जल जीवन मिशन में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा में, पीएचई मंत्री रूद्र कुमार से पूछा कि जांच में स्वीकार किया गया है कि गहराई और पाइप की गुणवत्ता में कमीं पाई गई तो कार्रवाई कब, मंत्री ने कहा - जांच जारी
बिलासपुर/ पीएचई के विवादित ईई एसके चंद्रा के टेंडर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा में फिर उठा। विपक्ष के नेताओं ने विभागीय मंत्री रूद्र कुमार को कार्रवाई करने को लेकर विधानसभा में घेरा। पहली बार दिसंबर में हुए शीतकालीन विधानसभा सत्र में विपक्ष के नेताओं ने इस मामले पर हंगामा किया था। गुरुवार को हुए विधानसभा सत्र में एक सवाल के जवाब में विभागीय मंत्री ने अधिकारी को निलंबित करने की जानकारी दी पर विपक्ष के नेता कार्रवाई पर अड़ गए।
विधानसभा में बेलतरा विधायक रजनीश सिंह ने बिलासपुर जिले में जल जीवन मिशन के अधूरे कामों का मुद्दा उठाया। उन्होंने पीएचई मंत्री रूद्र कुमार से पूछा कि जांच में स्वीकार किया गया है कि गहराई और पाइप की गुणवत्ता में कमीं पाई गई, इसके जांच करने वाले अधिकारी कौन है और किन अधिकारियों ने भुगतान किया है? सवाल के जवाब में विभागीय मंत्री ने जवाब दिया कि विभिन्न स्थानों पर जांच के आधार जहां-जहां गड़बड़ी पाई गई उसके आधार पर तत्कालीन ईई को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। जवाब पर फिर से बेलतरा विधायक ने कहा मैं तो केवल पाइंटेड प्रश्न का जवाब चाह रहा हूं। विभागीय मंत्री ने फिर जवाब दिया कि कार्रवाई होने के बाद बचा क्या है।
सिविल लाइन में एफआईआर के लिए शिकायत
एनएसयूआई ने 2 जनवरी और उसके बाद 4 जनवरी को शिकायत दर्ज कराई, जिसमें भ्रष्टाचार और सरकारी की छवि खराब करने वाले अधिकारियों में तत्कालीन ईई एसके चंद्रा, अधीक्षण अभियंता रूपकुमार गेंदले और इंजीनियर इन चीफ टीजी कोसरिया की शिकायत करते हुए एफआईआर करने की मांग की गई थी।
टीआई ने कहा, जांच रिपोर्ट आने पर करेंगे अपराध दर्ज
इस मामले में सिविल लाइन टीआई परिवेश तिवारी ने कहा कि शिकायत के आधार पर विभाग से जवाब मांगा गया था, जिसमें उन्होंने सूचना दी कि जवाब उच्च कार्यालय को भेज दिया गया है। यदि जांच रिपोर्ट उच्च कार्यालय से भेजी जाती है, तब हम अपराध कायम कर देंगे।
हमने सही जानकारी भेजी
विभाग के वर्तमान ईई यूके राठिया ने कहा कि विधानसभा में जानकारी भेजने में पूरी सतर्कता बरती गई है। कोई टेक्निकल स्टॉफ नहीं होने की वजह से ही रिटायर्ड कर्मचारी नरेंद्र पिंंपल खरे से बीच-बीच में पूछा जाता है वह भी पूरी तरह सावधानी से। किसी को फायदा पहुंचाने के लिए अतिरिक्त समय देकर टेंडर भरवाया जाता है, लेकिन ऐसा हमारे स्तर पर फिलहाल नहीं है।
जानिए क्या था पूरा मामला
जल जीवन मिशन में निकाले गए टेंडरों में शासन के नियमों का पालन नहीं करते हुए गड़बड़ी की गई जिसका खुलासा होने के बाद विधानसभा में भी मामला उठा। विधानसभा में जानकारी मंगाने पर तब झूठी जानकारी भेजी गई और जनसंपर्क विभाग से सफाई के तौर पर सही काम का प्रचार भी कराया गया। तब गड़बड़ी में दोषी पाते हुए शासन ने तत्कालीन ईई एसके चंद्रा को निलंबित कर दिया। इसके बाद विभाग के एमडी भी मौके में जांच पर आए। ईएनसी को भी नोटिस दिया गया और टेंडर सेल प्रभारी पर भी कार्रवाई की गई।
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