जांजगीर जिले का बहेराडीह गांव में देश का पहला किसान स्कूल- भाजी और धान की 36 किस्मों का कराया पेटेंट, ऑस्ट्रेलियाई केंचुए जो 262 रुपए किलो के हिसाब से बेचते हैं और खाद का भी उत्पादन होता है यहाँ
जांजगीर-चांपा जिले का बहेराडीह गांव पूरे देश में इसलिए पहचाना जाने लगा है, क्योंकि यहां देश का पहला किसान स्कूल है। खास बात ये है कि छत्तीसगढ़ की 36 किस्म की भाजियों और धान का इस स्कूल को चलाने वाले किसान ने पेटेंट करवा लिया है। जितने भाजियों और धान की वैरायटियों का पेटेंट करवाया गया, सभी की खेती स्कूल की छत पर गमलों में की जा रही है। इनमें चौलाई, अमारी और चेंच जैसी भाजियां हैं।
इस स्कूल ने अमारी, चेंच और केले के छिलके से बने धागों से जैकेट और राखियां तक बनाई हैं। किसान दीनदयाल यादव आसपास के किसानाें और महिला समूहों को जैविक खेती का प्रशिक्षण देतें हैं। उन्होंने बताया कि यहां बनी हुई जैविक खाद न केवल सब्जियों, बल्कि मुनगा, नींबू, आम और पपीते की खेती में भी काफी लाभ पहुंचा रही है।
यादव ने दावा किया कि रासायानिक खाद की तुलना में जैविक खाद से दोगुना उत्पादन होता है। वैसे तो किसान दीनदयाल 2010-11 से सब्जियों पर नए खोज कर रहे हैं, लेकिन 23 दिसंबर 2021 को उन्होंने गांव में किसान स्कूल ही खोल लिया। 2022 में इस स्कूल का नामकरण जांजगीर क्षेत्र के पत्रकार स्व. कुंजबिहारी साहू के नाम पर रखा गया है।
2021 को किसान स्कूल की स्थापना
23 दिसंबर 2021 को किसान दिवस के मौके पर जांजगीर जिले के ग्राम बहेराडीह में किसान स्कूल की स्थापना की गई। कृषि विभाग के सहयोग से यहां फसलों और सब्जियों की खेती के लिए नए-नए प्रयोग किए जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया से आधा किलो केंचुआ मंगाया, अब क्विंटलों वर्मी कंपोस्ट
किसान दीनदयाल ने बताया 2012 में कृषि विभाग की ओर से वर्मी कंपोस्ट बनाने सैंपल के रूप में आधा किलो ऑस्ट्रेलियन केंचुआ आइसेनिया पोटिटा दिया गया। इसके बाद पहले तो केंचुए का उत्पादन किया गया। अभी तक 12 क्विंटल से अधिक केंचुआ बेचे जा चुके हैं। इससे 10 लाख से अधिक की कमाई हो चुकी है। इस केंचुए से वर्मी कंपोस्ट बनाकर करीब 8 लाख रुपए के खाद बेचे गए हैं। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलियन केंचुआ और इससे बने वर्मी कंपोस्ट को प्रदेश के सरकारी गोठानों में सप्लाई कर रहे हैं। सबसे अधिक डिमांड कोरबा से है। बीज विकास निगम के रेट के अनुसार 262 रुपए किलो के हिसाब से केंचुआ और 10 रुपए किलो के हिसाब से खाद बेची जा रही है। इससे पैदावार बढ़ी है, इसलिए मांग ज्यादा है।
यूएस-ऑस्ट्रेलिया से आ चुके किसान
किसान स्कूल के संस्थापक सदस्य दीनदयाल यादव का कहना है कि सब्जियों और धान की खेती के संबंध में जानकारी के लिए 18 मार्च को अमेरिका से किसान आएंगे। जैविक खेती पर रिसर्च करने के लिए आस्ट्रेलिया के किसान कृष और उनकी पत्नी मेरीलीना 2013 में ही यहां आ चुके है। तब यहां किसान स्कूल नहीं बना था। उस वक्त किसान दीनदयाल समूह के माधम से जैविक खेती पर काम रहे थे। 2013 में ही आस्ट्रेलिया के कृषक भी रिसर्च करने यहां आए थे। दोनों देशों के किसान यहां की जैविक खेती से खासे प्रभावित हुए थे। आज वहां भी अलग-अलग संस्थाओं के माध्यम से जैविक खेती पर जोर देने किसानों को ट्रेंड किए जा रहे हैं।
किसान स्कूल देशभर में माॅडल
बहेराडीह का किसान स्कूल न केवल प्रदेश बल्कि देश के लिए भी मॉडल है। यहां न केवल 36 प्रकार के सब्जियों का पेटेंट कराया गया है, बल्कि आस्टे्लिय केंचुए और खाद का उत्पादन, गौमूत्र से कीटनाशक बनाए जाले से लेकर प्रयोग के तौर पर 4 लेयर सिस्टम से सब्जियों और फलों की खेती भी की गई है।


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