ज्यादा सब्सिडी लेकर कम सेस चुकाने के लिए कारोबारियों ने विभागों के साथ बनाया ऐसा तंत्र की एक ही फर्म के दो सर्टिफिकेट एक ही दिन में जारी
रायगढ़/ कारोबारियों ने अपने सीए के साथ मिलकर सरकार को बेवकूफ बनाया है। कई मामले एक के बाद एक उजागर हो रहे हैं। एक ऐसा भी मामला आया है जिसमें एक ही फर्म के दो सर्टिफिकेट एक ही दिन में जारी किए गए। लेकिन दोनों की लागत में बहुत अंतर है। उद्योग विभाग, पर्यावरण विभाग और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के बीच कारोबारियों ने एक ऐसा तंत्र बनाया है कि उनके प्रस्तुत दस्तावेजों का वेरीफिकेशन किए बिना ही सब्सिडी फाइलें पास कर दी जाती हैं। तीनों विभागों में कारोबारी को सीए सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होता है जिसके आधार पर सेस और सब्सिडी की गणना होती है। बीते सालों में ऐसे अनगिनत फर्म हैं जिन्होंने सेस देने के लिए लागत कम दिखाई है लेकिन सब्सिडी लेते समय इसे दो-तीन गुना बढ़ा दिया है।
अब एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हैरान कर दिया है। चार्टर्ड एकाउंटेंट ने एक ही दिन एक ही फर्म के लिए दो सर्टिफिकेट बनाए। दोनों में लागत अलग-अलग कर दी। सीए बालकिशन केडिया ने श्री कृष्ण कोल्ड स्टोरेज डुमरमुड़ा के लिए 29 मई 2019 को एक सर्टिफिकेट जारी किया जिसमें लगभग 2.55 करोड़ लागत दिखाई गई। उसी डेट पर सीए ने एक और सर्टिफिकेट दिया जिसमें लागत को 1.39 करोड़ निवेश बताया। ज्यादा लागत वाले सर्टिफिकेट को उद्योग विभाग में प्रस्तुत किया गया जबकि कम लागत वाले को पर्यावरण विभाग और आईएचएसडी में प्रस्तुत किया गया। इस पर सब्सिडी भी ले ली गई। यह एक बहुत बड़ा खेल है क्योंकि इतने सालों से ज्यादातर फर्मों ने यही कलाकारी की है। तीनों विभागों ने भी आंख मूंदकर फाइलें पास कीं।
- सब्सिडी से ही लागत वसूली
यह करोड़ों का खेल है जिसमें कई सरकारी मुलाजिम भी शामिल हैं। ऐसी गड़बड़ी का अंदेशा भी जताया गया था लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। तीनों विभागों ने भी इस खेल को ऐसे ही चलने दिया है। प्रोजेक्ट लागत कम होती है लेकिन डीआईसी में बढ़ाकर दिखाया जाता है। मान लो एक करोड़ की वास्तविक लागत है लेकिन डीआईसी में दो करोड़ बताया गया। एक करोड़ के हिसाब से एक लाख रुपए सेस दिया गया। जबकि दो करोड़ के 35 प्रश के हिसाब से 70 लाख रुपए सब्सिडी ले ली गई। इस तरह से वास्तविक लागत का 70 प्रश सब्सिडी से वसूल लिया गया।

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