सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

रिंगरोड के किनारे डंप हो रहे राखड़ आने जाने वालों को बीमार बना रहे; रिंगरोड के किनारे रहने वाले लोग 24 घंटे घरों के दरवाजे को बंद रखते हैं

कोरबा/ जानलेवा प्रदूषण ... जिसे उद्योग, ट्रांसपोर्टर और जिला प्रशासन के अफसर आम लोगों के झोली में हर दिन डाल रहे हैं। सड़क और सड़क के किनारे डंप राखड़ के छोटे-छोटे ढेर लोगों को बीमार बना रहे हैं। स्थिति सुधरने के बजाए बद् से बद्तर होती जा रही है।

रिस्दी से लेकर बरबसपुर तक रिंगरोड पर राखड़ का गुबार इतना अधिक है कि पैदल या फिर बाइक पर चलना तो अब मुश्किल हो गया है। यही नहीं रिंगरोड के किनारे रहने वाले लोग 24 घंटे घरों के दरवाजे को बंद करके रखते हैं। घर के बाहर साफ हवा तक नसीब नहीं हो रही है।

मौसम में बदलाव आते ही हल्की हवा चलनी शुरु हो गई है। जरा सी हवा चलते ही राखड़ की आंधी चलनी शुरु हो जाती है। इसके सबसे बड़े जवाबदार हैं ट्रांसपोर्टर। ट्रांसपोर्टर सड़क किनारे राखड़ डंप कर दे रहे हैं। यही नहीं बगैर त्रिपाल ढंके हो रहे परिवहन की वजह से ब्रेकर या फिर जहां सड़क खराब है वहां पर राखड़ गिरकर जमा हो जा रहा है।

कई जगहों पर अधिक मात्रा में डंप, मिट्टी फिलिंग नहीं

रिंगरोड के किनारे कई जगहों पर अधिक मात्रा में राखड़ डंप किया गया है, लेकिन राखड़ डालने के बाद मिट्टी फिलिंग नहीं किया गया है। इस वजह से रिंगरोड के आसपास के कई गांव में राख की मोटी परत बिछने लगी है। ग्रामीण भी इसे लेकर खासे परेशान हो चुके हैं।

रिंगरोड पर पानी के छिड़काव में अफसरों की रुचि नहीं

पर्यावरण संरक्षण मंडल, राजस्व विभाग, नगर निगम, जिला प्रशासन के अफसर अच्छी तरह से वाकिफ हैं रिंगरोड पर राखड़ की समस्या बढ़ गई है, लेकिन किसी भी जिम्मेदार विभाग द्वारा यह प्रयास नहीं किए जा रहे हैं कि रोड पर नियमित पानी का छिड़काव हो सके। आम लोगों की समस्या कुछ हद तक कम करने को लेकर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

प्रदूषण का ग्राफ इतना बढ़ रहा, कार्रवाई क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल तो यही उठ रहा है कि प्रदूषण का ग्राफ इतना अधिक बढ़ चुका है, लेकिन किसी भी मामले में कार्रवाई करने से अफसर पीछे हट रहे हैं। राखड़ की ओवरलोडिंग पर आरटीओ जांच नहीं करता। बगैर त्रिपाल ढंके परिवहन पर पर्यावरण विभाग चालान नहीं करता। राजस्व विभाग सरकारी जमीन और सड़क किनारे राखड़ पाटने के मामले में चुप्पी साधे रहता है। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। हर बार विभाग चुप्पी साधे रहता है। विभाग की इस रवैये की वजह से आम लोगों में नाराजगी है।

रिंगरोड के किनारे निजी जमीन पर राखड़ पाटने की अनुमति धड़ल्ले से दी जा रही

रिंगरोड के किनारे एक दर्जन जगहों पर राखड़ पाटने की अनुमति दी गई है। जबकि ये क्षेत्र लो लाइन एरिया में नहीं आता। पूर्व में इस तरह की अनुमति पर सवाल उठे थे। अब फिर से कई अनुमति जारी की जा रही है। रिंगरोड के किनारे कई गांव के खेत लगे हुए हैं।

राखड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह स्लो प्वाइजन की तरह है। अस्थमा और दमा के मरीजों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा निमोनिया, स्कीन एलर्जी व आंख से संबंधित परेशानियां बढ़ सकती है।

डॉ.शशीकांत भास्कर, छाती रोग विशेषज्ञ

टिप्पणियाँ