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मानगुरु पहाड़ पर 4 साल पहले कोसा फल के लिए की गई थी कटाई, पहले 7876 ठूंठ मिलने की जानकारी दी गई बाद में 3994 पेड़ कटना ही बताया गया; रेंजर, डिप्टी रेंजर और 4 बीट गार्ड के खिलाफ कार्रवाई

कोरबा/ कटघोरा वन मंडल के एतमानगर रेंज में मानगुरु पहाड़ पर 4 साल पहले कोसा फल के लिए हजारों पेड़ों की कटाई की थी, जिसमें रेंजर, डिप्टी रेंजर और 4 बीट गार्ड के खिलाफ कार्रवाई की गई। तत्कालीन एसडीओ और वर्तमान कटघोरा डीएफओ प्रेमलता यादव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं पहले 7876 ठूंठ मिलने की जानकारी दी गई। बाद में 3994 पेड़ कटना ही बता दिया। अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से शिकायत के बाद फिर से जांच का आदेश दिया है।

मानगुरु पहाड़ में पेड़ कटाई का मामला सुर्खियों में वर्ष 2019 में आया था। मामले की जांच के लिए राज्य शासन ने अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक तपेश कुमार झा की अध्यक्षता में टीम गठित की। जांच में यह पाया गया कि जो रिपोर्ट वन मंडल से दी गई थी, उसमें ही भारी अंतर पाया गया। 8 महीने पहले से पेड़ कटाई हो रही थी, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी।

लकड़ी की मात्रा में भी भारी अंतर पाया गया। यही नहीं तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर स्तर से पेड़ों की गणना की पुष्टि तक नहीं की गई। वन अफसरों ने ही पहले 1227 घन मीटर लकड़ी से 631 घन मीटर होना बता दिया। जांच अधिकारी ने तत्कालीन एसडीओ प्रेमलता यादव के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की, लेकिन मामले को दबा दिया गया। यही नहीं प्रमोशन के बाद प्रेमलता यादव वर्तमान में कटघोरा डीएफओ के पद पर पदस्थ हैं।

10 हजार पेड़ काटे और 5 करोड़ का कोसा फल बर्बाद

जांच टीम ने पाया कि आसपास के लोगों ने ही कोसा फल को कटघोरा और कोरबा के व्यापारियों को बेचा है। 100 कोसा प्रति पेड़ के हिसाब से लगभग 10 हजार पेड़ों की कटाई का अनुमान लगाया गया है। इसकी कीमत 5 करोड़ों रुपए हो सकती ह,। लेकिन वन अफसरों ने इसका आंकलन भी नहीं किया और व्यापारियों को भी छोड़ दिया।

एसडीओ की भूमिका भी नहीं बताई , बाकी पर कार्रवाई

जांच में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि पेड़ कटाई के मामले मैं एसडीओ वन की भूमिका ही नहीं बताई गई है। एसडीओ को भी जंगल का निरीक्षण करना होता है लेकिन जवाबदारी और कोई कार्रवाई नहीं करने पर जांच टीम ने कार्रवाई की अनुशंसा की है।

रेंजर समेत इन कर्मचारियों के खिलाफ हुई थी कार्रवाई

पेड़ कटाई के मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने तत्कालीन रेंजर आरएस राठिया के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की थी। इसके अलावा डिप्टी रेंजर अजय कुमार साय, फॉरेस्ट गार्ड प्रीतम , पंकज खैरवार, दिनेश राजपूत और दिलीप आकुरे का निलंबन किया था।

पेड़ कटाई व पीओआर जारी करने में 10 माह का अंतर

जांच में पाया गया है कि वन अफसरों ने अपने प्रतिवेदन में बताया कि सितंबर से नवंबर 2018 के बीच पेड़ों की कटाई की गई है। लेकिन पीओआर जून 2019 में जारी कर कार्रवाई की गई। इसी में ही 10 माह का अंतर पाया गया है। इसका कारण भी स्पष्ट नहीं किया गया।

सीधी बात - प्रेमलता यादव, डीएफओ

शिकायत हुई है, कोई भी जांच के लिए तैयार

मानगुरु पहाड़ पेड़ कटाई के मामले में फिर से जांच होगी क्या?

- शिकायत की गई है। उस समय जांच रिपोर्ट भी दी थी। अब जांच होती है तो उसके लिए भी तैयार हैं।

इतनी संख्या में पेड़ कट गई लेकिन बाद में पता चलने का उल्लेख है?

- परिसर में बीट गार्ड होते हैं। उन्होंने ही समय पर इसकी जानकारी नहीं दी।

आपके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी लेकिन नहीं हुई?

- मुझे किसी प्रकार का कोई नोटिस नहीं मिला है। जांच तो शासन स्तर से भी होगी। आगे यदि किसी प्रकार की कोई जानकारी होगी तो बताएंगे।

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