अवैध खनन करने वालों पर खनिज विभाग मेहरबान:- खनिपट्टे के बाहर लाइमस्टोन खनन करने वाले क्रशर संचालक को उसी जमीन पर भंडारण लाइसेंस
रायगढ़। दस सालों तक अपने खनिपट्टे के बाहर लाइमस्टोन खनन करने वाले क्रशर संचालक पर खनिज विभाग मेहरबान है। अब उसी जमीन पर भंडारण लाइसेंस मांगा जा रहा है तो विभाग ने फाईल भी चला दी है। ऐसा लगता है कि सभी विभाग इसकी जेब में हैं। अनिल केडिया के कारनामे रायगढ़ जिले से बाहर पूरे प्रदेश में फैल चुके हैं। कब्रिस्तान को उजाडऩे के साथ आदिवासी जमीन हड़पने का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है। इधर क्रशर को लेकर भी खबरें आ रही हैं। अनिल केडिया को सारंगढ़ तहसील के लालाधुरवा में कृष्णा बिल्डकॉन फर्म के नाम से लाइमस्टोन खनिपट्टा स्वीकृत किया गया था। 11 फरवरी 2012 से 10 फरवरी 2022 तक दस साल के लिए 1.595 हे. में खनिपट्टा स्वीकृत किया गया था।
इसी भूमि पर क्रशर भी संचालित था। एक क्रशर यूनिट स्वीकृत क्षेत्र के बाहर भी संचालित किया जा रहा था। खनिज विभाग ने जांच शुरू की तो कई अनियमितताएं उजागर हुईं। बताया जा रहा है कि स्वीकृत लीज एरिया के बाहर भी खनन किया जा रहा था। खनिपट्टे की अवधि समाप्त होने के बाद अनिल केडिया ने अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं किया। अब पता चला है कि चुपचाप भंडारण लाइसेंस लेने की फिराक में है। इसके लिए खनिज विभाग में आवेदन किया गया है। आवेदन पर अब विभागों के एनओसी समेत दस्तावेज जांचे जाएंगे। खनिपट्टे का असेसमेंट और क्लोजर प्लान पर भी कार्रवाई बाकी है।
असेसमेंट में करते हैं गड़बड़ी
अनिल केडिया द्वारा इन दस सालों में उत्पादित और प्राप्त रॉयल्टी पर्ची की मात्रा में भारी गड़बड़ी है। असेसमेंट में कई बार यह जानकारी सामने आई लेकिन इसे दबा दिया गया। इस बार फिर से असेसमेंट किया जाना है। सही तरीके से जांच करने के बजाय खनिज निरीक्षक भी सेटिंग करने में लगे हैं। सही जांच हुई तो भारी भरकम पेनाल्टी देनी पड़ सकती है।
क्या कहते हैं एमओ
अनिल केडिया ने भंडारण के लिए आवेदन दिया है। दस्तावेज परीक्षण के बाद असेसमेंट भी किया जाना है।
– योगेंद्र सिंह, जिला खनिज अधिकारी

टिप्पणियाँ