मनरेगा में 6 करोड़ की गड़बड़ी में जाँच पूरी भी नहीं हुई और आरोपी को पीसीसीएफ ने रिटायरमेंट से पहले किया बहाल
बिलासपुर/ गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के चर्चित मनरेगा घोटाले के आरोपी तत्कालीन रेंजर गोपाल प्रसाद जांगड़े को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल राकेश चतुर्वेदी ने अपने सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले बहाल कर रतनपुर रेंज में पदस्थ कर दिया था, जबकि इस मामले में विभागीय जांच चल रही है। चतुर्वेदी हाल ही में रिटायर हुए हैं। बता दें कि इसकी शिकायत बहुजन समाज पार्टी के देव कनेरी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ शासन से की है।
मामले में विधानसभा से जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ समेत 15 अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित किया था। मरवाही वन मंडल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत स्वीकृत कार्यों में गड़बड़ी की गई थी। मार्च 2022 के बजट सत्र में विधायक गुलाब कमरो ने मामला विधानसभा में उठाया था।
मरवाही वन मंडल के ग्राम चुकतीपानी, ठाड़पथरा, पकरिया, केंवची, पडवनिया व तराईगांव में मनरेगा के तहत स्वीकृत 33 स्टॉप डेम और पुलिया निर्माण कराए बिना ही पैसे निकाल लिए गए, इससे शासन को 6 करोड़ रुपए का नुकसान होने का खुलासा हुआ। सदन में पूर्व पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने 21 मार्च 2022 को जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ समेत 15 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबित करने की घोषणा की थी।
दूसरे को प्रभार देने का आदेश दिया गया है
"एक मामले में रेंजर को निलंबित किया गया था, लेकिन उससे वित्तीय प्रभार वापस लेने का निर्देश दिए हैं। उनके स्थान पर दूसरे को प्रभार देने का आदेश दे दिया है।" - संजय शुक्ला, पीसीसीएफ, वन विभाग

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