारे पूरे परिवार को झकझोरकर रख दिया।
पापा के जाने के बाद मां के लिए अकेले घर और चार बच्चे संभालना मुश्किल था। मेरे से बड़ी दो बहनों की शादी हो गई थी और भाई छोटा था। मां ने घर और ट्रांस्पोर्ट का बिजनेस दोनों अकेले संभाला। इतना सब कुछ होने के बाद भी उन्होंने मुझे खेलने से नहीं रोका और पूरा सपोर्ट किया। जब मैं कॉलेज में गई तो पहली बार में ही मेरा नॉर्थ जोन के लिए सिलेक्शन हो गया। मैंने इस दौरान 4 से 5 साल तक कई कंपटीशन्स में हिस्सा लिया।
सामाजिक दबाव के कारण मां ने कहा-शादी कर लो
पढ़ाई खत्म होने के बाद रिश्तेदार मां पर मेरी शादी का सामाजिक दबाव बनाने लगे। मेरी शादी को लेकर कई बार मां बहुत परेशान रहती। वो चाहती थीं कि मैं शादी कर लूं, उन्हें परेशान देखकर मैंने ‘हां’ कह दिया। साल 2004 में मेरी शादी हो गई और मैं देहरादून आ गई।
खुद को नजरअंदाज करने लगी
शादी के बाद मैं धीरे-धीरे खेल के साथ-साथ खुद को भी भूलने लगी। कुछ समय बाद मैं हसबैंड के साथ बिजनेस में हाथ बंटाने लगी। इस तरह शादी के 4-5 साल बीत गए। छोटे बेटे के जन्म के बाद अचानक मेरा वजन बढ़ने लगा। मैं बहुत थकान महसूस करती, बीपी लो रहता। मुझे लगा कि दो बच्चों और काम के प्रेशर के कारण ऐसा हो रहा है। जिस तरह हर महिला अपनी सेहत और खुद को नजरअंदाज करती है, मैं भी करने लगी।
बीमारी के कारण जिम जाना पड़ा
पति के कहने पर 1 से 2 साल के बाद जब मैंने डॉक्टर को दिखाया और टेस्ट करवाया तो पता चला कि मेरा थायराइड बहुत बढ़ा हुआ है। शरीर में विटामिन डी की भी कमी है। डॉक्टर ने कहा कि अगर मैं फिटनेस और खुद पर ध्यान नहीं दूंगी तो सीरियस प्रॉब्लम हो सकती है। खुद को फिट रखने के लिए मैंने जिम ज्वाइन कर लिया। मैं पहले से ही एथलीट रह चुकी थी इसलिए मुझे रूटीन को फॉलो करने में परेशानी नहीं हुई। धीरे-धीरे मैंने वजन तो कम कर ही लिया, साथ ही मेरे बाइसेप्स और मसल्स भी बनने लगे।
बिकिनी और शॉर्ट्स पहनने में असहज महसूस करती
जिस जिम में वर्कआउट के लिए जाती, वहां कई लड़के बॉडी बिल्डिंग करते नजर आते। जब मैंने पति से जिम और उन लड़कों का जिक्र किया तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम भी बॉडी बिल्डिंग कर सकती हो।
मैंने पहले तो पति की बात को मजाक समझा, लेकिन जब उन्होंने दोबारा मुझसे कहा तो मैं तैयार हो गई। हमने सर्च किया तो पता चला कि उत्तराखंड में अब तक किसी महिला ने बॉडी बिल्डिंग नहीं की है। बस, फिर क्या था। मेरे अंदर का एथलीट जाग गया, लेकिन इसके लिए पहने जाने वाले शॉर्ट्स और बिकिनी ने मुझे डरा दिया। मुझे लगा कि शायद मैं ये नहीं कर पाऊंगी क्योंकि मैंने ऐसे कपड़े पहले कभी नहीं पहने थे। सबके सामने पहनने का सोचकर के भी मैं सिहर उठी।
लोगों के ताने जहर जैसे लगते, लेकिन फोकस गोल पर था
पति मेरे मन की बात समझ गए। ‘तुम्हें ये करना चाहिए’ ऐसा कहकर वो लगातार मुझे मोटिवेट करने लगे। उनका कहना था कि अगर दुनिया में हर कोई यही सोचने लगेगा कि लोग क्या कहेंगे तो किसी के लिए भी कुछ अलग हटकर करना मुश्किल हो जाएगा। उनके बहुत समझाने पर मैंने अपनी वेट ट्रेनिंग शुरू की।
मुझे घर से तो पूरा सपोर्ट मिला, लेकिन घर के बाहर लोग मुझे अजीब नजरों से देखने लगे। ऐसा लगता था जैसे हर नजर मुझसे एक सवाल पूछना चाहती है, कुछ कहना चाहती है। फर्क इतना था कि कुछ लोग अपने सवाल मन में दबा लेते, तो कुछ ने मुझ से साफ शब्दों में पूछा कि 'ऐसा गठीला शरीर बनाकर कहां जाओगी,' '41 की उम्र में शॉर्ट्स और बिकिनी पहन कर किसे दिखाना चाहती हो' 'पुरुषों जैसी बॉडी बना कर क्या करोगी’ 'दो बच्चों की मां हो, मां ही बन कर रहो'। ये बातें मुझे जहर जैसी लगतीं। कई बार मैं परेशान होकर रो पड़ती।
पहली बार बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में भाग लिया तो चौथे स्थान पर थी
मैंने अपने आप को समझाया कि लोग चाहे जो कहें, मुझे अपने लक्ष्य पर फोकस करना है और वो हासिल कर के दिखाना है, जो मैं चाहती हूं। महज 16 महीनों में ही मैं वो सब करने में कामयाब हुई, जिसे करने में लोगों को सालों लग जाते हैं। 2022 में जब मैंने पहली बार सिक्किम में आयोजित बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया तो मैं चौथे नंबर पर रही। मेरे जिम ट्रेनर और पति मुझे और ज्यादा मोटिवेट और सपोर्ट करने लगे। जो लोग कल तक मुझे ताने दे रहे थे, वो मुझे बधाई देते, उनके लिए मैं गर्व की बात बन गई।
वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए गोल्ड जीतना चाहती हूं
मैं जिम में 7 से 8 घंटे समय देती थी। मैं जिस तरह की बॉडी चाहती थी उसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी अपनी डाइट को मेंटेन रखना। डाइट के अनुसार मुझे हर दो घंटे पर खाना होता था। अधिक से अधिक प्रोटीन से भरपूर चीजे खानी होती थी। मैंने एक साल तक अपनी डाइट मे लिखी चीजों के अलावा कुछ भी नहीं खाया। इसे अचीव करने में मेरे बेटों और हसबैंड ने बहुत मदद की है।
दोनों बेटे मेरी बॉडी को देखकर खुश होते हैं और मेरे मसल्स को छूकर देखते हैं और कभी-कभी छोटा बेटा तो बांहों में लटक तक जाता था। आखिरकार 2023 में मैंने दोबारा मध्यप्रदेश के रतलाम में हुई 13वीं नेशनल सीनियर महिला बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, जहां मैं गोल्ड जीतने में कामयाब रही। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मेरा गोल्ड जीतने का सपना साकार हुआ। ये वो सपना था, जिसे मैंने उस उम्र में देखा और जिया, जब लोग ऐसा करने की सोचते भी नहीं हैं।
मैं हर महिला से ये कहना चाहूंगी, वो जो करना चाहती हैं वो करें। अपने सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी खुद उठाएं। ऐसा ना हो कि मन में कोई कसक रह जाए,कि काश मैंने ये कर लिया होता। मैं फिलहाल एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हुई हूं। मेरी कोशिश रहेगी कि मैं जल्द देश के लिए गोल्ड जीत सकूं।


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