जब दुनिया में अश्वेतों के साथ होता था भेदभाव,बड़ी फिल्म मिली तो गोरों ने किया जमकर विरोध, अपनी ही फिल्म के प्रीमियर में आने पर रोका गया ऑस्कर विनर एक्ट्रेस हैटी मैक्डेनियल की संघर्ष भरी ऐसी है कहानी
सोमवार को सुबह 5.30 बजे ऑस्कर अवॉर्ड सेरेमनी होगी। फिल्मी दुनिया के लिए ऑस्कर से बड़ा कोई अवॉर्ड नहीं है। आज हम आपके लिए एक ऐसी ऑस्कर विनर एक्ट्रेस की कहानी लेकर आए हैं, जिसने हॉलीवुड फिल्मों का नक्शा बदलने की शुरुआत की। इस एक्ट्रेस का नाम था हैटी मैक्डेनियल। हैटी ब्लैक यानी अश्वेत थीं। 1930-40 का दौर था, जब दुनिया में अश्वेतों के साथ भेदभाव किया जाता था।
हॉलीवुड फिल्मों में ब्लैक एक्टर्स को सिर्फ नौकरों का ही रोल मिलता था। ना सेट पर कोई सुविधा और ना ही उतना पैसा जितना गोरे कलाकारों को मिलता था। यहां तक कि कपड़े बदलने के लिए भी कोई अलग ड्रेसिंग रूम नहीं होता था। उस दौर में हैटी ने अपना फिल्मी सफर शुरू किया। नौकरों के ही रोल मिले लेकिन उनमें भी जान डाल दी।
नतीजा, 1939 में आई हॉलीवुड की लैंडमार्क रोमांटिक फिल्म गॉन विथ द विंड में नौकरानी के रोल के लिए ही हैटी को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का ऑस्कर अवॉर्ड मिला। इतिहास में पहली ब्लैक कलाकार थी, जिसे ये सम्मान मिला। हैटी ने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया। पिता युद्ध में हारे हुए गुलाम थे। मजदूरी करके घर चलाते थे। हैटी जब पैदा हुईं तो वो कुपोषित थीं, क्योंकि घर की इतनी कमाई भी नहीं थी कि पेटभर खाना मिल सके।
क्लब में नौकरी की, तो वहां वॉशरूम अटेंडर का काम मिला। फिल्मों में आई तो काले रंग के कारण इतना भेदभाव झेलना पड़ा कि जिस फिल्म में इन्होंने काम किया, उसके प्रीमियर में भी उन्हें नहीं जाने दिया गया क्योंकि उस थिएटर में अश्वेतों का आना मना था। हैटी ने 4 शादियां कीं, चारों नाकाम रहीं। एक बार प्रेग्नेंट हुईं लेकिन मिसकरैज के कारण मां नहीं बन पाईं।
पैदा होने से शुरू हुआ काले-गोरे का भेद 1952 में हैटी की मौत तक जारी रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि उन्हें उस कब्रिस्तान में दफनाया जाए जहां गोरे एक्टर्स को दफनाया जाता है, लेकिन इस ख्वाहिश से ही गोरों की भौंहें तन गईं। उन्हें गोरे लोगों के उस कब्रिस्तान तक में जगह नहीं मिली। उनकी मौत के बाद उनका वो ऑस्कर अवॉर्ड भी रहस्यमयी तरीके से चोरी हो गया क्योंकि कई गोरे लोगों को उनका ये अवॉर्ड जीतना रास नहीं आया था।
13 भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं हैटी, कुपोषित पैदा हुई थीं
हैटी मैक्डेनियल का जन्म 1893 को US के विचिटा शहर में हुआ। ये 13 भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। परिवार इतना गरीब था कि उनके खाने-पीने के भी लाले पड़े हुए थे। नतीजतन हैटी कुपोषित पैदा हुईं। उनका वजन आम नवजात बच्चों से काफी कम महज 1.5 किलो था।
कई दिनों तक भूखा रहता था परिवार
हैटी का परिवार सालों तक सिविल वॉर और गुलामी के डर के साए में रहा। इनके माता-पिता सुजैन और हैनरी मिड-एटलांटिक साउथ में पैदा हुए थे, जो गुलाम थे। 1864 को इनके पिता हैनरी सिविल वॉर में शामिल हुए थे, जिसके लिए इन्हें नाशविले की क्रूर जंग में भेजा गया था। जंग के दौरान हैनरी के मुंह की एक हड्डी टूटी थी। जंग के माहौल में सही इलाज ना मिलने पर उनके जख्म खुले रह गए और इंफेक्शन फैल गया।
जंग खत्म हुई तो शरीर कमजोर हो चुका था, लेकिन घर चलाने के लिए हैनरी मजदूरी करते थे। जब 1893 में हैटी का जन्म हुआ तो एक साल बाद परिवार पलायन कर अमेरिका के डेनवर शहर में आ गए। यहां भी गरीबी में इनके परिवार को कई दिनों तक भूखा रहना पड़ता था। कुछ सालों बाद घर का खर्च US गवर्नमेंट से मिलने वाली पेंशन से चलने लगा, लेकिन बाद में डॉक्यूमेंट्स की कमी से वो पेंशन भी बंद हो गई।
जो गोरे, अफ्रीकन का मजाक उड़ाते थे उन्हीं के लिए लिखती थीं गाने
1908 में हैटी ने डेनवर वेस्ट हाई स्कूल में पढ़ाई शुरू की। यहां होने वाले सिंगिंग कॉम्पिटिशन में हैटी ने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद से ही हैटी अपने भाई-बहनों के साथ प्ले में हिस्सा लेने लगीं। इनका भाई ओटिस मिंस्टेल शो नाम की कार्निवाल कंपनी में काम किया करता था। ये अपनी तरह का इकलौता कार्निवाल शो था, जिसमें अमेरिकन लोग अफ्रीकन लोगों की तरह तैयार होकर उनका मजाक बनाते थे।
हैटी भी इनके ड्रामा के लिए बनाए जाने वाले गाने लिखने लगीं। 1916 में भाई की मौत के बाद हैटी ने खुद भी ये काम छोड़ दिया। चंद दिनों के संघर्ष के बाद इन्हें 1920 में रेडियो में गाने की नौकरी मिल गई। हैटी की आवाज इतनी बेहतरीन थी कि इनके गाए गाने रिकॉर्ड किए जाने लगे।
स्टॉक मार्केट क्रैश हुआ तो बाथरूम अटेंडर बनकर किया काम
1929 में स्टॉक मार्केट क्रैश होने से सारे सिंगर्स को नौकरी से निकाल दिया गया, हैटी की भी नौकरी चली गई। परिवार का खर्च उठाने के लिए हैटी ने नाइटक्लब सबर्बन इन में बाथरूम अटेंडर बनकर काम किया। एक दिन उस नाइटक्लब के बंद होने से पहले ही सारे सिंगर्स घर निकल गए। भीड़ परफॉर्मेंस का इंतजार कर रही थी तो हैटी खुद स्टेज पर जाकर गाने लगीं। उनकी परफॉर्मेंस इतनी बेहतरीन थी कि नाइटक्लब के मालिक ने उन्हें ही सिंगर की जगह दे दी। 2 साल बाद ग्रेट डिप्रेशन के समय नाइटक्लब बंद होने से फिर हैटी की नौकरी चली गई।
20 डॉलर पर्स में डालकर पहुंच गई थीं हॉलीवुड
नौकरी जाने पर हैटी ने एक दिन हॉलीवुड जाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी जमापूंजी पर्स में डाली जो महज 20 डॉलर थी और हॉलीवुड के लिए रवाना हो गईं। इनका भाई सैम पहले ही एक्टर था। यहां उन्होंने कभी नौकरानी का काम किया, कभी कुक का। एक रेडियो शो में इनको ‘हे हेट हैटी’ नाम से एक प्रोग्राम मिला, जिसमें वो मालिकों को परेशान करने की बात करती थीं। सैलेरी इतनी कम थी कि रेडियो में प्रोग्राम आने के बावजूद ये मेड की तरह काम करती रहीं।
पहला रोल मिला तो वो भी नौकरानी का
कुछ सालों के संघर्ष के बाद 1937 में हैटी को हॉलीवुड फिल्मों में मजाकिया नौकरानियों के रोल दिए जाने लगे। हॉलीवुड फिल्मों में इस तरह के रोल करना लोग अपमानजनक समझते थे, लेकिन हैटी ये रोल खुशी-खुशी करने को तैयार थीं। ब्लैक कम्यूनिटी के लोगों ने भी इनको मिलने वाले ऐसे रोल्स का विरोध किया। ब्लैक कम्यूनिटी के लोग चाहते थे कि हैटी ये रोल न करें।
बड़ी फिल्म मिली तो गोरों ने किया जमकर विरोध
1939 की फिल्म गॉन विद द विंड में हैटी मैक्डेनियल को मैमी नाम की एक नौकरानी का रोल मिला। फिल्म की हीरोइन ब्रिटिश विवियन लीग थीं। फिल्म की कास्टिंग से ही रंगभेद पर बड़ी बहस छिड़ गई। मालकिन गोरी और सारी नौकरानियां ब्लैक। कई विवादों के बाद फिल्म बनना शुरू हुई। हैटी के अलावा फिल्म में बटरफ्लाई मैक्क्वीन नाम की ब्लैक एक्ट्रेस भी थीं, जिन्हें भी नौकरानी का रोल दिया गया था।
जब उन्होंने अपने रोल के खिलाफ आवाज उठाई और कहा कि हीरोइन को उन्हें थप्पड़ मारने के लिए माफी मांगनी चाहिए तो उल्टा उन्हीं की लाइन्स कम कर दी गईं। मैक्डेनियल ये देखकर बटरफ्लाई को खींचकर एक तरफ ले गईं और कहा, ऐसा मत करो वरना तुम दोबारा कभी हॉलीवुड में काम नहीं कर सकोगी।
ये वो दौर था जब हॉलीवुड में रंगभेद चरम पर था। हॉलीवुड में गिने-चुने ही ब्लैक कलाकार थे, जिन्हें ज्यादातर नौकरों का या गुंडों का ही रोल दिया जाता था। इनमें ज्यादातर या तो नौकरों के रोल होते या ऐसे लोगों का जिनका मजाक बनाया जाता था। हालात इतने बदतर थे कि लंबे रोल मिलने के बावजूद ब्लैक आर्टिस्ट को मेकअप रूम तक में जगह नहीं दी जाती थी, जबकि दूसरे आम कलाकारों के लिए भी ड्रेसिंग रूम बनाए गए थे।
अपनी ही फिल्म के प्रीमियर में आने पर रोक, क्योंकि गोरों के साथ बैठने की इजाजत नहीं थी
फिल्म गॉन विद द विंड का प्रीमियर 15 दिसंबर 1939 को अटलांटा में हुआ। हैटी मैक्डेनियल को अपनी ही फिल्म के प्रीमियर में आने से रोका गया, क्योंकि उन्हें गोरों के साथ होटल में जाने और ठहरने की इजाजत नहीं थी। फिल्म के प्रीमियर में 3 लाख लोग पहुंचे थे, जिनकी भीड़ 11 किलोमीटर तक थी।
मेयर ने कांपती आवाज में की थी ब्लैक आर्टिस्ट की तारीफ
4 घंटे की मूवी खत्म होने के बाद अटलांटा के मेयर विलियम हार्ट्सफील्ड स्टेज पर गए और उन्होंने कांपती आवाज में पूरी कास्ट को स्टेज पर बुलाया और उनकी तारीफ की। न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट में लिखा, मेयर ने स्टेज से ही नीग्रो मेंबर्स के लिए तालियां बजवाईं, लेकिन वहां कोई भी ब्लैक आर्टिस्ट मौजूद नहीं था, क्योंकि उस थिएटर में गोरों के साथ उन्हें बैठने की अनुमति नहीं थी।
ऑस्कर सेरेमनी में एक कोने में बैठाया क्योंकि VIP टेबल सिर्फ गोरों के लिए था
29 फरवरी 1940 को 12वीं ऑस्कर सेरेमनी का आयोजन हुआ। नीली गाउन पहने और बालों में सफेद गार्डिनियर फूल लगाए हैटी मैक्डेनियल सेरेमनी में पहुंचीं तो उन्हें VIP टेबल में बैठने से रोक दिया गया, जबकि फिल्म की दूसरी कास्ट वहीं बैठी थी। ब्लैक थीं तो उन्हें बॉल रूम में सबसे पीछे तरफ कोने में एक छोटा सा टेबल दिया गया।
ऑस्कर स्पीच देते हुए रो पड़ीं हैटी
12वीं ऑस्कर सेरेमनी में गॉन विद द विंड फिल्म में मैमी के रोल के लिए हैटी मैक्डेनियल को बेस्ट सपोर्टिंग रोल के लिए ऑस्कर अवॉर्ड मिला। अवॉर्ड लेते हुए हैटी भावुक हो गईं और कहा, ये मेरी जिंदगी के सबसे खुशी के पलों में से एक है। मैं उम्मीद करती हूं कि मुझे मेरी कम्यूनिटी और मोशन पिक्चर के इतिहास में हमेशा याद रखा जाए। ये कहते हुए मेरा दिल भर गया है कि मैं क्या महसूस कर रही हूं। मुझे शुक्रिया कहने दें। इतना कहते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए और आंसू पोछते हुए स्टेज से उतर आईं। उनकी फिल्म गॉन विद द विंड को 20 में 8 ऑस्कर अवॉर्ड मिले थे।
दो पतियों की हुई थी मौत
हैटी मैक्डेनियल ने 19 जनवरी 1911 को डेनवर में हावर्ड हिकमैन से पहली शादी की थी। इस शादी से वो खुश थीं, लेकिन 4 साल बाद ही 1915 में उनके पति की मौत हो गई। 7 साल बाद हैटी ने 1922 में जॉर्ज लैंगफोर्ड से दूसरी शादी की थी। शादी के 3 साल बाद ही उनके पति की गोली लगने से मौत हो गई। ये वो समय था जब हैटी का करियर पीक पर था।
मां बनने वालीं थीं हैटी मैक्डेनियल, मिसकैरेज से टूट गईं
21 मार्च 1941 को हैटी ने रियल स्टेट के सेल्समैन जेम्स लेलॉय्ड क्रोफोर्ड से तीसरी शादी की। बुक बोल्ड ड्रीम्स में राइटर डोनाल्ड बोगल ने लिखा कि शादी के 4 साल बाद हैटी प्रेग्नेंट हुई थीं। उन्होंने बच्चे के कई कपड़े खरीदे थे और घर में एक नर्सरी भी तैयार करवाई थी। मैक्डेनियल बहुत खुश थीं और आने वाले बच्चे के लिए तैयारियां करती थीं, लेकिन अचानक मिसकैरेज होने से वो बुरी तरह टूट गईं। 51 साल की हैटी ने रंगभेद और फिल्म इंडस्ट्री में हर कदम पर दुखों का सामना मजबूती से किया, लेकिन बच्चे को खोने से वो डिप्रेशन में थीं। इसके बाद वो कभी मां नहीं बनीं। इसी साल 1945 में उन्होंने जेम्स से तलाक ले लिया। हैटी कहती थीं कि उनका पति उनकी कामयाबी से चिढ़ता था।
55 साल की उम्र में की चौथी शादी, 5 महीने में टूटी
11 जून 1949 को हैटी ने इंटीरियर डेकोरेटर लैरी वियिम्स से चौथी शादी की। चंद हफ्तों बाद ही दोनों के झगड़े शुरू हो गए। फिल्मों से दूरी बनाकर हैटी रेडियो में नौकरी करने लगी थीं, जहां उनका खुद का एक शो चलता था। उनके पति लैरी उनके काम में दखल देने लगे थे और उनके दोस्तों को उन्हीं के खिलाफ भड़काते थे। 5 महीनों में ही हैटी ने उनसे तलाक ले लिया। तलाक की सुनवाई के दौरान हैटी फूट-फूंटकर रोईं और उन्होंने बताया कि वो अंदर से इस कदर टूट चुकी हैं कि वो सो भी नहीं पातीं, न ही अपनी लाइन्स पर फोकस कर पाती हैं। पति से अलग होने के बाद हैटी ने अकेलेपन में गुजारा किया, जिसके गवाह उनके कई दोस्त रहे।
1942 की फिल्म इन दिस आवर लाइफ में कैरेक्टर रोल प्ले किया, लेकिन रंगभेद के चलते हैटी को दे मेल एनिमल (1942), सिंस यू वेंट अवे (1944) जैसी फिल्मों में नौकरानियों के ही रोल मिलते रहे। फैमिली हनीमून (1949) इनके करियर की आखिरी फिल्म रही, हालांकि इस फिल्म में उनका कोई खास रोल नहीं था।
1949 के बाद हैटी मैक्डेनियल ने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया। आगे इन्होंने रेडियो में काम किया। ये पहली ब्लैक एक्टर थीं, जिन्होंने अपने रेडियो शो ब्यूलाह पर बने टीवी शो में खुद काम किया। इस शो के लिए उन्हें हर हफ्ते 2000 डॉलर फीस मिलती थी। US आर्मी के विरोध के बाद इस शो को भी ब्लैक लोगों की इमेज खराब करने के आरोप में एशिया में बैन कर दिया गया।
ब्रेस्ट कैंसर होने के बाद इतनी कमजोर हो गईं कि परफॉर्म नहीं कर सकीं
1951 में डायबिटीज में कॉम्प्लिकेशन आने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। हैटी का शरीर इतना कमजोर हो चुका था कि वो चाहकर भी काम नहीं कर सकती थीं। एक साल तक चले इलाज के बाद 26 अक्टूबर 1952 को हैटी का ब्रेस्ट कैंसर से निधन हो गया।
विल में कही थीं दो आखिरी ख्वाहिशें
हैटी मैक्डेनियल ने अपनी विल में दो इच्छाएं जाहिर की थीं। पहली इच्छा कि उनके ऑस्कर अवॉर्ड को हावर्ड यूनिवर्सिटी को सौंप दिया जाए और दूसरी कि उन्हें हॉलीवुड कब्रिस्तान में दफनाया जाए, जहां आज तक किसी ब्लैक इंसान को नहीं दफनाया गया था। कब्रिस्तान में ब्लैक लोग पूरी तरह बैन थे, ऐसे में उनकी आखिरी ख्वाहिश पूरी नहीं की जा सकी।
कब्रिस्तान द्वारा उनकी इच्छा खारिज किए जाने के बाद हैटी को एंजेलिस रोजडेल कब्रिस्तान में दफ्नाया गया। इनके अंतिम संस्कार में 3000 लोग शामिल हुए थे, जिनमें हॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां भी शामिल थीं।
ऑस्कर अवॉर्ड हुआ चोरी
हैटी की इच्छानुसार उनका ऑस्कर अवॉर्ड हावर्ड यूनिवर्सिटी को सौंप दिया गया, जहां इसे एक शोकेज में डिस्प्ले किया गया। 1970 में एक दिन अचानक उनका अवॉर्ड यूनिवर्सिटी से चोरी हो गया था। अवॉर्ड कैसे चोरी हुआ ये आज भी एक रहस्य है। 70 के दशक में सिविल राइट मूवमेंट चरम पर था। कहा जाता है कि ब्लैक लोग हैटी द्वारा निभाए गए नौकरानियों के रोल से नाखुश थे, वहीं गोरे उनकी अचीवमेंट से खास खुश नहीं थे।
एक इंटरव्यू में हैटी ने कहा था, मुझे कभी अपने द्वारा निभाए गए रोल पर कोई शर्मिंदगी नहीं हुई। मैंने ब्लैक लोगों को गर्व महसूस करवाया है।


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