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टट्टी से खाद बनाने पर महिला सरपंच को राष्ट्रपति से पुरस्कार

  • गंदे पानी का उपचार कर सिंचाई में किया उपयोग, भूजल स्तर भी सुधारा
  • 150 शौचालयों के मल को जैविक खाद में बदलकर पंचायत ने की कमाई 

दुर्ग/पाटन/पाटन ब्लाक के पतोरा ग्राम पंचायत की सरपंच अंजिता गोपेश साहू को चार मार्च को नई दिल्ली में स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान मिलेगा। लगभग चार हजार की आबादी वाली पंचायत में बेहतरीन जल और मल प्रबंधन के लिए राष्ट्रपति सावित्री मुर्मु उन्हें पुरस्कृत करेंगी। 26 वर्षीया अंजिता ने साबित कर दिया है कि अवसर मिलने पर जो काम को सम्मान देते हैं, काम भी उन्हें सम्मान दिलाता है।

सरपंच बनने के बाद मात्र तीन वर्ष में अपने काम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में सफल अंजिता ने गांव में उपयोग के बाद व्यर्थ बह जाने वाले बूंद-बूंद पानी का सदुपयोग सुनिश्चित किया तो मल को जैविक खाद में परिवर्तित कर आय का माध्यम भी बना दिया। मलयुक्त पानी के शोधन लिए दो वर्ष पूर्व फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। इस प्लांट से शौचालय के टैंक के गाद से जैकिव खाद बनती है। प्लांट के पानी का श्ुाद्धीकरण कर बगीचे की सिंचाई में उपयोग किया जा रहा है। घरों के स्नानागार व कपड़े की धुलाई के बाद बेकार बहने वाले पानी के साथ ही हैंडपंप के आसपास बहने वाले पानी के लिए गांव में सोख्ता गड्ढे बनाए गए हैं। इससे भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है।

यह है स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान-

स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन के अंतर्गत जमीनी स्तर पर स्वच्छ सुजल भारत के निर्माण में योगदान देने वाली नतृत्वकर्ता महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान दिया जाता है। खुले में शौच से मुक्त गांव, हर घर जल वाले गांव, जल संरक्षण में योगदान आदि क्षेत्रों में योगदान के लिए यह सम्मान दिया जाता है। 

तीन तरह से किया जाता है उपचार

अंजिता ने बताया कि गांव के 150 घरों से शौचालयों से निकले प्रदूषित पानी (ब्लैक वाटर) को फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित किया जा रहा है। इस प्लांट में अब तक छह लाख लीटर ब्लैक वाटर का उपचार किया जा चुका है जिससे पंचायत को दो लाख रूपये की आय हुई है। स्नानागार से निकलने वाले ग्रे वाटर का उपचार त्रिस्तरीय फिल्टर प्लांट में किया जाता है। इसके लिए गांव के तालाब के निकट दो मैजिक पिट और छह जगहों पर सोख्ता गड्ढे बनाए गए हैं। गांव की महिलाएं गोमूत्र यानी येलो वाटर से गोमूत्र अर्क बनाकर आय अर्जित कर रही हैं।


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