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घरघोड़ा जनपद पंचायत के सीईओ को सीलिंग की जमीन खरीदने पटवारी ने दी बिक्री नकल

रायगढ़। रायगढ़ जिले में जमीनों का फर्जीवाड़ा नेक्स्ट लेवल पर पहुंच चुका है। छोटी धोखाधड़ी तो अब यहां होती ही नहीं है। इस बार जमीन दलालों और राजस्व कर्मचारियों के सिंडीकेट ने जनपद सीईओ को अपना शिकार बनाया। सस्ती जमीन का लालच दिखाकर सीलिंग की जमीन बेच डाली। सीईओ ने नामांतरण आवेदन लगाया तो मामला खुला। अब सीईओ बीच में लटक गए हैं। न तो जमीन मिल रही है और न रकम वापसी की कोई सूरत दिख रही है।

मामला घरघोड़ा जनपद सीईओ नितेश उपाध्याय से जुड़ा हुआ है। उन्होंने लालच में आकर घरघोड़ा तहसील की ऐसी जमीन खरीद ली जो सीलिंग के तहत ली गई थी। इस भूमि को भूमिहीनों को जीवन-यापन के लिए आवंटित किया गया था। जमीन दलालों ने ग्राम पंचायत बरौनाकुंडा स्थित भूमि खनं 42/4 रकबा 1.870 हे. सीलिंग भूमि को बेहद सस्ती दर पर दिलाने का लालच दिया। मुरारी नामक जमीन दलाल का नाम सामने आ रहा है। पंचायत सचिव ने भी इस डील में अहम भूमिका निभाई। बरौनाकुंडा की जमीन की बिक्री नकल तैयार करवाई गई जिसमें पटवारी ने भी खुलकर साथ दिया। उक्त भूमि बुधराम चौहान के नाम पर है। सीईओ ने 21 अक्टूबर 2022 को अपनी पत्नी आदर्श उपाध्याय के नाम पर रजिस्ट्री करवा ली। कागजों में 9.40 लाख रुपए में सौदा हुआ है। जब नामांतरण के लिए आवेदन लगाया गया तो पता चला कि जमीन तो सीलिंग की है।

वर्ष 75-76 में हुआ आवंटन

खनं 42/4 की भूमि 1966-67 में चरन साय, इंदल साय जाति कंवर निवासी बरौनाकुंडा के नाम पर दर्ज थी। वहीं वर्ष 75-76 रकबा 1.870 हे. को सुखराम व नारायण को जीवन-यापन के लिए दिया गया था, जिनके फौत होने के बाद बुधराम चौहान के नाम पर दर्ज हुई। वर्ष 74-75 के दस्तावेज में तहसीलदार के आदेशानुसार उक्त भूमि सीलिंग से प्राप्त होना दर्ज किया गया है। सीईओ को धोखे में रखकर जमीन बेच दी गई।

नहीं ली गई अनुमति

सीलिंग की जमीन को खरीदकर फंसे सीईओ नितेश उपाध्याय एक और परेशानी में पड़ सकते हैं। दरअसल उन्होंने जमीन खरीदने के पहले शासन से अनुमति नहीं ली थी। शासकीय सेवक को ऐसा करना अनिवार्य होता है। पता चला है कि विक्रेता ने गांव के एक और व्यक्ति के साथ स्टाम्प में सौदा किया था। अब उसने भी जमीन पर अपना हक जताते हुए राजस्व न्यायालय में प्रकरण दायर कर लिया है। इसकी सुनवाई चल रही है।

क्या कहते हैं नितेश

मुझे सीलिंग से संबंधित जमीन होने की जानकारी नहीं थी। पटवारी ने भी बिक्री नकल दिया जिसके बाद रजिस्ट्री हुई। शासन से अनुमति भी नहीं ली है।

– नितेश उपाध्याय, सीईओ जनपद घरघोड़ा

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