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'गाँव वाली' मां बम्लेश्वरी महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड कंपनी नामक मसाला उद्योग को स्थापित किया है पद्मश्री फुलबासन यादव ने, 2200 महिलाओं को शेयर होल्डर बनाया

राजनांदगांव/ गांव वाली... मां बम्लेश्वरी महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का ब्रांड नेम। चवेली में इसी नाम से मसाला उद्योग खोला गया है। इस कंपनी को स्थापित किया है पद्मश्री फुलबासन यादव ने। मां बम्लेश्वरी महिला स्वसहायता समूह की 22 सौ महिलाओं को शेयर होल्डर बनाकर मिर्च, मसाला का उत्पादन चवेली में शुरू किया गया है।

दो एकड़ जमीन पर फरवरी में प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है। इसके उत्पादन से सालाना दो से ढाई करोड़ रुपए की कमाई का अनुमान है। महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की एक नई पहल पद्मश्री यादव ने की है। इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरुआत में ही पांच लाख रुपए का प्रोडक्शन कर लिया गया है। हर माह करीब 20 लाख रुपए के कारोबार का अनुमान है।

जिले भर की 2200 महिलाओं को इस कंपनी से जोड़ा गया है। सीईओ शिव देवांगन बताते हैं कि किसी ने पांच तो किसी ने 10 हजार रुपए तक अपना शेयर दिया है। तब कुछ पुरानी मशीनें खरीदी गई। इसी से प्रोडक्शन शुरू किया गया है। मोहला में 150 एकड़ जमीन पर मिर्च और धनिया के पौधे लगाए गए हैं।

आश्रय सह प्रशिक्षण केंद्र बनाया

कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम के माध्यम से 25 लाख रुपए जीतने वाली पद्मश्री फुलबासन ने यहीं आश्रय सह प्रशिक्षण केंद्र बनाया है। जरुरतमंद महिलाओं को यहां विभिन्न रोजगार मूलक कार्यों की ट्रेनिंग दी जाएगी। यहां मछली पालन भी किया जा रहा है, इससे भी महिलाओं को आय हो रही है, आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है।

यादव ने कहा- महिलाओं का यह एक सामूहिक प्रयास है

मां बम्लेश्वरी स्वयं सहायता समूह अध्यक्ष फुलबासन यादव ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं का एक सामूहिक प्रयास है। इस पहल से गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भरता मिलेगी। साथ ही सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ेंगी। खेतों से लाए गए आर्गेनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारा प्रयास है आगे और भी महिलाएं इससे जुड़ें और आत्मनिर्भर बनें। महिलाओं को आर्गनिक खेती से जोड़ा जा रहा है। ताकि मुनाफा अधिक हो सके।

अन्य जिलों में भी प्रोडक्ट की सप्लाई की जा रही

सीईओ की मानें तो इसकी सप्लाई राजनांदगांव के अलावा अन्य जिलों में भी की जाएगी। गांव वाली.. नाम से ही लोग इस प्रोडक्ट के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर लोगों की ओर से डिमांड भी आ रही है। फिलहाल छोटे दुकानों में इसकी सप्लाई की जा रही है। महिला समूह के माध्यम से इसका प्रचार भी गांवों में जाकर किया जा रहा है। कोशिश है ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस रोजगार से जोड़ा जा सके और उनकी आर्थिक स्थिति सुधर सके।

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