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राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों पहाड़ी कोरवाओं को एक दिन में ही इलेक्ट्रिशियन की ट्रेनिंग देकर एनजीओ ग्रामीण साक्षरता सेवा संस्थान द्वारा 9 लाख 45 हजार रुपए का फर्जीवाड़ा किया, ट्रेनिंग में मृत भी शामिल

अंबिकापुर/ राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए शासन द्वारा हर कोशिश की जा रही है। ताकि ये रोजगार से जुडें और अपनी दशा व दिशा को बदलें। लेकिन रोजगार दिलाने के नाम पर केवल इन्हें ठगा जा रहा है। ऐसा ही एक मामला सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड से आरटीआई से मिली जानकारी में सामने आया है। क्षेत्र के 27 पहाड़ी कोरवाओं को इलेक्ट्रिशियन की ट्रेनिंग देने के नाम पर एनजीओ ग्रामीण साक्षरता सेवा संस्थान द्वारा 9 लाख 45 हजार रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया। कार्य एजेंसी द्वारा पहाड़ी कोरवाओं को दो-दो समोसा खिलाकर और उनका फोटो खिंचवा कर प्रशिक्षण पूरा कर लिया गया है। इसमें भी खास बात यह है कि ट्रेनिंग पाने वालों में कई 70 व 80 वर्ष के वृद्ध व एक मृत व्यक्ति भी शामिल है।

मामला सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम घोघरा का है। वर्ष 2020 में कौशल विकास योजना के तहत पहाड़ी कोरवा युवाओं को इलेक्ट्रिशियन की ट्रेनिंग देने के लिए शासन द्वारा 9 लाख 45 हजार रुपए स्वीकृत किए गए थे। इसके लिए कार्य एजेंसी एनजीओ ग्रामीण साक्षरता सेवा संस्थान के संचालक थबीरो राम बारिक को बनाया गया था।

एनजीओ को प्रत्येक कोरवा युवा को प्रशिक्षण देने के हिसाब से 35 हजार की राशि प्राप्त हुई थी। लेकिन ग्राम घोघरा के २७ लोगों की लिस्ट तैयार कर मात्र 1 दिन का प्रशिक्षण देकर खानापूर्ति कर ली गई थी। एनजीओ द्वारा पहाड़ी कोरवाओं को 2-2 समोसा खिलाकर और उनकी फोटो खिंचवाकर प्रशिक्षण पूरा कर लिया गया था।

इसमें भी खास बात यह है कि ट्रेनिंग पाने वालों में कई 70 व 80 वर्ष के वृद्ध हैं। वहीं एक मृत व्यक्ति के नाम पर भी ट्रेनिंग दे दी गई है। उक्त मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता अभय नारायण पांडेय द्वारा लगाए गए सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों से हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी शिकायत कलेक्टर और संबंधित थाने में की है। पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है।

ट्रेनिंग पाने वालों में मृतक भी

आरटीआई दस्तावेज में खुलासा हुआ है कि ट्रेनिंग पाने वालों में युवाओं के साथ-साथ 60 से 80 वर्ष के वृद्ध भी शामिल हैं। इलेक्ट्रिशियन की ट्रेनिंग पाने वालों में शोतल राम का नाम भी शामिल है, जिसका निधन हो चुका है। वहीं प्रशिक्षण 45 दिन तक देना था लेकिन एनजीओ द्वारा मात्र 1 दिन का प्रशिक्षण देकर पूरी राशि निकाल ली गई है।

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