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शासन से मिलता है भत्ता फिर भी जिला अस्पताल की जीवन दीप समिति से रेडिएशन क्षतिपूर्ति के नाम पर नियमित डॉक्टर और टेक्नीशियन काे 16.20 लाख रुपए जारी

भिलाई/ मरीज हित में सुविधाएं बढ़ाने की बजाय जीवन दीप समिति की राशि से हेल्थ वर्करों की जेबें भरी जा रही हैं। 10 वर्षों में जिला अस्पताल की जीवन दीप समिति से रेडिएशन क्षतिपूर्ति के नाम पर नियमित डॉक्टर और टेक्नीशियन काे 16.20 लाख रुपए जारी किया गया है। जबकि इसी दौरान रेडिएशन क्षतिपूर्ति के लिए ही शासन से रेगुलर भत्ता मिलता रहा है। पूरी राशि यहां पदस्थ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एके साहू और हाल ही सेवानिवृत्त हुए रेडियोग्राफर दिलेश्वर साहू के बीच बांटी गई है, जबकि रेडियोलॉजी विभाग में हर साल औसतन 12 कर्मी पदस्थ रहे हैं।

जनकल्याण समिति दुर्ग की शिकायत के बाद इसका खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के राज्य जन संपर्क अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने रेडियोग्राफर को शासन से वेतन के साथ ही रेडिएशन क्षतिपूर्ति भत्ता दिए जाने की जानकारी दी है। सिविल सर्जन डॉ. वाईके शर्मा ने सरकारी डॉक्टर व रेडियोग्राफर को जीवन दीप समिति से दी जा रही रेडिएशन क्षतिपूर्ति को तत्काल प्रभाव से बंद करने को कहा है।

ऐसे कर रहे थे गड़बड़़ी: पहले डेमो में सीटी स्कैन, फिर डिलीट कर देते थे

प्रार्थना-पत्र में जानकारी दी कि रेडियोग्राफी विभाग ने हर महीने 100 सिटी स्कैन डेमो के तहत किए हैं। यह कोड मशीन के इंजीनियर मशीन चेक करने इस्तेमाल करते हैं। बताया कि इसी कोड का इस्तेमाल कर अपनी जेब भरने डैमों में सीटी स्कैन करते रहे हैं। रिकार्ड में न आए इसलिए सीटी स्कैन करने के बाद उसे डिलीट भी कर दिया है। लेकिन सीपीयू की जांच में पूरा डाटा मिल सकता है। 10 साल से फर्जीवाड़ा होता रहा और भनक तक नहीं लगी। मामले का खुलासा होने के बाद अब विभागीय अधिकारी इसकी जांच कराने की बात कर रहे हैं।

ऐसा नियम किसी भी हाॅस्पिटल में नहीं

सरकारी रेडियोलॉजिस्ट और सिर्फ एक रेडियोग्राफर को जीवनदीप समिति से रेडिएशन क्षतिपूर्ति के लिए क्रमश: 80 व 40 रुपए प्रति सीटी स्कैन के भुगतान के लिए सीएस डॉ. वाईके शर्मा ने वर्ष 2012 में बने नियम का हवाला दिया है। उसी नियम के तहत उनके यहां से अबतक रेडियोलॉजिस्ट व रेडियोग्राफर को प्रति सीटी स्कैन के हिसाब से राशि दी जाती रही है, जबकि ऐसा नियम प्रदेश किसी भी जिला अस्पताल में प्रभावी नहीं है।

शिकायतकर्ता का आरोप, हर माह 1.5 लाख नुकसान

भुगतान पर आपत्ति जाहिर करते हुए शिकायत दर्ज कराने वाली समिति ने जिला अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में जीवन दीप समिति को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया है। बताया कि कर्मियों ने हर माह औसतन 100 सिटी स्कैन रिकार्ड में चढाए बिना पैसा अपनी जेब में रख लिया है। एक्सपर्ट से सीटी स्कैन मशीन की सीपीयू की जांच हो तो 12 साल में करोड़ों के गवन का खुलासा हो सकता है।

प्रांताध्यक्ष ने कहा- यह गलत, जांच होनी चाहिए

जीवनदीप समिति से रेडियोलॉजिस्ट व रेडियोग्राफर को रेडिएशन क्षतिपूर्ति दिए जाने को लेकर समिति की प्रांताध्यक्ष व जिला अध्यक्ष सरस्वती चंद्राकर ने आपत्ति जाहिर की है। कहा कि पिछले दस वर्षों से जेडीएस कर्मी 7000 से 9000 रु. मासिक मानदेय पर काम कर रहे हैं। पैसा की कमी बोल कर हमारा मानदेय नहीं बढ़ाया जा रहा है और दूसरी तरफ बंदरबाट किया जा रहा।

10 साल में हुए सीटी स्कैन और रेडियोलॉजिस्ट को जारी राशि

"2012 में बने नियम के तहत रेडियोलॉजिस्ट व सिर्फ 1 रेडियोग्राफर को प्रति सीटी स्कैन के लिए क्रमश: 80 व 40 रु. दिया गया है। शासन से भी इन्हें इसी के लिए नियमानुसार भत्ता मिलता है। इसलिए आगे मैं इसे बंद करा रहा हूं। मैंने इसका प्रस्ताव तैयार करा लिया है। वेतन के अतिरिक्त जेडीएस से भुगतान गलत है।"

-डॉ. वाईके शर्मा, सिविल सर्जन, दुर्ग

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